मध्यप्रदेश की हवा पर NGT सख्त, भोपाल-इंदौर समेत 8 शहरों में प्रदूषण को बताया गंभीर संकट
Jitendra Shrivastava | Jan 07, 2026, 23:33 IST
Photograph: (thesootr)
मध्यप्रदेश में 8 शहरों की हवा गंभीर प्रदूषण संकट में है। एनजीटी ने सख्त आदेश दिए। भोपाल, इंदौर समेत 8 शहरों को नॉन-अटेनमेंट सिटी घोषित किया।
BHOPAL. मध्यप्रदेश के बड़े शहरों की हवा अब लोगों की सेहत के लिए खतरा बनती जा रही है। इस पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (ngt), सेंट्रल जोन बेंच भोपाल ने कड़ा रुख अपनाया है।
एनजीटी ने 7 जनवरी 2026 को दिए आदेश में कहा कि प्रदेश में वायु प्रदूषण गंभीर पर्यावरणीय और सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट बन चुका है। इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
यह आदेश राशिद नूर खान की याचिका पर आया है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता हर्षवर्धन तिवारी ने पक्ष रखा। सुनवाई के दौरान एनजीटी ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों का हवाला दिया।
इन आंकड़ों के मुताबिक भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन, देवास, सागर और सिंगरौली को नॉन-अटेनमेंट सिटी घोषित किया गया है। इसका मतलब है कि इन शहरों में पांच साल से ज्यादा समय से हवा में प्रदूषण तय मानकों से ऊपर बना हुआ है।
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एनजीटी ने भोपाल की स्थिति पर खास चिंता जताई है। आंकड़ों के अनुसार, राजधानी में पीएम-10 का औसत स्तर 130 से 190 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तक पहुंच गया है। वहीं पीएम-2.5 का स्तर 80 से 100 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर के बीच दर्ज किया गया है।
दोनों आंकड़े तय सीमा से कई गुना ज्यादा हैं। एनजीटी ने कहा कि झीलों की नगरी कहलाने वाला भोपाल अब सर्दियों में धुंध और कम दृश्यता से जूझ रहा है। कई रातों में एयर क्वालिटी इंडेक्स 300 से ऊपर दर्ज किया गया, जो बहुत खराब से गंभीर श्रेणी में आता है।
एनजीटी ने साफ कहा कि प्रदूषण की यह हालत किसी एक कारण से नहीं है। पराली जलाना, निर्माण और तोड़फोड़ से उड़ती धूल, वाहनों का धुआं, खुले में कचरा जलाना, लैंडफिल में आग, पटाखों का इस्तेमाल और औद्योगिक गतिविधियां मिलकर हवा को जहरीला बना रही हैं।
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एनजीटी ने कहा कि दिल्ली-एनसीआर में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान और एयर-शेड नीति लागू है, लेकिन मध्यप्रदेश में ऐसा कोई प्रभावी राज्यस्तरीय तंत्र अब तक नहीं बनाया गया। इसी वजह से हालात लगातार बिगड़ते चले गए।
मामले की गंभीरता को देखते हुए एनजीटी ने एक संयुक्त समिति बनाई है। इसमें पर्यावरण विभाग, नगरीय विकास एवं आवास विभाग और परिवहन विभाग के प्रमुख सचिव, पर्यावरण मंत्रालय के क्षेत्रीय कार्यालय भोपाल के प्रतिनिधि, ईपीसीओ के प्रतिनिधि, मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पूर्व अतिरिक्त निदेशक डॉ. रवि प्रकाश मिश्रा शामिल हैं। मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को इस समिति की नोडल एजेंसी बनाया गया है।
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समिति को छह सप्ताह में पूरी स्थिति का आकलन कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं। रिपोर्ट में यह भी बताना होगा कि अब तक क्या कदम उठाए गए और आगे क्या करना जरूरी है। मामले की अगली सुनवाई 18 मार्च 2026 को होगी। अब देखना होगा कि सरकार और विभाग समय रहते कितनी ठोस कार्रवाई करते हैं, ताकि लोगों को साफ और सुरक्षित हवा मिल सके।
एनजीटी ने 7 जनवरी 2026 को दिए आदेश में कहा कि प्रदेश में वायु प्रदूषण गंभीर पर्यावरणीय और सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट बन चुका है। इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
यह आदेश राशिद नूर खान की याचिका पर आया है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता हर्षवर्धन तिवारी ने पक्ष रखा। सुनवाई के दौरान एनजीटी ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों का हवाला दिया।
इन आंकड़ों के मुताबिक भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन, देवास, सागर और सिंगरौली को नॉन-अटेनमेंट सिटी घोषित किया गया है। इसका मतलब है कि इन शहरों में पांच साल से ज्यादा समय से हवा में प्रदूषण तय मानकों से ऊपर बना हुआ है।
नॉन-अटेनमेंट सिटी का देखें AQI...
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भोपाल की स्थिति पर जताई चिंता
दोनों आंकड़े तय सीमा से कई गुना ज्यादा हैं। एनजीटी ने कहा कि झीलों की नगरी कहलाने वाला भोपाल अब सर्दियों में धुंध और कम दृश्यता से जूझ रहा है। कई रातों में एयर क्वालिटी इंडेक्स 300 से ऊपर दर्ज किया गया, जो बहुत खराब से गंभीर श्रेणी में आता है।
एनजीटी ने साफ कहा कि प्रदूषण की यह हालत किसी एक कारण से नहीं है। पराली जलाना, निर्माण और तोड़फोड़ से उड़ती धूल, वाहनों का धुआं, खुले में कचरा जलाना, लैंडफिल में आग, पटाखों का इस्तेमाल और औद्योगिक गतिविधियां मिलकर हवा को जहरीला बना रही हैं।
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मध्यप्रदेश में कोई प्रभावी तंत्र नहीं
मामले की गंभीरता को देखते हुए एनजीटी ने एक संयुक्त समिति बनाई है। इसमें पर्यावरण विभाग, नगरीय विकास एवं आवास विभाग और परिवहन विभाग के प्रमुख सचिव, पर्यावरण मंत्रालय के क्षेत्रीय कार्यालय भोपाल के प्रतिनिधि, ईपीसीओ के प्रतिनिधि, मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पूर्व अतिरिक्त निदेशक डॉ. रवि प्रकाश मिश्रा शामिल हैं। मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को इस समिति की नोडल एजेंसी बनाया गया है।
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