भोपाल मेट्रो के लिए जमीन ली, नहीं मिला मुआवजा, अब कलेक्टर होंगे HC में पेश
Neel Tiwari | Jul 28, 2026, 18:34 IST
Photograph: (THESOOTR)
BHOPAL. भोपाल मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए अधिग्रहित जमीन का वर्षों बाद भी मुआवजा नहीं मिलने पर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने सरकार को दो सप्ताह का अंतिम मौका दिया है।
समझें क्या है पूरा मामला...
- भोपाल मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए याचिकाकर्ताओं की जमीन का अधिग्रहण हुआ था।
- सिविल कोर्ट उन्हें वर्ष 2000 में ही जमीन का मालिक मान चुका था।
- इसके बाद भी वर्षों तक मुआवजे का भुगतान नहीं हुआ।
- हाई कोर्ट ने सरकार से दो सप्ताह में पूरी स्थिति बताने को कहा है।
- जवाब नहीं मिलने पर भोपाल कलेक्टर को अदालत में पेश होना पड़ेगा।
सालों की इस देरी पर अब मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने सख्त नाराजगी दिखाई है। अदालत ने साफ संकेत दिया है कि प्रशासन अब जवाबदेही से बच नहीं सकता।
सिर्फ आश्वासन नहीं चलेगा
सरकारी पक्ष ने जानकारी देने के लिए दो सप्ताह का समय मांगा। अदालत ने यह समय दिया, लेकिन साथ ही स्पष्ट कर दिया कि अब अगली तारीख पर केवल बहाने स्वीकार नहीं होंगे।
...तो भोपाल कलेक्टर होंगे पेश
दो परिवार, एक जैसी पीड़ा
मालिकाना हक हो चुका था तय
विकास परियोजनाएं तभी सफल हैं, जब न्याय भी साथ चले
जब सरकार किसी की जमीन लेती है तो समय पर उचित मुआवजा देना उसकी कानूनी जिम्मेदारी होती है। देरी केवल आर्थिक नुकसान नहीं करती, बल्कि लोगों का व्यवस्था पर भरोसा भी कमजोर करती है।
प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल
यदि भुगतान हो चुका है तो उसका रिकॉर्ड अब तक अदालत के सामने क्यों नहीं रखा गया। ऐसे सवाल बताते हैं कि रिकॉर्ड प्रबंधन और जवाबदेही दोनों में गंभीर कमी दिखाई देती है। अब हाई कोर्ट ने इसी जवाबदेही को केंद्र में रखा है।
17 अगस्त की सुनवाई होगी अहम
यदि जवाब संतोषजनक नहीं हुआ तो भोपाल कलेक्टर को अदालत में उपस्थित होना पड़ेगा। अगली सुनवाई यह तय करेगी कि प्रशासन अपनी जिम्मेदारी निभाता है या फिर अदालत को और सख्त कदम उठाने पड़ेंगे।
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