द सूत्र खुलासा: ESB की परीक्षा में हाईप्रोफाइल गैंग, सेंटर पर कंप्यूटर कंप्रोमाइज से करा रहे पास
Sanjay Gupta | Feb 28, 2026, 12:57 IST
mp esb excise-constable exam scam high profile gang exposed
कर्मचारी चयन मंडल (ESB) की परीक्षा में अब उम्मीदवारों को पास कराने के लिए हाईप्रोफाइल गैंग सक्रिय हो गई है। इस गैंग का भी टारगेट मुख्य तौर पर भिंड, मुरैना एरिया के उम्मीदवार हैं। द सूत्र इसे लेकर चौंकाने वाला खुलासा कर रहा है।
भोपाल. कर्मचारी चयन मंडल मध्यप्रदेश की सबसे बड़ी परीक्षा एजेंसी है। पूर्व में इसका नाम व्यापमं था जिसमें पीएमटी घोटाला प्रदेश में सबसे बड़ा भर्ती घोटाला माना जाता है।
इसके बाद साल 2023 में पटवारी भर्ती घोटाला सबसे चर्चित था। इसमें ग्वालियर के एक ही सेंटर से टॉपर की लिस्ट में 10 में से 7 उम्मीदवार सामने आए थे।
अब ईएसबी में पास कराकर सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर धोखाधड़ी करने की हाईप्रोफाइल गैंग सक्रिय है। इस गैंग ने इस बार आबकारी आरक्षक परीक्षा 2024 में सेंध मारी है।
हालांकि ईएसबी की आईटी टीम ने एक महीने की मेहनत और एआई टूल की मदद से इसमें बड़ा मामला पकड़ा है।
ईएसबी ने 9 से 25 सितंबर 2025 तक आबकारी आरक्षक परीक्षा का आयोजन कराया था। इसका रिजल्ट भी हाल ही में जारी हुआ है। वहीं, शंका के आधार पर ईएसबी ने कुछ उम्मीदवारों का रिजल्ट होल्ड कर दिया है।
जब ईएसबी चेयरमैन संजय शुक्ला ने इसमें आईटी टीम लगाकर जांच कराई तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। यह पूरी जांच एआई टूल के जरिए कराई गई है।
पटवारी भर्ती परीक्षा जैसा ही कांड रतलाम से हो रहा था। शहर के रतलाम पब्लिक स्कूल में विविध पालियों में बैठे भिंड, मुरैना व अन्य शहरों के 12 उम्मीदवारों के अंक बहुत ज्यादा थे। यह टॉपर्स के अंक थे।
जब रिजल्ट बना और इनके अंकों को देखा गया तो ईएसबी को शक हुआ। इसके बाद आईटी टीम को जांच सौंपी गई। इन्होंने एक महीने तक इसकी जांच की थी। इसमें उस सेंटर के सीसीटीवी फुटेज निकाले गए, जिसमें परीक्षा कक्ष में यह उम्मीदवार बैठे हुए थे।
इस जांच में सामने आया कि इस सेंटर पर सभी उम्मीदवारों ने परीक्षा के अंतिम 20 मिनट में ही पेपर साल्व किया है। इसके पहले यह लगातार पेपर को स्क्रॉल कर रहे थे।
शंका है कि यह कंप्यूटर कंप्रोमाइज (Computer Compromise) थे और दूसरी स्क्रीन पर पेपर देखा जा रहा था। यह पेपर देखने के बाद इन्हें आंसर बताए गए और अंतिम 20 मिनट में इन्हें सॉल्वकिया गया था।
इसके लिए सेंटर के ही एक व्यक्ति की भूमिका संदिग्ध है, जो इन 12 उम्मीदवारों की मदद कर रहा था। यह भी सीसीटीवी एनालिसिस में आया है कि सेंटर का यह व्यक्ति इन उम्मीदवारों की मदद कर रहा था।
इस जांच के बाद ईएसबी सिस्टम एनालिस्ट प्रणीत सिजरिया ने भोपाल के एमपी नगर थाना में केस दर्ज कराया है। यह केस चेयरमैन संजय शुक्ला के आदेश पर दर्ज कराया गया है।
इसमें 12 उम्मीदवारों पर बीएनएस की धारा 318(4) के तहत केस दर्ज किया गया है। यह सभी उम्मीदवार रतलाम पब्लिक स्कूल से परीक्षा में शामिल हुए थे।
परीक्षा 9 सितंबर से 21 सितंबर 2025 को हुई थी। इसमें अंकों का एनालिस किया गया था। इसमें रतलाम पब्लिक स्कूल से शामिल 12 अभ्यर्थियों का डाटा एनालिस किया गया था। इन 12 अभ्यर्थियों की गतिविधि असामान्य मिली है।
सीसीटीवी व अन्य डाटा का परीक्षण किया गया है। इसमें 12 अभ्यर्थियों को एक अन्य व्यक्ति के जरिए परीक्षा में अनुचित तरीके से लाभ पहुंचाने का प्रयास करना दिखा है।
इस आधार पर इनकी परीक्षा निरस्त की गई है। आरोपी उम्मीदवार आशुतोष, विवेक शर्मा, कुलदीप, सुभाष सिंह, दयाशंकर कुशवाह, रवि कुमार, अनिल कुमार, शैलेंद्र बोहरे, अंकित सिंह, संजीत, पुष्पेंद्र, आशु गुप्ता हैं। इन पर बीएनएस की धारा 318(4) में केस हुआ है।
ईएसबी के चेयरमैन संजय शुक्ला ने बताया कि ईएसबी की टेक्निकल टीम ने एआई की मदद से एक महीने तक एनालिसिस कर इसे पकड़ा है। कैमरे में कुछ चेहरे बार-बार रिपीट हो रहे थे। जांच के बाद केस दर्ज कराया है।
यह केस दर्ज कराने के दौरान भी भारी विवाद हुआ था। एमपी नगर थाना ने आवेदन लेने से इंकार कर दिया था। कारण था कि रतलाम सेंटर में यह हुआ था।
इस पर ईएसबी का कहना था कि मामला भोपाल हैडऑफिस ने जांच करके निकाला है और यहां जांच हुई है। इसलिए केस दर्ज किया जाए। इसके बाद उच्च स्तर की दखल पर फिर थाने में जीरो पर केस दर्ज किया गया। इसे जांच के लिए रतलाम जिला भेजा जा रहा है।
रतालम में केस भेजा जा रहा है। वहां इसे दर्ज कर जांच की जाएगी। इसमें सेंटर के संदिग्ध लोगों के साथ ही उम्मीदवारों से पूछताछ की जाएगी। इसके बाद ही पूरे नेटवर्क का खुलासा हो सकेगा।
इसके पहले भी सिपाही भर्ती के दौरान भिंड, मुरैना की गैंग का आधार कार्ड में बार-बार बदलाव कर नकल कराने का खेल सामने आया था। इसमें भी निचले स्तर के कुछ लोग पकड़े गए थे लेकिन आगे फिर कुछ नहीं हुआ था। इसके चलते चंबल एरिया में कई गैंग लगातार सक्रिय हैं जो परीक्षा में पास कराने के लिए लाखों रुपए का सौदा करती हैं।
आबकारी आरक्षक परीक्षा का रिजल्ट नवंबर 2025 में देने की बात कही जा रही थी, लेकिन यह आखिर में बहुत देरी से 5 फरवरी को जारी हुआ। अब इसका कारण सामने आया है। इस परीक्षा में कुछ सेंटर्स के उम्मीदवारों के अंकों पर आशंका थी।
इसके चलते इनकी जांच में लंबा समय लगा। फिर इन उम्मीदवारों के रिजल्ट होल्ड करते हुए बाकी रिजल्ट को जारी किया गया। ईएसबी की टीम एक से दो माह तक इनकी गहन जांच करती रही।
परीक्षा ठीक से हो इसके लिए ईएसबी बड़े स्तर पर काम कर रहा है। इसके लिए एक्सपर्ट की एक पूरी टीम और एआई टूल्स का इस्तेमाल किया जा रहा है।
शायद ये देश की पहली और इकलौती परीक्षा एजेंसी है, जो रिजल्ट जारी करने से पहले उम्मीदवारों के अंकों और अन्य जरूरी जानकारी का एनालिसिस करती है। इस प्रक्रिया के बाद ही रिजल्ट जारी किया जाता है।
वहीं यह भी सामने आया है कि इसलिए ही ईएसबी ने वनरक्षक, जेल प्रहरी की परीक्षा में 109 उम्मीदवारों का रिजल्ट इसी शंका के कारण रोका हुआ है। इनमें भी संदिग्ध पर नकल के केस दर्ज कराए जा रहे हैं।
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इसके बाद साल 2023 में पटवारी भर्ती घोटाला सबसे चर्चित था। इसमें ग्वालियर के एक ही सेंटर से टॉपर की लिस्ट में 10 में से 7 उम्मीदवार सामने आए थे।
अब ईएसबी में पास कराकर सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर धोखाधड़ी करने की हाईप्रोफाइल गैंग सक्रिय है। इस गैंग ने इस बार आबकारी आरक्षक परीक्षा 2024 में सेंध मारी है।
हालांकि ईएसबी की आईटी टीम ने एक महीने की मेहनत और एआई टूल की मदद से इसमें बड़ा मामला पकड़ा है।
क्या हुआ है आबकारी आरक्षक परीक्षा में?
जब ईएसबी चेयरमैन संजय शुक्ला ने इसमें आईटी टीम लगाकर जांच कराई तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। यह पूरी जांच एआई टूल के जरिए कराई गई है।
एक ही सेंटर से फिर मिल रहे थे टॉपर
जब रिजल्ट बना और इनके अंकों को देखा गया तो ईएसबी को शक हुआ। इसके बाद आईटी टीम को जांच सौंपी गई। इन्होंने एक महीने तक इसकी जांच की थी। इसमें उस सेंटर के सीसीटीवी फुटेज निकाले गए, जिसमें परीक्षा कक्ष में यह उम्मीदवार बैठे हुए थे।
mp esb excise-constable exam scam high profile gang exposed
इस तरह से हुई नकल
शंका है कि यह कंप्यूटर कंप्रोमाइज (Computer Compromise) थे और दूसरी स्क्रीन पर पेपर देखा जा रहा था। यह पेपर देखने के बाद इन्हें आंसर बताए गए और अंतिम 20 मिनट में इन्हें सॉल्वकिया गया था।
इसके लिए सेंटर के ही एक व्यक्ति की भूमिका संदिग्ध है, जो इन 12 उम्मीदवारों की मदद कर रहा था। यह भी सीसीटीवी एनालिसिस में आया है कि सेंटर का यह व्यक्ति इन उम्मीदवारों की मदद कर रहा था।
भोपाल में इन 12 पर कराई गई एफआईआर
इसमें 12 उम्मीदवारों पर बीएनएस की धारा 318(4) के तहत केस दर्ज किया गया है। यह सभी उम्मीदवार रतलाम पब्लिक स्कूल से परीक्षा में शामिल हुए थे।
mp esb excise-constable exam scam high profile gang exposed
एफआईआर में यह लिखा
सीसीटीवी व अन्य डाटा का परीक्षण किया गया है। इसमें 12 अभ्यर्थियों को एक अन्य व्यक्ति के जरिए परीक्षा में अनुचित तरीके से लाभ पहुंचाने का प्रयास करना दिखा है।
इस आधार पर इनकी परीक्षा निरस्त की गई है। आरोपी उम्मीदवार आशुतोष, विवेक शर्मा, कुलदीप, सुभाष सिंह, दयाशंकर कुशवाह, रवि कुमार, अनिल कुमार, शैलेंद्र बोहरे, अंकित सिंह, संजीत, पुष्पेंद्र, आशु गुप्ता हैं। इन पर बीएनएस की धारा 318(4) में केस हुआ है।
ईएसबी चेयरमैन बोले
एफआईआर दर्ज कराने में भी हुआ विवाद
इस पर ईएसबी का कहना था कि मामला भोपाल हैडऑफिस ने जांच करके निकाला है और यहां जांच हुई है। इसलिए केस दर्ज किया जाए। इसके बाद उच्च स्तर की दखल पर फिर थाने में जीरो पर केस दर्ज किया गया। इसे जांच के लिए रतलाम जिला भेजा जा रहा है।
पूरी गैंग का खुलासा जांच से ही होगा
इसके पहले भी सिपाही भर्ती के दौरान भिंड, मुरैना की गैंग का आधार कार्ड में बार-बार बदलाव कर नकल कराने का खेल सामने आया था। इसमें भी निचले स्तर के कुछ लोग पकड़े गए थे लेकिन आगे फिर कुछ नहीं हुआ था। इसके चलते चंबल एरिया में कई गैंग लगातार सक्रिय हैं जो परीक्षा में पास कराने के लिए लाखों रुपए का सौदा करती हैं।
इसलिए देरी से आया था रिजल्ट
इसके चलते इनकी जांच में लंबा समय लगा। फिर इन उम्मीदवारों के रिजल्ट होल्ड करते हुए बाकी रिजल्ट को जारी किया गया। ईएसबी की टीम एक से दो माह तक इनकी गहन जांच करती रही।
देश में ईएसबी ही कर रहा ऐसी जांच
शायद ये देश की पहली और इकलौती परीक्षा एजेंसी है, जो रिजल्ट जारी करने से पहले उम्मीदवारों के अंकों और अन्य जरूरी जानकारी का एनालिसिस करती है। इस प्रक्रिया के बाद ही रिजल्ट जारी किया जाता है।
वन रक्षक प्रहरी में भी 109 का रिजल्ट इसलिए रुका
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