मांग उठे तभी बदलेगा नियम? मध्य प्रदेश कर्मचारी नीति, अनुकंपा नियुक्ति और संविदा कर्मचारी नीति 2023 पर सवाल

Ramanand Tiwari | Oct 01, 2026, 10:26 IST
Share
मध्यप्रदेश में कर्मचारी नीतियों, संविदा और पदोन्नति नियमों पर समीक्षा
मध्यप्रदेश में कर्मचारी नीतियों, संविदा और पदोन्नति नियमों पर समीक्षा

मध्य प्रदेश स्थापना दिवस से पहले मध्य प्रदेश कर्मचारी नीति पर हलचल तेज है। अनुकंपा नियुक्ति, पदोन्नति नियम, संविदा कर्मचारियों और भर्ती प्रक्रिया पर मंथन की खबर है। संविदा कर्मचारी नीति 2023 में 50 प्रतिशत तक पद आरक्षित रखने की व्यवस्था है। सवाल यह है कि समीक्षा तय व्यवस्था से होगी या हर बार मांग से? ये प्रस्ताव अभी अंतिम फैसला नहीं हैं।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • मध्यप्रदेश स्थापना दिवस से पहले कर्मचारी नीतियों के लंबित मुद्दों पर हलचल है।
  • चर्चा में अनुकंपा नियुक्ति, पदोन्नति, संविदा कर्मचारी और भर्ती प्रक्रिया शामिल हैं।
  • संविदा नीति 2023 में 50 प्रतिशत तक पद आरक्षित रखने की व्यवस्था है।
  • ऊर्जा विभाग ने संविदा कर्मचारियों के लिए नियमित पदों का रास्ता खोला।
  • प्रस्ताव और विचार को अभी अंतिम सरकारी निर्णय नहीं माना जा सकता।

राहत की खबर से बड़ा सवाल

सरकारी कर्मचारियों के मामलों को सिर्फ बड़ी राहत के फ्रेम में देखना अधूरा है। कई नियमों का असर हजारों कर्मचारियों के करियर, पदोन्नति और नौकरी पर पड़ता है। तो इनकी समय-समय पर स्वतः समीक्षा क्यों न हो?

रिपोर्ट में अनुकंपा नियुक्ति, पदोन्नति पात्रता, संविदा व्यवस्था और भर्ती पर मंथन है। दरअसल फिलहाल रिपोर्ट मंथन की है, फैसले की नहीं। पदोन्नति नियम और भर्ती प्रक्रिया पर अंतिम निर्णय का इंतजार है।

सिंधिया की गैरहाजिरी से गरमाई MP BJP की सियासत: कोर ग्रुप बैठक में नए समीकरणों की आहट? | MP BJP Politics Heats Up Due to Scindia's Absence: Hint of New Equations in Core Group Meeting?
17 में 16 पहुंचे, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया नहीं: मध्य प्रदेश भाजपा में नए समीकरणों की आहट?
01 Oct 2026 ,
By Ramanand Tiwari
BHOPAL. मध्य प्रदेश भाजपा की कोर ग्रुप बैठक में MP BJP, भाजपा संगठन बदलाव और मध्य प्रदेश राजनीति को लेकर चर्चा तेज हुई। 17 में से 16 नेता बैठक में पहुंचे, जबकि केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया शामिल नहीं हुए। नए प्रभारी बिप्लब कुमार देब ने संगठन की चुनौतियों और आगामी रणनीति पर नेताओं से सुझाव लिए।
BHOPAL. मध्य प्रदेश भाजपा की कोर ग्रुप बैठक में MP BJP, भाजपा संगठन बदलाव और मध्य प्रदेश राजनीति को लेकर चर्चा तेज हुई। 17 में से 16 नेता बैठक में पहुंचे, जबकि केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया शामिल नहीं हुए। नए प्रभारी बिप्लब कुमार देब ने संगठन की चुनौतियों और आगामी रणनीति पर नेताओं से सुझाव लिए।

संविदा कर्मचारी नीति 2023 में क्या है?

बता दें कि contract employees MP के मामले में सरकार ने विधानसभा में एक व्यवस्था बताई है। यह बात विधानसभा के आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज है। संविदा कर्मचारी नीति 2023 सीधी भर्ती के रिक्त नियमित पदों से जुड़ी है। इनमें संविदा कर्मचारियों के लिए 50 प्रतिशत तक पद आरक्षित रखने की व्यवस्था है।

इसे सभी संविदा कर्मचारियों के स्वतः नियमितीकरण की गारंटी समझना सही नहीं होगा। मई 2026 तक विभागों के भर्ती नियम बदलने की रिपोर्ट सामने आई थी। यानी 2023 की नीति और विभागीय अमल के बीच समय लगा। यहीं प्रशासनिक सवाल खड़ा होता है। नीति के बाद सभी विभागों में अमल की समयसीमा क्यों तय न हो? सवाल सिर्फ नीति बनाने का नहीं, उसे समय पर लागू करने का भी है।

ऊर्जा विभाग ने क्या रास्ता खोला?

ऊर्जा क्षेत्र में 2026 में एक अलग योजना सामने आई। इसमें संविदा कर्मचारियों को समकक्ष नियमित पदों पर नई नियुक्ति का अवसर मिलेगा। रिपोर्टों के मुताबिक इसमें विभागीय या ऑनलाइन परीक्षा और पात्रता प्रक्रिया है। यानी इसे बिना प्रक्रिया सीधा नियमितीकरण कहना सटीक नहीं होगा।

एक विभाग कर्मचारियों के लिए व्यवस्थित प्रक्रिया बना सकता है। तो समान हालात वाले दूसरे विभागों में फैसलों की रफ्तार अलग क्यों हो? मध्य प्रदेश में विभागों के बीच यह फर्क अहम है।

भर्ती में साझा परीक्षा का विचार

सरकार समान प्रकृति के पदों के लिए साझा परीक्षा पर विचार कर रही है। अभी बार-बार अलग परीक्षाएं होती हैं। ऐसा हुआ तो अभ्यर्थियों का समय और परीक्षा शुल्क बच सकता है। सरकारी संसाधनों का दोहराव भी कम हो सकता है।

MP government jobs के अभ्यर्थियों के लिए यह राहत की बात हो सकती है। अभी इसे अंतिम व्यवस्था नहीं, प्रस्तावित बदलाव माना जाए।

एमपी में रजिस्ट्री पर सियासत: पटवारियों की पुरानी फाइलें क्यों खुलीं? जानिए पूरा मामला | MP Registry Politics: Why were Patwaris' old files opened? Know the full story
एमपी में गुरुवार से शनिवार रजिस्ट्री का आदेश, अब पटवारियों की पुरानी फाइलें क्यों खुलीं?
30 Sept 2026 ,
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश में <strong>स्वामित्व योजना रजिस्ट्री (Swamitva Yojana Registry)</strong> अभियान के बीच नया विवाद सामने आया है। सरकार ने गुरुवार से शनिवार तक रजिस्ट्री का लक्ष्य तय किया है। इसी दौरान पटवारियों के पुराने प्रकरण, शिकायत और जांच रिपोर्ट मांगे जाने की जानकारी सामने आई है। इससे प्रशासनिक स्तर पर कई सवाल उठ रहे हैं।
मध्य प्रदेश में <strong>स्वामित्व योजना रजिस्ट्री (Swamitva Yojana Registry)</strong> अभियान के बीच नया विवाद सामने आया है। सरकार ने गुरुवार से शनिवार तक रजिस्ट्री का लक्ष्य तय किया है। इसी दौरान पटवारियों के पुराने प्रकरण, शिकायत और जांच रिपोर्ट मांगे जाने की जानकारी सामने आई है। इससे प्रशासनिक स्तर पर कई सवाल उठ रहे हैं।

अनुकंपा नियुक्ति और सीपीसीटी का मामला

वहीं जुलाई 2026 में एक संशोधित व्यवस्था सामने आई। सीपीसीटी (CPCT – Computer Proficiency Certification Test) अनुकंपा नियुक्ति में अब जरूरी नहीं है। सिर्फ सीपीसीटी न पाने पर सेवा समाप्त कर्मचारियों को राहत का प्रावधान है। क्या सुधार तब हो, जब कर्मचारी प्रभावित हो चुके हों? या ऐसी शर्तों की समीक्षा पहले से नियमित रूप से होनी चाहिए?

मांग आधारित नहीं, सिस्टम आधारित नीति कब?

कर्मचारी संगठन अपनी मांग उठाएं, यह उनका अधिकार है। सरकार उन मांगों पर विचार करे, यह प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है। असली कसौटी अलग है। स्पष्ट विसंगतियों की पहचान सिर्फ ज्ञापन, आंदोलन या दबाव के बाद न हो।

नियम से बड़ी संख्या में मामले अटकें, तो स्वतः समीक्षा का तंत्र चाहिए। भर्ती दोहराई जाए या अमल लंबा खिंचे, तब भी यही लागू होता है।

स्थापना दिवस से पहले कितने फैसले होंगे, यह आने वाले दिनों में साफ होगा। क्या मध्य प्रदेश कर्मचारी नीति मांग आने पर समाधान से आगे बढ़ेगी? या समस्या बनने से पहले समीक्षा का मॉडल अपनाएगी?

सोचिए एक बार। संविदा कर्मचारी नीति 2023 बनी, फिर भी विभागों में अमल को समय लगा। घोषणा और अमल के बीच का फासला यहीं दिखता है।

यह खबर क्यों जरूरी है

सरकारी नौकरी और सेवा शर्तों के नियम हजारों परिवारों की रोजी से जुड़े होते हैं। संविधान सरकारी रोजगार में समान अवसर की बात करता है। समीक्षा सिर्फ मांग और दबाव के बाद हो, तो पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं। स्पष्ट समयसीमा और स्वतः समीक्षा से कर्मचारी और अभ्यर्थी, दोनों को भरोसा मिल सकता है। इसलिए यह बहस राहत से आगे व्यवस्था की जवाबदेही तक जाती है।
Tags:
  • मध्य प्रदेश कर्मचारी नीति
  • अनुकंपा नियुक्ति
  • संविदा कर्मचारी नीति 2023
  • पदोन्नति नियम
  • मध्य प्रदेश स्थापना दिवस
  • MP employee policy
  • contract employees
  • MP government jobs
छत्तीसगढ़ में CAT की स्थायी बेंच बनाने की मांग, हाईकोर्ट ने केंद्र से 3 सप्ताह में मांगा जवाब

By Harrison Masih

छत्तीसगढ़ में CAT की स्थायी बेंच बनाने की मांग, हाईकोर्ट ने केंद्र से 3 सप्ताह में मांगा जवाब
पहले मंत्री विजयवर्गीय की बैठक में नहीं गईं विधायक मालिनी गौड़, फिर उनकी ही विधानसभा में उठाया पानी की किल्लत का मुद्दा

By Sanjay Gupta

पहले मंत्री विजयवर्गीय की बैठक में नहीं गईं विधायक मालिनी गौड़, फिर उनकी ही विधानसभा में उठाया पानी की किल्लत का मुद्दा
Rajasthan School Exam: अब 25 नवंबर से 7 दिसंबर तक होंगी अर्द्धवार्षिक परीक्षाएं, CBA भी इसी अवधि में

By Jageshwar prasad

Rajasthan School Exam: अब 25 नवंबर से 7 दिसंबर तक होंगी अर्द्धवार्षिक परीक्षाएं, CBA भी इसी अवधि में
नर्सिंग ऑफिसर की हत्या कर मगरमच्छों वाली नदी में फेंका शव, लिव-इन पार्टनर ने रची साजिश, फिर दर्ज कराई गुमशुदगी

By Manya Jain

नर्सिंग ऑफिसर की हत्या कर मगरमच्छों वाली नदी में फेंका शव, लिव-इन पार्टनर ने रची साजिश, फिर दर्ज कराई गुमशुदगी
MP में गहराया बिजली का संकट: 17 हजार मेगावाट पार डिमांड, किसानों के सामने आई सिंचाई की परेशानी

By Manya Jain

MP में गहराया बिजली का संकट: 17 हजार मेगावाट पार डिमांड, किसानों के सामने आई सिंचाई की परेशानी
मंत्री झाबर सिंह खर्रा की भाभी का टिकट भाजपा से कटा, बेटे ने पहले ही भर दिया था निर्दलीय पर्चा

By Ashish Bhardwaj

मंत्री झाबर सिंह खर्रा की भाभी का टिकट भाजपा से कटा, बेटे ने पहले ही भर दिया था निर्दलीय पर्चा
इंदौर में RSS का बड़ा शक्ति प्रदर्शन, जुटेंगे 1 लाख स्वयंसेवक, भागवत समेत 450 से ज्यादा पदाधिकारी आएंगे

By Sanjay Gupta

इंदौर में RSS का बड़ा शक्ति प्रदर्शन, जुटेंगे 1 लाख स्वयंसेवक, भागवत समेत 450 से ज्यादा पदाधिकारी आएंगे