MP IPS Transfer: रातों-रात क्यों गई अफसरों की कप्तानी, हर तबादले के पीछे अपनी कहानी
Sourabh Bhatnagar | May 04, 2026, 15:54 IST
mp ips transfer
मध्य प्रदेश में मोहन सरकार ने शनिवार रात 62 आईपीएस अफसरों के तबादले किए। इनमें मंत्री विजय शाह मामले की एसआईटी सदस्य वाहनी सिंह भी शामिल हैं। कई नॉन परफॉर्मर अफसरों की जिला कप्तानी छिनी गई। वहीं कुछ को मनपसंद पोस्टिंग नहीं मिली।
MP IPS Transfer: इस फेरबदल में कई जिलों के पुलिस कप्तान रातोंरात बदले गए। इन तबादलों में एक नाम खास चर्चा में है। 2014 बैच की आईपीएस वाहनी सिंह, जो उस एसआईटी का हिस्सा थीं जिसने मंत्री विजय शाह के खिलाफ जांच की थी। उनका भी तबादला किया गया है। साथ ही ये भी खबर है कि कई अफसरों को अपनी मनपसंद पोस्टिंग नहीं मिली।
तबादला सूची में सिवनी और सिंगरौली के कुछ चर्चित मामलों की भी काफी चर्चा हुई। सिवनी में पुलिसकर्मियों द्वारा लूट की घटना के बाद एसपी सुनील कुमार मेहता को हटाकर इंदौर में डीसीपी बना दिया गया। वहीं, सिंगरौली में बैंक डकैती और मोरवा थाने में विवादित पोस्टिंग के कारण एसपी मनीष खत्री को पुलिस मुख्यालय अटैच कर दिया गया।
इसके अलावा, भोपाल ग्रामीण के एसपी रामशरण प्रजापति को भी हटा दिया गया, क्योंकि उनके खिलाफ एक सब इंस्पेक्टर ने प्रताड़ित करने का आरोप लगाया था। यह शिकायत सीएम, डीजीपी और मानवाधिकार आयोग तक पहुंची थी। इन तबादलों को सरकार का कड़ा संदेश माना जा रहा है कि फील्ड में कोई गड़बड़ी नहीं चलेगी।
हर तबादले की अपनी एक अलग कहानी है। जानकारी के अनुसार ग्वालियर संभागायुक्त मनोज खत्री के छोटे भाई आईपीएस मनीष खत्री के खिलाफ रीवा में शिकायतें बढ़ रही थीं, इसलिए उन्हें हटाया गया।
नर्मदापुरम में एक आईएएस से जुड़े तथाकथित विवाद की वजह से कप्तानी गंवाने वाले आईपीएस गुरुकरण सिंह इस बार रीवा की कप्तानी पाने में कामयाब रहे।
शिवपुरी में एक बड़े नेता की पसंद के बावजूद महिला आईपीएस यांगचेन डोलकर भुटिया वहां की कप्तानी लेने में सफल रहीं।
पुलिस मुख्यालय की प्रशिक्षण शाखा में लंबे समय से उस पद के मुताबिक अधिकारी नहीं थे, जिस पर केंद्र सरकार बार-बार आपत्ति जता रही थी। यह पद डीजी रैंक का माना जाता है, लेकिन यहां एडीजी स्तर के अधिकारी पदस्थ थे। अब इस स्थिति को सुधारते हुए स्पेशल डीजी रवि कुमार गुप्ता को प्रशिक्षण की जिम्मेदारी दी गई है, जबकि राजाबाबू सिंह को रेल एडीजी बना दिया गया है। बता दें, राजाबाबू सिंह ने अपने घर के बाहर हुए हंगामे के बाद कानून-व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए थे।
जनवरी में डीआईजी पद पर प्रमोट हुए करीब 10 आईपीएस अधिकारी अब तक एसपी स्तर की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। अब उन्हें उनके रैंक के मुताबिक जिम्मेदारियां दी गई हैं। इनमें मनोज राय, रियाज इकबाल, राहुल लोढ़ा, सिमाला प्रसाद, असित यादव, शैलेंद्र सिंह चौहान और कुमार प्रतीक जैसे नाम शामिल हैं।
दरअसल मंत्री विजय शाह ने ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) के बाद कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर एक आपत्तिजनक बयान दिया था। इस पर कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया और एक एसआईटी गठित करने का आदेश दिया। उस एसआईटी में तीन आईपीएस अफसर शामिल थे, जिनमें से एक वाहनी सिंह भी थीं।
वाहनी सिंह डिंडौरी की पुलिस अधीक्षक (Superintendent of Police) के पद पर तैनात थीं। तबादले के बाद उन्हें पीटीसी (Police Training Centre) इंदौर की जिम्मेदारी दी गई है। एसआईटी के एक अन्य सदस्य आईपीएस श्रुतकीर्ति सोमवंशी को दमोह से हटाकर ग्वालियर भेजा गया है, जहां वे 13वीं वाहिनी विसबल (VISBAL) की कमान संभालेंगे।
श्रुतकीर्ति सोमवंशी दमोह में 2 साल 1 महीने ही रह पाए। उनके तबादले की कहानी यहीं खत्म नहीं होती। उनके बड़े भाई आईएएस (Indian Administrative Service) स्वरोचिष सोमवंशी सीधी के कलेक्टर थे।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 22 मार्च को औचक निरीक्षण के बाद उन्हें उस पद से हटा दिया था। यानी एक ही परिवार के दोनों भाइयों को अलग-अलग समय में सरकार ने पदों से हटाया।
सिवनी से हटाए गए आईपीएस सुनील मेहता का नाम हवाला मनी डकैती कांड से जुड़ा है। उन्होंने 25 जून 2024 को सिवनी की कमान संभाली थी। उनके कार्यकाल में अक्टूबर 2025 में यह बड़ा कांड हुआ, जो देशभर में चर्चा का विषय बना।
इस मामले में पुलिस पर गंभीर आरोप लगे। एसडीओपी (Sub-Divisional Officer of Police) पूजा पांडे समेत 11 पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई हुई। बाद में कोर्ट ने इस मामले में राहत दी, लेकिन तब तक नुकसान हो चुका था। मेहता के तबादले के पीछे इस कांड की छाया देखी जा रही है।
खंडवा में सीएसपी (Circle Superintendent of Police) से लेकर एएसपी (Additional Superintendent of Police), एसपी (Superintendent of Police) और डीआईजी (Deputy Inspector General) तक का पूरा सफर तय करने वाले आईपीएस मनोज कुमार राय को इस बार झटका लगा। वे जबलपुर या किसी बड़े जिले में तैनाती के लिए काफी प्रयास कर रहे थे। इसके लिए वे कई बार भोपाल भी गए।
यहां तक कि जब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ओंकारेश्वर पहुंचे तब भी राय उनसे मनपसंद पोस्टिंग दिलाने की गुजारिश में लगे थे। लेकिन सरकार ने उन्हें पुलिस मुख्यालय में पदस्थ कर दिया। यह उनके लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
वहीं DIG शैलेंद्र सिंह ग्वालियर में SAF DIG बनना चाहते थे, लेकिन सरकार ने उन्हें भोपाल में पोस्टिंग दे दी। हालांकि, ये एक अच्छी पोस्टिंग मानी जाती है। बता दें कि उनकी पत्नी रुचिका चौहान ग्वालियर की कलेक्टर हैं।
प्रतिनियुक्ति (Deputation) से लौटे आईपीएस सचिन शर्मा ने सिंगरौली पाने की कोशिश की लेकिन उन्हें धार मिला।
तबादला सूची में कई अनुभवी अफसरों को फिर से जिलों की जिम्मेदारी दी गई है। गुरुकरण सिंह को एसपी रीवा, अनुराग सुजानिया को एसपी सागर, सचिन शर्मा को एसपी धार और धर्मराज मीणा को एसपी मुरैना बनाया गया है। इसके अलावा, हाल ही में प्रमोट हुए आईपीएस अधिकारियों विक्रांत मुराव, सुरेंद्र कुमार जैन और आशीष खरे को भी जिलों की कमान सौंप दी गई है।
इस बड़े फेरबदल में कई आईपीएस को नए जिलों की कप्तानी मिली। आईपीएस सूरज कुमार वर्मा को दतिया से भिंड भेजा गया। यांगचेन डोलकर भुटिया को देहात इंदौर से शिवपुरी की कमान दी गई। रजत सकलेचा को मंडला से छतरपुर, अगम जैन को छतरपुर से खंडवा, देवेंद्र कुमार पाटीदार को बुरहानपुर से झाबुआ और दिलीप कुमार सोनी को मऊगंज से आगर-मालवा भेजा गया है।
इतनी बड़ी तबादला सूची के बाद भी सागर आईजी के पद पर किसी को नहीं भेजा गया है। इसका अतिरिक्त प्रभार फिलहाल नर्मदापुरम आईजी के पास है। वहीं, बुरहानपुर जिले में पुलिस अधीक्षक देवेंद्र पाटीदार का ट्रांसफर होने के बाद अब तक उनकी जगह किसी की पोस्टिंग नहीं की गई है। यानी बुरहानपुर एसपी का पद रिक्त है ।
यहां देखें तबादला सूची... (MP IPS Transfer News)
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तबादला सूची में सिवनी और सिंगरौली के कुछ चर्चित मामलों की भी काफी चर्चा हुई। सिवनी में पुलिसकर्मियों द्वारा लूट की घटना के बाद एसपी सुनील कुमार मेहता को हटाकर इंदौर में डीसीपी बना दिया गया। वहीं, सिंगरौली में बैंक डकैती और मोरवा थाने में विवादित पोस्टिंग के कारण एसपी मनीष खत्री को पुलिस मुख्यालय अटैच कर दिया गया।
इसके अलावा, भोपाल ग्रामीण के एसपी रामशरण प्रजापति को भी हटा दिया गया, क्योंकि उनके खिलाफ एक सब इंस्पेक्टर ने प्रताड़ित करने का आरोप लगाया था। यह शिकायत सीएम, डीजीपी और मानवाधिकार आयोग तक पहुंची थी। इन तबादलों को सरकार का कड़ा संदेश माना जा रहा है कि फील्ड में कोई गड़बड़ी नहीं चलेगी।
हर तबादले की अपनी कहानी
नर्मदापुरम में एक आईएएस से जुड़े तथाकथित विवाद की वजह से कप्तानी गंवाने वाले आईपीएस गुरुकरण सिंह इस बार रीवा की कप्तानी पाने में कामयाब रहे।
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रैंक के मुताबिक मिली जिम्मेदारियां
वाहनी सिंह और विजय शाह मामला
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सोमवंशी परिवार पर दोहरी मार
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 22 मार्च को औचक निरीक्षण के बाद उन्हें उस पद से हटा दिया था। यानी एक ही परिवार के दोनों भाइयों को अलग-अलग समय में सरकार ने पदों से हटाया।
सिवनी में हवाला कांड की छाया
इस मामले में पुलिस पर गंभीर आरोप लगे। एसडीओपी (Sub-Divisional Officer of Police) पूजा पांडे समेत 11 पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई हुई। बाद में कोर्ट ने इस मामले में राहत दी, लेकिन तब तक नुकसान हो चुका था। मेहता के तबादले के पीछे इस कांड की छाया देखी जा रही है।
मनोज राय और DIG शैलेंद्र सिंह को मनपसंद पोस्टिंग नहीं
यहां तक कि जब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ओंकारेश्वर पहुंचे तब भी राय उनसे मनपसंद पोस्टिंग दिलाने की गुजारिश में लगे थे। लेकिन सरकार ने उन्हें पुलिस मुख्यालय में पदस्थ कर दिया। यह उनके लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
वहीं DIG शैलेंद्र सिंह ग्वालियर में SAF DIG बनना चाहते थे, लेकिन सरकार ने उन्हें भोपाल में पोस्टिंग दे दी। हालांकि, ये एक अच्छी पोस्टिंग मानी जाती है। बता दें कि उनकी पत्नी रुचिका चौहान ग्वालियर की कलेक्टर हैं।
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इन्हें मिली दूसरी बार कप्तानी
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यहां देखें तबादला सूची... (MP IPS Transfer News)
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