मेडिकल यूनिवर्सिटी के ई-मूल्यांकन सॉफ्टवेयर में खामियां, जांचकर्ता की मर्जी से मिल रहे नंबर!
Neel Tiwari | Apr 10, 2026, 17:29 IST
Photograph: (THESOOTR)
JABALPUR. मध्य प्रदेश मेडिकल यूनिवर्सिटी के ई-मूल्यांकन सॉफ्टवेयर में खामियां उजागर हुई हैं। कोर्ट ने सॉफ्टवेयर की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए, जांचकर्ताओं की मनमानी का भी खुलासा किया।
News in short
- मेडिकल यूनिवर्सिटी के वैल्यूएशन सॉफ्टवेयर में लूपहोल
- सही उत्तर दिखाकर दे रहे शून्य और गलत दिखाकर मिल रहे नंबर
- एक मूल्यांकन में 3 नंबर तो दूसरे में 0; विषय विशेषज्ञों की योग्यता पर उठे सवाल।
- एक OMR शीट जांचने के मिलते हैं 50 रूपये, ज्यादा से ज्यादा शीट निपटा रहे मूल्यांकनकर्ता
- डिजिटल पेन का उपयोग और सॉफ्टवेयर में अनिवार्य मार्किंग सिस्टम लागू करने के सुझाव।
News in detail
OMR शीट के डिजिटल वैल्यूएशन में गड़बड़ झाला
मामले की पिछली सुनवाई के आदेशों का पालन करते हुए एग्जामिनेशन कंट्रोलर और सॉफ्टवेयर प्रदाता कंपनी के प्रतिनिधि कोर्ट में पेश हुए, जहां सॉफ्टवेयर का लाइव डेमो और जानकारी साझा की गई। जिसमें कोर्ट के सामने चौंकाने वाले खुलासे हुए।
medical university evaluation
सही उत्तर पर 'शून्य' और गलत पर 'नंबर' का अजूबा
इसका नतीजा यह हुआ कि कुछ जगह उत्तरों को सही बताने के बावजूद छात्रों को बिल्कुल नंबर नहीं दिए गए, वहीं कुछ जगह गलत दिखाए उत्तरों पर आंशिक अंक दे दिए गए। कोर्ट ने कड़े शब्दों में कहा कि सॉफ्टवेयर में दिए गए इस 'लूपहोल' का फायदा उठाकर जांचकर्ता मनमाफिक तरीके से नंबर बांट रहे हैं।
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जांचकर्ताओं की 'मनमानी' और 50 रुपए का गणित
इस कारण से ही मूल्यांकन जल्दबाजी में किया जाता है ताकि ज्यादा से ज्यादा शीट निपटाई जा सकें। कोर्ट ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि बिना किसी ठोस आधार या डिजिटल मार्किंग के यह पता लगाना असंभव है कि नंबर किस आधार पर दिए गए हैं।
यूनिवर्सिटी का दावा बनाम कड़वी हकीकत
कोर्ट को बताया गया कि यूनिवर्सिटी विषय विशेषज्ञों से जांच कराने का दावा करती है, लेकिन विसंगति का आलम यह है कि पहले मूल्यांकन में छात्र को 3 नंबर मिलते हैं और दूसरे में सीधे 0। इसके साथ ही इसका कोई भी फिजिकल रिकॉर्ड नहीं रखा जाता। यह दर्शाता है कि मूल्यांकन की प्रक्रिया कितनी त्रुटिपूर्ण है।
हाईकोर्ट के कड़े निर्देश और सुधार के सुझाव
साथ ही, सही/गलत का निशान लगाना अनिवार्य करने को कहा है। अब अगली सुनवाई में यूनिवर्सिटी को यह बताना होगा कि सॉफ्टवेयर की कार्यप्रणाली में सुधार के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।
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