NEET फर्जीवाड़े की जड़ें MP के आधार और लोकसेवा केंद्रों तक फैली, चल रहा है फर्जी प्रमाणपत्रों का खेल!
Amresh Kushwaha | Dec 05, 2025, 18:07 IST
neet-scam-in-mp-fake-documents
मध्यप्रदेश में NEET परीक्षा में फर्जी दस्तावेजों के जरिए प्रवेश की साजिश का पर्दाफाश हुआ है। आरोपितों ने आधार कार्ड में छेड़छाड़ कर लोकसेवा केंद्रों से फर्जी प्रमाणपत्र बनवाए थे। पुलिस जांच जारी है...
BHOPAL. NEET परीक्षा में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर प्रवेश की साजिश मध्यप्रदेश में फैली हुई है। भोपाल पुलिस की जांच में पता चला कि गिरोह के आरोपितों ने आरक्षण का लाभ लेने के लिए आधार कार्ड में छेड़छाड़ की थी। वे आधार केंद्रों से अपने कार्ड पर मध्यप्रदेश के अलग-अलग जिलों का पता अपडेट करवाते थे। फिर वही आधार कार्ड लोकसेवा केंद्रों से फर्जी प्रमाणपत्र बनाने में इस्तेमाल किया गया था।
ये खबर भी पढ़िए...एमपी सरकार का बड़ा कदम, 10 से कम छात्र वाले स्कूल होंगे मर्ज और शिक्षकों का होगा ट्रांसफर
फर्जीवाड़े के गिरोह ने सिर्फ मूल निवासी प्रमाणपत्र नहीं, बल्कि अन्य दस्तावेज भी बनाए थे। इनमें ईडब्ल्यूएस, दिव्यांग और स्वतंत्रता सेनानी के प्रमाणपत्र शामिल थे। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, ये प्रमाणपत्र रीवा मेडिकल कॉलेज के कुछ कर्मचारियों की मदद से बिना सत्यापन के तैयार किए गए थे। भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज में बिहार के हिमांशु कुमार और मुंबई की क्रिस्टल डिकोस्टा के फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र यहीं से बनाए गए थे।
ये खबर भी पढ़िए...भोपाल-इंदौर आईटी पार्क की 13.57 एकड़ जमीन पर अतिक्रमण, जहां बनना था कॉल सेंटर, मिला नर्सिंग कॉलेज
ये खबर भी पढ़िए...MP News: भोपाल के साइंस हाउस ने चार साल में कर दी 12 करोड़ जांचें, 943 करोड़ का घोटाला उजागर
जांच के दौरान भोपाल की कोहेफिजा पुलिस ने दिल्ली के मुख्य आधार केंद्र से जानकारी मांगी थी। वहीं केंद्र के अधिकारियों ने जानकारी देने से मना कर दिया है। उनका कहना था कि वे सिर्फ हाईकोर्ट के आदेश पर ही जानकारी देंगे।
ये खबर भी पढ़िए...खुद के ही चार विधायक से घिरी सरकार, थाना प्रभारी की कार्यप्रणाली पर विधानसभा में उठाए सवाल
पुलिस जांच में गिरोह के तीन मुख्य आरोपितों के नाम सामने आए हैं। इसमें रीतेश यादव, संदीप कुमार और सुमित कुमार आदित्य का नाम शामिल है। सुमित कुमार रीवा मेडिकल कॉलेज का डॉक्टर है। पुलिस को शक है कि उसने फर्जी दस्तावेजों से कॉलेज में प्रवेश लिया था। इन आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई जारी है, लेकिन वे अभी तक फरार हैं। इस वजह से पूरे गिरोह का खुलासा नहीं हो पाया है।
समग्र आईडी की अनदेखी ने खड़े किए सवाल
स्थानीय प्रशासन की ओर से जारी किए जाने वाले मूल निवासी प्रमाणपत्र के लिए समग्र आईडी जरूरी है। वहीं, फर्जीवाड़ा गिरोह ने इस डॉक्यूमेंट को नजरअंदाज किया था। इसके बावजूद बिना समग्र आईडी के प्रमाणपत्र कैसे जारी हुए थे, यह सवाल पुलिस की जांच में सामने आया है। इसके कारण अन्य राज्यों से आए अयोग्य अभ्यर्थी लाखों रुपए देकर प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश पा गए हैं।
गिरोह ने ऐसे बनवाए फर्जी प्रमाणपत्र
ये खबर भी पढ़िए...भोपाल-इंदौर आईटी पार्क की 13.57 एकड़ जमीन पर अतिक्रमण, जहां बनना था कॉल सेंटर, मिला नर्सिंग कॉलेज
NEET परीक्षा में फर्जीवाड़ा की खबर पर एक नजर...
|
दिल्ली आधार केंद्र ने जानकारी देने से किया मना
ये खबर भी पढ़िए...खुद के ही चार विधायक से घिरी सरकार, थाना प्रभारी की कार्यप्रणाली पर विधानसभा में उठाए सवाल
मुख्य आरोपित अभी भी फरार
IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी
By VINAY VERMA
राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं
By Ashish Bhardwaj
पाटन चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, भूपेश बघेल की आपत्ति पर पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करेगा सुनवाई
By Arun Tiwari
भोपाल की सेज यूनिवर्सिटी में छात्रों का हंगामा: हॉस्टल मेस के खाने में कीड़े मिलने का आरोप, अब खाद्य विभाग करेगा जांच
By Jitendra Shrivastava
UPI एमडीआर पर सुप्रीम कोर्ट का रोक से इनकार: 15 अक्टूबर से दुकानदारों को देना होगा 0.4 फीसदी चार्ज
By Sanjay Dhiman
अस्पताल का लैब बोतलों में भ्रूण : कोरबा के लाइफ केयर हॉस्पिटल में कौन सा खेल? कोर्ट को भी नहीं मिला जवाब
By VINAY VERMA
RCA चुनाव में बड़ा उलटफेर, राजेंद्र राठौड़ के बेटे पराक्रम सिंह ने छोड़ा मैदान
By Ashish Bhardwaj