पौने छह करोड़ फूंके, फिर भी ऑफलाइन मध्य प्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग
Ravi Awasthi | Jan 10, 2026, 10:41 IST
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मध्य प्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग ने अपने कामकाज को डिजिटल बनाने के लिए करीब पौने छह करोड़ खर्च किए। इसके बावजूद, विभाग का कामकाज पुराने तरीके से ही चल रहा है। डिजिटल सिस्टम के दावे अब तक खाली साबित हुए हैं। सभी काम पारंपरिक तरीकों से ही हो रहे हैं।
News In Short
- मध्य प्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग ने तबादलों में पारदर्शिता के लिए पौने छह करोड़ खर्च किए।
- पोर्टल 3.0 का निर्माण डिजिटल प्रक्रिया के लिए किया गया था, लेकिन असफल रहा।
- केवल 39% शिक्षक ही ऑनलाइन पोर्टल का उपयोग कर पाए।
- तकनीकी खराबी से ई-अटेंडेंस प्रणाली भी प्रभावित हुई है।
- पोर्टल 3.0 की लागत पर आईटी विशेषज्ञ भी हैरान हैं, पर इसे MIS बताया गया।
News In Detail
करोड़ों की लागत से बना पोर्टल 3.0 बीते तबादला सत्र में फेल हो गया। हजारों शिक्षक ऑनलाइन आवेदन करने की उम्मीद में सिस्टम से जूझते रहे। विभाग डिजिटल इंडिया के नारे में उलझ कर रह गया।
अधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, पहले एनआईसी और फिर एमपी एसईडीसी से परेशान होकर स्कूल शिक्षा विभाग ने निक्सी से मदद ली। सितंबर 2024 में हुए अनुबंध के तहत पोर्टल 3.0 की लागत 5 करोड़ 70 लाख 80 हजार 250 रुपए तय हुई। यह भी तय हुआ कि पोर्टल बनाने के बाद निक्सी अगले पांच साल तक इसकी देखरेख और सुधार करेगी।
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कड़वे रहे विभागीय कर्मचारियों के अनुभव
विभागीय डिजिटल दावों का हाल यह कि नए पोर्टल 3.0 के लिए अनुबंध सितंबर 2024 में हुआ। वहीं, पूर्व के मप्र एजुकेशन पोर्टल 2.0 को अंतिम बार 11 अक्टूबर 2023 को अपडेट किया गया था।
39% शिक्षक ही कर पाए ऑनलाइन आवेदन
वहीं, 4503 अर्थात स्थानांतरित शिक्षकों के सिर्फ 39 प्रतिशत शिक्षक ही पोर्टल का उपयोग कर सके। बाकी पोर्टल की तकनीकी दिक्कतों का शिकार हुए। नतीजतन, अपने तबादलों के लिए उन्हें मजबूरन परंपरागत तरीका ही अपनाना पड़ा।
तय तिथि के बाद भी होते रहे तबादले
दरअसल, राज्य सरकार ने बीते साल 30 अप्रैल को तबादला नीति को मंजूरी दी। 31 मई तक ही तबादलने करना तय किया। बाद में इसमें दो बार 17 दिन का इजाफा भी किया गया।
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सॉफ्टवेयर की खराबी से ई-अटेंडेंस में भी दिक्कतें
करोड़ों की लागत पर विशेषज्ञ भी हैरान
कुछ संस्थाएं तकनीकी काम के साथ ही अपने तकनीशियंस, कर्मचारी, कार्यालय खर्च व देखरेख, मरम्मत की अवधि में होने वाले खर्च को जोड़कर भी लागत तय करती हैं।
उन्होंने कहा कि हो सकता है संबंधित विभाग ने कई और फीचर्स पोर्टल में एड कराए हों। फिर भी पौने 6 करोड़ की लागत हैरानी पैदा करने वाली है।
एमआईएस सिस्टम है पोर्टल 3.0: सहायक संचालक
इसमें विभागीय कर्मचारियों के ट्रांसफर के साथ, उनकी अटेंडेंस, विभागीय लेखा-जोखा व दीगर कामकाज भी किए जाने हैं। पोर्टल की तकनीकी खामियों को लेकर उन्होंने कहा कि निक्सी से इसके लिए 5 साल का अनुबंध है।
विभागीय अपर संचालक की अहम भूमिका
बताया जाता है कि इस मामले में विभाग की अपर संचालक डॉ कामना आचार्य की अहम भूमिका है। पोर्टल 3.0 को लेकर द सूत्र ने जब डॉ आचार्य से जानकारी हासिल करने का प्रयास किया तो उन्होंने सहायक संचालक से बात करने को कहा। इससे पहले उन्हें फोन कॉल किए, व्हाट्सएप संदेश भेजा, लेकिन इसका भी उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।
Sootr Knowledge
क्या है निक्सी संस्था
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