खेत से निकलने लगी सोयाबीन, पर भावांतर पंजीयन कब होगा शुरू? मध्य प्रदेश के किसान परेशान
Ramanand Tiwari | Sept 30, 2026, 10:27 IST
एपमी में सोयाबीन किसान भावांतर पंजीयन शुरू होने को लेकर चिंता में हैं।
मध्य प्रदेश में सोयाबीन की कटाई शुरू हो चुकी है। लेकिन भावांतर पंजीयन कब शुरू होगा, यह सरकार ने साफ नहीं किया। धान ज्वार बाजरा पंजीयन 15 सितंबर से चल रहा है। पिछले साल सोयाबीन भावांतर योजना में 9.36 लाख किसानों ने पंजीयन कराया था। इस बार सोयाबीन MSP 2026-27 के लिए 5,708 रुपए प्रति क्विंटल है। किसानों को मंडी जाने से पहले पंजीयन की तारीख चाहिए।
मध्य प्रदेश में सोयाबीन की कटाई शुरू हो चुकी है। लेकिन भावांतर पंजीयन कब से शुरू होगा इसे लेकर किसानों के बीच चिंता बनी हुई है। धान ज्वार बाजरा पंजीयन 15 सितंबर से चल रहा है। फिर सोयाबीन की बारी कब आएगी? किसान यही सवाल पूछ रहे हैं।
एमपी में सोयाबीन की कटाई शुरू हो गई है और खेतों से निकलने लगी है। किसान भावांतर (कीमत गिरने पर सुरक्षा देने वाली व्यवस्था) को कवच मानते हैं। ऐसे में सोयाबीन का भावांतर पंजीयन कब से शुरू होगा इसे लेकर किसान परेशान हैं। पिछले साल यानी वर्ष 2025 में सोयाबीन का पंजीयन अक्टूबर में शुरू हुआ था।
बता दें कि धान, ज्वार और बाजरा का रजिस्ट्रेशन 15 सितंबर से शुरू है।
किसी भी खेती की योजना का फायदा सिर्फ घोषणा से नहीं मिलता। असली बात तब सामने आती है, जब किसान को जरूरत के समय इसका लाभ और जरूरी व्यवस्था मिल पाए।
25 सितंबर तक सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक, सोयाबीन की बिक्री के लिए पंजीयन शुरू नहीं हुआ था। ऐसे में एमपी के सोयाबीन किसान अपनी फसल को लेकर चिंता में हैं।
दूसरी ओर धान, ज्वार और बाजरा के लिए पंजीयन प्रक्रिया पहले से चल रही है। इसके लिए पूरे राज्य में 1,100 से ज्यादा केंद्र बनाए गए हैं, जहां किसान आवेदन कर सकते हैं। लेकिन सोयाबीन किसानों को अभी भी अपनी बारी का इंतजार करना पड़ रहा है।
सवाल यही है कि जब सोयाबीन की कटाई शुरू हो चुकी है, तो इसकी मूल्य सुरक्षा यानी भावांतर पंजीयन की प्रक्रिया (Bhavantar Yojana Registration) अब तक शुरू क्यों नहीं हुई? आखिर किसानों को कब तक तारीख का इंतजार करना पड़ेगा?
वर्ष 2025 में सोयाबीन भावांतर योजना का पंजीयन 3 से 17 अक्टूबर तक तय हुआ था। यानी पिछले साल पूरी प्रक्रिया अक्टूबर में ही तय हो गई थी।
इसके बाद पात्र किसानों के लिए मंडी में बिक्री की अवधि रखी गई थी। यह अवधि 24 अक्टूबर से 15 जनवरी 2026 तक थी। बिक्री की अवधि पंजीयन बंद होने के सात दिन बाद शुरू हुई थी।
यानी सिर्फ तारीख घोषित करना काफी नहीं है। किसान को पंजीयन, पात्रता, बिक्री और भुगतान की पूरी प्रक्रिया तय समय से पहले साफ हो जानी चाहिए। ताकी किसान परेशान न हों और जल्दबाजी न करे।
सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक, पिछले साल करीब 9.36 लाख किसानों ने इस योजना का लाभ लेने के लिए पंजीयन कराया था। इनमें 6.44 लाख किसानों को फरवरी 2026 तक भावांतर भुगतान मिला था।
2025-26 में इस योजना के तहत 1,292 करोड रुपए की राशि खर्च किए गए थे। यह राशि डीबीटी (DBT - Direct Benefit Transfer) से दी गई। यानी पैसा सीधे किसानों के खाते में पहुंचे थे।
अगर हम इसका औसत मूल्य निकालें तो हर किसान को करीब 20 हजार रुपए मिले। लाखों किसानों की व्यवस्था में समय पर जानकारी जरूरी है।
पीले सोयाबीन का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP - Minimum Support Price) इस साल बढ़ाया गया है। 2026-27 के लिए सोयाबीन का MSP 5,708 रुपए प्रति क्विंटल तय हुआ है। पिछले साल यह 5,328 रुपए था। यानी किसानों को इस बार 380 रुपए प्रति क्विंटल ज्यादा MSP मिलेगा।
हालांकि सिर्फ MSP बढ़ने से ही किसान को पूरी राहत नहीं मिलती। असली फायदा तब मिलता है, जब किसान को सही समय पर सरकारी व्यवस्था का लाभ मिल सके। भावांतर जैसी योजना में समय पर पंजीयन और नियमों की साफ जानकारी होना बेहद जरूरी है।
फसल कटने के बाद किसान (Farmer) पैसों के लिए ज्यादा दिन तक इंतजार नहीं कर सकता। उसे अगली फसल के लिए खाद-बीज खरीदना होता है। इसके अलावा मजदूरी, कर्ज और घर के खर्च भी पूरे करने होते हैं।
ऐसे में अगर पंजीयन में देरी होती है, तो शुरुआत में फसल बेचने वाले किसानों के सामने परेशानी आ सकती है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि सोयाबीन (Soybean) मंडी पहुंचने से पहले सरकार की व्यवस्था तैयार होगी या नहीं? यही किसानों की सबसे बड़ी चिंता है।
सोयाबीन बेचने का फैसला सिर्फ मंडी भाव देखकर नहीं होता है। किसान को अपनी नकदी की जरूरत और सरकारी प्रक्रिया तीनों बातों का ध्यान रखना पड़ता है।
अगर सरकारी व्यवस्था में देरी या अनिश्चितता रहती है, तो किसान के पास अपनी फसल बेचने के विकल्प कम हो सकते हैं।
अब सबसे अहम बात यही है कि किसान को सही समय पर पूरी जानकारी और सुविधा मिलती है या नहीं।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि सोयाबीन के नए सीजन का पंजीयन कब शुरू होगा और इसके नियम क्या रहेंगे?
पिछले साल 9.36 लाख किसान भावांतर योजना (mp bhavantar yojana) से जुड़े थे। इस बार सोयाबीन का MSP भी बढ़कर 5,708 रुपए प्रति क्विंटल हो गया है। ऐसे में किसानों को सबसे ज्यादा जरूरत साफ जानकारी की है। पंजीयन कब होगा, फसल कब बेचनी होगी और भुगतान कब मिलेगा, यह सब पहले से पता होना चाहिए।
फिलहाल सबसे बड़ी परेशानी प्रक्रिया के समय और जानकारी की कमी को लेकर है। पिछली बार लाखों किसान इस योजना से जुड़े थे, इसलिए थोड़ी सी देरी या अस्पष्टता का असर बड़ी संख्या में किसानों पर पड़ सकता है।
हालांकि मध्य प्रदेश सरकार ने अभी तक 2026 के लिए भावांतर पंजीयन का आधिकारिक आदेश जारी नहीं किया है। इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि किसान योजना के लाभ से बाहर हो गए हैं।
लेकिन इतना जरूर है कि खेत में फसल तैयार हो चुकी है और किसान सरकारी प्रक्रिया का इंतजार नहीं कर सकता।
समझें क्या है पूरा मामला
बता दें कि धान, ज्वार और बाजरा का रजिस्ट्रेशन 15 सितंबर से शुरू है।
क्यों उठ रहा पंजीयन का सवाल?
25 सितंबर तक सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक, सोयाबीन की बिक्री के लिए पंजीयन शुरू नहीं हुआ था। ऐसे में एमपी के सोयाबीन किसान अपनी फसल को लेकर चिंता में हैं।
धान ज्वार बाजरा का पंजीयन कब तक?
सवाल यही है कि जब सोयाबीन की कटाई शुरू हो चुकी है, तो इसकी मूल्य सुरक्षा यानी भावांतर पंजीयन की प्रक्रिया (Bhavantar Yojana Registration) अब तक शुरू क्यों नहीं हुई? आखिर किसानों को कब तक तारीख का इंतजार करना पड़ेगा?
पिछले साल कब शुरू हुआ था पंजीयन?
इसके बाद पात्र किसानों के लिए मंडी में बिक्री की अवधि रखी गई थी। यह अवधि 24 अक्टूबर से 15 जनवरी 2026 तक थी। बिक्री की अवधि पंजीयन बंद होने के सात दिन बाद शुरू हुई थी।
यानी सिर्फ तारीख घोषित करना काफी नहीं है। किसान को पंजीयन, पात्रता, बिक्री और भुगतान की पूरी प्रक्रिया तय समय से पहले साफ हो जानी चाहिए। ताकी किसान परेशान न हों और जल्दबाजी न करे।
2025-26 में 9.36 लाख किसानों को हुआ योजना का लाभ
2025-26 में इस योजना के तहत 1,292 करोड रुपए की राशि खर्च किए गए थे। यह राशि डीबीटी (DBT - Direct Benefit Transfer) से दी गई। यानी पैसा सीधे किसानों के खाते में पहुंचे थे।
अगर हम इसका औसत मूल्य निकालें तो हर किसान को करीब 20 हजार रुपए मिले। लाखों किसानों की व्यवस्था में समय पर जानकारी जरूरी है।
MSP में 380 रुपए का इजाफा
हालांकि सिर्फ MSP बढ़ने से ही किसान को पूरी राहत नहीं मिलती। असली फायदा तब मिलता है, जब किसान को सही समय पर सरकारी व्यवस्था का लाभ मिल सके। भावांतर जैसी योजना में समय पर पंजीयन और नियमों की साफ जानकारी होना बेहद जरूरी है।
नकदी की जरूरत, किसान की मजबूरी
ऐसे में अगर पंजीयन में देरी होती है, तो शुरुआत में फसल बेचने वाले किसानों के सामने परेशानी आ सकती है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि सोयाबीन (Soybean) मंडी पहुंचने से पहले सरकार की व्यवस्था तैयार होगी या नहीं? यही किसानों की सबसे बड़ी चिंता है।
सोयाबीन भाव और किसान का फैसला
अगर सरकारी व्यवस्था में देरी या अनिश्चितता रहती है, तो किसान के पास अपनी फसल बेचने के विकल्प कम हो सकते हैं।
अब सबसे अहम बात यही है कि किसान को सही समय पर पूरी जानकारी और सुविधा मिलती है या नहीं।
अब किसान क्या चाहते हैं?
पिछले साल 9.36 लाख किसान भावांतर योजना (mp bhavantar yojana) से जुड़े थे। इस बार सोयाबीन का MSP भी बढ़कर 5,708 रुपए प्रति क्विंटल हो गया है। ऐसे में किसानों को सबसे ज्यादा जरूरत साफ जानकारी की है। पंजीयन कब होगा, फसल कब बेचनी होगी और भुगतान कब मिलेगा, यह सब पहले से पता होना चाहिए।
फिलहाल सबसे बड़ी परेशानी प्रक्रिया के समय और जानकारी की कमी को लेकर है। पिछली बार लाखों किसान इस योजना से जुड़े थे, इसलिए थोड़ी सी देरी या अस्पष्टता का असर बड़ी संख्या में किसानों पर पड़ सकता है।
हालांकि मध्य प्रदेश सरकार ने अभी तक 2026 के लिए भावांतर पंजीयन का आधिकारिक आदेश जारी नहीं किया है। इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि किसान योजना के लाभ से बाहर हो गए हैं।
लेकिन इतना जरूर है कि खेत में फसल तैयार हो चुकी है और किसान सरकारी प्रक्रिया का इंतजार नहीं कर सकता।
- मध्य प्रदेश में सोयाबीन के भावांतर पंजीयन की तारीख कब तक घोषित होगी?
सोयाबीन के भावांतर पंजीयन की तारीख अब तक स्पष्ट नहीं है, जबकि धान, ज्वार और बाजरा का पंजीयन 15 सितंबर से चल रहा है। पिछले साल सोयाबीन का पंजीयन अक्टूबर में शुरू हुआ था। - पिछले साल सोयाबीन के भावांतर पंजीयन की प्रक्रिया कब शुरू हुई थी?
पिछले साल सोयाबीन के भावांतर पंजीयन की प्रक्रिया 3 से 17 अक्टूबर के बीच शुरू हुई थी। - किसान सोयाबीन की बिक्री और पंजीयन में देरी को लेकर चिंतित क्यों हैं?
किसान सोयाबीन की कटाई के बाद नकदी की जरूरत और अगली फसल की तैयारी के लिए पंजीयन की देरी को लेकर चिंतित हैं। साथ ही, स्पष्ट समय-सारणी और प्रक्रिया की जानकारी का अभाव उनकी सौदेबाजी की स्थिति को कमजोर कर सकता है।
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