MPPSC राज्य सेवा परीक्षा मेंस 2025 में हताशा, सुनवाई की तारीख 15 मई की
Sanjay Gupta | Apr 22, 2026, 19:12 IST
Photograph: (THESOOTR)
INDORE. mppsc मेंस 2025 का इंतजार कर रहे उम्मीदवारों के लिए घोर हताशा वाली बात है। सिस्टम का मजाक कहिए कि अंतिम बार इस केस की सुनवाई 21 जुलाई को हुई थी और अब नई तारीख 7 जुलाई के बाद संशोधित कर 15 मई दिखाई जा रही है। यानी मेंस पर असमंजस जारी है।
मप्र लोक सेवा आयोग की राज्य सेवा परीक्षा मेंस 2025 का इंतजार कर रहे करीब चार हजार उम्मीदवार हताश है। उनके साथ सिस्टम का मजाक चल रहा है।
यह मेंस 9 से 14 जून 2025 में होना थी, लेकिन हाईकोर्ट में परीक्षा नियम 2015 को लेकर चली याचिका के चलते दो अप्रैल 2025 पर हाईकोर्ट जबलपुर ने बिना मंजूरी इसे कराने पर रोक लगा दी थी।
इसके बाद 21 जुलाई 2025 को तब राहत मिली थी जब आयोग से हाईकोर्ट ने कहा था कि पीएससी परीक्षा का शेड्यूल दें, हम मंजूरी देंगे और 5 अगस्त 2025 को तारीख लगाई, लेकिन तभी से इसमें सुनवाई नहीं हुई है।
दामिनी फिल्म का यह डायलाग इस मेंस के उम्मीदवारों पर पूरा खरा उतर रहा है। हाईकोर्ट के आदेश पर 5 अगस्त को केस लिस्ट होना था लेकिन सुनवाई नहीं हुई।
फिर तारीख दी गई 23 सितंबर लेकिन सुनवाई पर केस नहीं आया। इसके बाद 9 अक्टूबर और फिर 27 फरवरी को तारीख दी गई लेकिन केस सुनवाई पर नहीं आया। बीच में कम्प्यूटर जनरेट कई तारीखें आई लेकिन केस लिस्टिंग पर नहीं लगा।
लंबे इंतजार के बाद कम्प्यूटर जनरेट से 6 अप्रैल तारीख बताई गई लेकिन केस लिस्ट नहीं हुआ। अब इसमें सिस्टम पर पहले नई तारीख 7 जुलाई 2026 बताई गई थी, फिर इसको भी संशोधित कर 15 मई अपलोड की गई है।
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इस केस में आयोग लगातार प्रयास कर रहा है और उनके अधिवक्ता दो बार सुनवाई के बीच में हाईकोर्ट बेंच से निवेदन कर चुके हैं कि दो मिनट सुन लिया जाए। दरअसल हाईकोर्ट को केवल मेंस शेड्यूल को ओके करना है।
आयोग चाहता है कि मेंस और इंटरव्यू जैसी प्रक्रिया जारी रहे और उधर हाईकोर्ट सुनवाई जारी रखे। इससे उम्मीदवार परेशान नहीं होंगे। लेकिन हाईकोर्ट ने विविध कारणों से सुनवाई से इंकार कर दिया।
समस्या यह है कि दो अप्रैल 2025 के आदेश के तहत यह परीक्षा नहीं हो सकती है। खुद हाईकोर्ट ने 21 जुलाई 2025 के आदेश में कहा था कि मेंस पर कोई रोक नहीं है जब आपने प्री के रिजल्ट की डिटेल पुटअप कर दी है तो फिर कोई समस्या नहीं। लेकिन फिर अधिवक्ता ने कहा कि दो अप्रैल के आदेश से रोक है।
इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि ठीक है आप दो सप्ताह बाद 5 अगस्त को अगली सुनवाई में मेंस शेड्यूल दीजिए। लेकिन बस वही इसमें अंतिम सुनवाई थी और 21 जुलाई के बाद से ही केस लिस्ट नहीं हुआ है।
इस केस में दो याचिकाएं लगी है WP 9253 और 11444/2025. इसमें परीक्षा नियम 2015 को चुनौती दी गई है। इस नियम के तहत है कि जिन्होंने किसी भी स्तर पर आरक्षण संबंधी राहत ली है चाहे उम्र हो, कटआफ हो उन्हें अधिक नंबर आने पर भी अनारक्षित कैटेगरी में शिफ्ट नहीं कर सकते हैं और वह अपनी आरक्षण कैटेगरी में ही रहेगा।
इस नियम को कई बार सुप्रीम कोर्ट और विविध राज्यों में चुनौती दी गई लेकिन केंद्र में भी यही नियम है और इसे मान्य किया गया है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यदि मेरिट से नंबर आए तो उन्हें अनारक्षित कैटेगरी में शिफ्ट किया जाए।
सालों से इसी नियम के आधार पर भर्तियां हो रही है और केंद्र से भी यही नियम है और यूपीएससी में भी लागू होता है। राज्य सेवा परीक्षा 2026 का नोटिफिकेशन भी इसी नियम के तहत निकला हुआ है। लेकिन बाकी सभी भर्तियां जारी है। केवल मेंस 2025 पर ही ग्रहण लगा है।
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यह मेंस 9 से 14 जून 2025 में होना थी, लेकिन हाईकोर्ट में परीक्षा नियम 2015 को लेकर चली याचिका के चलते दो अप्रैल 2025 पर हाईकोर्ट जबलपुर ने बिना मंजूरी इसे कराने पर रोक लगा दी थी।
इसके बाद 21 जुलाई 2025 को तब राहत मिली थी जब आयोग से हाईकोर्ट ने कहा था कि पीएससी परीक्षा का शेड्यूल दें, हम मंजूरी देंगे और 5 अगस्त 2025 को तारीख लगाई, लेकिन तभी से इसमें सुनवाई नहीं हुई है।
तारीख पर तारीख, तारीख पर तारीख
फिर तारीख दी गई 23 सितंबर लेकिन सुनवाई पर केस नहीं आया। इसके बाद 9 अक्टूबर और फिर 27 फरवरी को तारीख दी गई लेकिन केस सुनवाई पर नहीं आया। बीच में कम्प्यूटर जनरेट कई तारीखें आई लेकिन केस लिस्टिंग पर नहीं लगा।
लंबे इंतजार के बाद कम्प्यूटर जनरेट से 6 अप्रैल तारीख बताई गई लेकिन केस लिस्ट नहीं हुआ। अब इसमें सिस्टम पर पहले नई तारीख 7 जुलाई 2026 बताई गई थी, फिर इसको भी संशोधित कर 15 मई अपलोड की गई है।
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कई बार दलील लेकिन सुनवाई नहीं
आयोग चाहता है कि मेंस और इंटरव्यू जैसी प्रक्रिया जारी रहे और उधर हाईकोर्ट सुनवाई जारी रखे। इससे उम्मीदवार परेशान नहीं होंगे। लेकिन हाईकोर्ट ने विविध कारणों से सुनवाई से इंकार कर दिया।
समस्या यह है कि बिना हाईकोर्ट मंजूरी मेंस नहीं होगी
इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि ठीक है आप दो सप्ताह बाद 5 अगस्त को अगली सुनवाई में मेंस शेड्यूल दीजिए। लेकिन बस वही इसमें अंतिम सुनवाई थी और 21 जुलाई के बाद से ही केस लिस्ट नहीं हुआ है।
क्या है मामला
इस नियम को कई बार सुप्रीम कोर्ट और विविध राज्यों में चुनौती दी गई लेकिन केंद्र में भी यही नियम है और इसे मान्य किया गया है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यदि मेरिट से नंबर आए तो उन्हें अनारक्षित कैटेगरी में शिफ्ट किया जाए।
सालों से इसी नियम से भर्ती, 2026 में भी यही नियम
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