17 साल की देरी, दोगुनी लागत और अधूरी तैयारियां: आखिर कब मिलेगा नर्मदा का पानी?
Ramanand Tiwari | Jun 20, 2026, 08:50 IST
Photograph: (THESOOTR)
BHOPAL. कटनी की नर्मदा वाटर टनल परियोजना 17 साल बाद भी अधूरी है। लागत दोगुनी हो गई और तकनीकी दिक्कतों से काम बार-बार रुका रहा। अब प्रशासन जल्द पूरा होने का दावा कर रहा है।
समझें क्या है पूरा मामला...
- नर्मदा टनल परियोजना 17 साल से अधूरी पड़ी है।
- लागत 799 करोड़ से बढ़कर 1600 करोड़ पहुंची।
- निर्माण में 300 से अधिक सिंकहोल बने।
- अमेरिकी मशीन भी खुदाई में सफल नहीं हो सकी।
- जनता अभी भी नर्मदा जल का इंतजार कर रही।
इसमें बड़ा सवाल यह है कि जिस परियोजना की शुरुआत 2008 में हुई थी, वह 17 साल बाद भी पूरी तरह तैयार क्यों नहीं हो पाई?
लाखों लोगों को पानी और किसानों को सिंचाई देने के नाम पर शुरू हुई इस महत्वाकांक्षी योजना की समय-सीमा कई बार पीछे खिसकी। लागत दोगुनी हो गई, निर्माण कार्य बार-बार बाधित हुआ और आज भी टनल के साथ नहरों की मरम्मत का काम बाकी है। ऐसे में जनता के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर जवाबदेही किसकी है?
narmada water tunnel project (3)
2008 में शुरू हुई थी बरगी डायवर्जन परियोजना...
- 17 साल बाद भी परियोजना पूरी तरह तैयार नहीं।
- 11.95 किलोमीटर लंबी देश की सबसे बड़ी वाटर टनल बनाई जा रही है।
- शुरुआती अनुमानित लागत 799 करोड़ रुपए थी।
- लागत बढ़कर करीब 1600 करोड़ रुपए तक पहुंच गई।
- निर्माण के दौरान 300 से अधिक बार सिंकहोल बने।
- अमेरिकी टनल बोरिंग मशीन भी कामयाब नहीं हो सकी।
- कई मजदूरों की मौत और परिवारों का विस्थापन हुआ।
- नहर के कई हिस्से क्षतिग्रस्त हो चुके हैं, मरम्मत अभी बाकी है।
- प्रशासन अब भी जल्द काम पूरा होने का दावा कर रहा है।
2008 में शुरू हुआ प्रोजेक्ट, 2026 में भी इंतजार जारी
परियोजना को क्षेत्र की तस्वीर बदलने वाला बताया गया था, लेकिन हकीकत यह है कि 17 साल बाद भी काम पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। हर कुछ वर्षों में परियोजना को जल्द पूरा होने का दावा किया गया, लेकिन जमीन पर तस्वीर अलग दिखाई देती रही।
narmada water tunnel project
समय-सीमा निकलती गई, बढ़ता गया इंतजार
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि यह योजना क्षेत्र के लिए इतनी महत्वपूर्ण थी तो फिर वर्षों तक इसकी निगरानी और क्रियान्वयन में अपेक्षित गंभीरता क्यों नहीं दिखाई गई? आखिर लाखों लोगों को पानी देने वाली योजना लगातार देरी का शिकार कैसे होती रही?
अमेरिकी मशीन फेल, निर्माण में आते रहे नए संकट
वर्ष 2011 में लाई गई अमेरिकी रोबिन्स टनल बोरिंग मशीन भी इस चुनौती के सामने टिक नहीं सकी और तकनीकी रूप से विफल हो गई। हालत यह रही कि शुरुआती 1.6 किलोमीटर खुदाई पूरी करने में ही करीब साढ़े छह साल लग गए। इसके बाद नई तकनीक और दूसरी मशीनों की मदद से काम आगे बढ़ाया गया, लेकिन तब तक परियोजना वर्षों पीछे जा चुकी थी।
300 से ज्यादा सिंकहोल, बार-बार रुका काम
मिट्टी धंसने की घटनाओं ने कई बार निर्माण कार्य रोक दिया। इन समस्याओं ने न सिर्फ परियोजना की रफ्तार धीमी की बल्कि लागत और समय दोनों को बढ़ा दिया।
मजदूरों की मौत और विस्थापन भी बना बड़ा मुद्दा
799 करोड़ से 1600 करोड़ तक पहुंची लागत
narmada water tunnel project (2)
टनल लगभग पूरी, लेकिन नहरें अभी भी परेशानी
हालांकि, दूसरी तरफ पहले से बनी नहरों के कई हिस्से क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। उनकी मरम्मत के लिए अभी टेंडर प्रक्रिया चल रही है। यानी टनल पूरी होने के बाद भी पूरी परियोजना के संचालन में समय लग सकता है।
जनता का सवाल: आखिर जवाबदेह कौन?
जिन किसानों को वर्षों पहले सिंचाई मिल जानी चाहिए थी और जिन परिवारों को समय पर पेयजल सुविधा का लाभ मिलना चाहिए था, उनके लिए यह सवाल आज भी कायम है कि आखिर इतनी लंबी देरी की जिम्मेदारी कौन तय करेगा?
परियोजना पूरी होने पर कटनी, मैहर, सतना, पन्ना और रीवा के लोगों को लाभ मिलने की बात कही जा रही है। लेकिन जनता के लिए सबसे बड़ा मुद्दा यह है कि जिस पानी का इंतजार वर्षों पहले खत्म हो जाना चाहिए था, वह अब जाकर क्यों पहुंच रहा है?
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