एमपी में 3 साल का नर्सिंग डिप्लोमा 4 साल में भी पूरा नहीं हो रहा, हजारों छात्रों का भविष्य दांव पर

thesootr Desk | Apr 08, 2026, 16:49 IST
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madhya pradesh nursing diploma
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मध्य प्रदेश में नर्सिंग डिप्लोमा कोर्स तीन साल का है, लेकिन चार साल में भी पूरा नहीं हो पाया। हजारों छात्र रजिस्ट्रेशन के लिए भटक रहे हैं। नर्सिंग काउंसिल की लापरवाही और मान्यता प्रक्रिया की गड़बड़ी के कारण 2022-23 बैच के परिणाम अभी तक घोषित नहीं हुए।

5 प्वाइंट में समझें क्या है पूरा मामला

  • मध्य प्रदेश में तीन साल का नर्सिंग डिप्लोमा कोर्स चार साल में भी पूरा नहीं हुआ।
  • 2022-23 बैच के प्रथम वर्ष का परिणाम अभी तक घोषित नहीं किया गया है।
  • नर्सिंग काउंसिल पर लापरवाही और मान्यता प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोप लगे हैं।
  • प्रदेश में करीब 6 से 7 हजार छात्र रजिस्ट्रेशन के लिए भटक रहे हैं।
  • छात्र संगठनों ने नर्सिंग रजिस्ट्रार और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई मांगी।

नर्सिंग छात्रों का भविष्य संकट में

मध्य प्रदेश के नर्सिंग छात्रों के लिए हालात बेहद मुश्किल हो गए हैं। तीन साल का डिप्लोमा कोर्स चार-चार साल में भी पूरा नहीं हो पाया है। हजारों छात्र रजिस्ट्रेशन के लिए एक दफ्तर से दूसरे दफ्तर भटक रहे हैं।

छात्र संगठनों ने इसके लिए नर्सिंग काउंसिल (Nursing Council) की लापरवाही और मान्यता प्रक्रिया की गड़बड़ी को जिम्मेदार ठहराया है। उनका कहना है कि यह लापरवाही सीधे हजारों युवाओं के करियर पर भारी पड़ रही है।

2022-23 बैच का रिजल्ट अभी तक नहीं

सबसे बड़ी परेशानी यह है कि 2022-23 सत्र के प्रथम वर्ष का परिणाम अब तक घोषित नहीं हुआ है। इस बैच के छात्रों को कोर्स पूरा करने में 5 से 7 साल तक लग सकते हैं। एक तरफ नौकरी रुकी है, दूसरी तरफ आगे की पढ़ाई भी अटकी पड़ी है।

प्रदेश में करीब 6 से 7 हजार छात्र ऐसे हैं, जिनका रजिस्ट्रेशन बिना किसी ठोस वजह के अटका हुआ है। बिना रजिस्ट्रेशन के न नौकरी मिल रही है और न आगे की पढ़ाई संभव हो पा रही है।

बिना परमिट कॉलेज चला रहे हैं

मामला यहीं नहीं रुकता। आरोप है कि कई नर्सिंग कॉलेज बिना वैध मान्यता और पर्याप्त स्टाफ के संचालित हो रहे हैं। इसके बावजूद फीस बाकायदा ली जा रही है। छात्र फीस भी भर रहे हैं और परेशानी भी झेल रहे हैं।

बाहरी राज्यों के रजिस्ट्रेशन को भी स्थानीय इस्तेमाल किया जा रहा है। यह पूरा मामला व्यवस्था की बड़ी खामी की तरफ इशारा करता है।

Cabinet approves setting up 157 government nursing colleges
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काउंसिल और कॉलेज पर लापरवाही के आरोप

छात्र संगठनों ने बार-बार ज्ञापन देने के बाद भी कॉलेजों की तरफ से कोई कार्रवाई नहीं होने की शिकायत की है। एनएसयूआई (National Students Union of India) छात्र संगठन के नेतृत्व में छात्रों ने नर्सिंग रजिस्ट्रार और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन (MP नर्सिंग घोटाला) सौंपा है। उन्होंने दोषियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग की है।

छात्रों का गुस्सा इस बात पर भी है कि एक तरफ उनसे फीस ली जा रही है और दूसरी तरफ उनके भविष्य से खिलवाड़ हो रहा है।

नौकरी और पढ़ाई दोनों पर असर

नर्सिंग कोर्स की देरी का असर सिर्फ रजिस्ट्रेशन तक सीमित नहीं है। सरकारी और निजी अस्पतालों में नर्सिंग की भर्ती के लिए वैध रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है। बिना इसके छात्र न सरकारी नौकरी के लिए आवेदन कर सकते हैं और न निजी अस्पतालों में काम पा सकते हैं।

जो छात्र आगे बीएससी नर्सिंग (BSc Nursing) करना चाहते हैं, उनके लिए भी रास्ता बंद हो गया है। डिप्लोमा का रिजल्ट और रजिस्ट्रेशन न होने से उनकी उच्च शिक्षा भी रुकी हुई है।

मांग क्या है और अब क्या होगा?

छात्रों की मांग साफ है। पहली मांग यह है कि 2022-23 बैच का रिजल्ट तुरंत घोषित किया जाए। दूसरी मांग है कि बिना मान्यता के चल रहे नर्सिंग कॉलेजों पर कार्रवाई हो। तीसरी मांग है कि नर्सिंग काउंसिल की लापरवाही के जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कदम उठाए जाएं।

अब सारी निगाहें इस बात पर हैं कि नर्सिंग रजिस्ट्रार और राज्य सरकार इस मामले में क्या कदम उठाती है। हजारों छात्रों का करियर इस फैसले पर टिका हुआ है।

Our nurses, our future - The HinduBusinessLine
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यह खबर क्यों जरूरी है?

यह खबर युवाओं के भविष्य, सार्वजनिक स्वास्थ्य तंत्र और शिक्षा व्यवस्था की जवाबदेही तीनों से जुड़ी है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21A के तहत शिक्षा का अधिकार और अनुच्छेद 21 के तहत गरिमापूर्ण जीवन का अधिकार प्रत्येक नागरिक को मिला हुआ है। जब सरकारी (मध्यप्रदेश शिक्षा विभाग)लापरवाही की वजह से हजारों छात्रों का करियर रुक जाए तो यह उनके मौलिक अधिकारों का हनन है।

देश में स्वास्थ्य सेवाओं के लिए प्रशिक्षित नर्सों की पहले से कमी है। ऐसे में योग्य नर्सिंग स्नातकों का रजिस्ट्रेशन अटकाना पूरे स्वास्थ्य तंत्र को कमजोर करता है। सामाजिक और डिजिटल नैतिकता के नजरिए से यह जरूरी है कि इस तरह की व्यवस्थागत खामियों को सार्वजनिक किया जाए ताकि जवाबदेही तय हो सके।

FAQ

  1. मध्य प्रदेश में नर्सिंग डिप्लोमा कोर्स में देरी क्यों हो रही है?
    नर्सिंग काउंसिल की लापरवाही और मान्यता प्रक्रिया में गड़बड़ी इसकी मुख्य वजह है। कई नर्सिंग कॉलेज बिना वैध मान्यता और पर्याप्त स्टाफ के चल रहे हैं। बाहरी राज्यों के रजिस्ट्रेशन का दुरुपयोग भी सामने आया है। इन कारणों से 2022-23 बैच के प्रथम वर्ष का परिणाम चार साल बाद भी घोषित नहीं हो पाया है।
  2. रजिस्ट्रेशन न होने से छात्रों को क्या नुकसान हो रहा है?
    नर्सिंग कोर्स की देरी का असर छात्रों के करियर पर पड़ रहा है। सरकारी और निजी अस्पतालों में नर्सिंग की भर्ती के लिए वैध रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होती है। बिना इसके छात्र सरकारी एवं निजी संस्थानों में काम नहीं कर सकतें। वहीं जो छात्र आगे बीएससी नर्सिंग(BSc Nursing) करना चाहते हैं, उनके लिए भी रास्ता बंद हो गया है।
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