OBC आरक्षण का मामला : 21 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में होगी फाइनल हियरिंग
Neel Tiwari | Jan 20, 2026, 13:25 IST
obc reservation case supreme court hearing 2026
मध्य प्रदेश में OBC के 27 प्रतिशत आरक्षण का विवाद लंबे समय से चल रहा है। अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट में अंतिम सुनवाई के लिए लिस्ट किया गया है। 21 जनवरी को इस मामले की सुनवाई होगी। इस बीच, सरकार की भूमिका पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
News In Short
- सुप्रीम कोर्ट में 21 जनवरी 2026 को OBC 27 प्रतिशत आरक्षण से जुड़े सभी मामले लिस्ट हैं।
- इस मामले में जस्टिस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक आराधे की खंडपीठ सुनवाई करेगी।
- कानून पर स्टे नहीं, फिर भी सरकार ने आरक्षण लागू नहीं किया है।
- सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट को संवैधानिकता तय करने का अधिकार है।
- हजारों अभ्यर्थियों के पद अब भी होल्ड पर है।
News In Detail
सरकार पर बार-बार समय लेने के आरोप
2019 में पारित कानून, आज तक लागू नहीं
हाईकोर्ट के आदेशों का हवाला और भ्रम की स्थिति
113 प्रतिशत रिजल्ट और 87 प्रतिशत नियुक्तियां
महाधिवक्ता के अभिमत के आधार पर 113 प्रतिशत परिणाम जारी किया गया था। इसके बाद, 13 प्रतिशत OBC और 13 प्रतिशत सामान्य वर्ग के पद होल्ड कर दिए गए हैं। इस कारण, हजारों अभ्यर्थियों का भविष्य अब अधर में लटक गया है।
अभ्यर्थियों के अंक और परिणाम भी सार्वजनिक नहीं
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी: हाईकोर्ट को अधिकार
सरकार की सहमति न बनने से अटका मामला
ओबीसी पक्ष का दावा कोई कानूनी बाधा नहीं
जानें OBC आरक्षण का इतिहास
मंडल आयोग की रिपोर्ट (1980)
आयोग ने 52% भारतीयों को OBC श्रेणी में रखा और सिफारिश की कि उन्हें सरकारी नौकरियों में 27% आरक्षण दिया जाए। 1980 में मंडल आयोग की रिपोर्ट के बाद, 1990 में तत्कालीन प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह ने इस रिपोर्ट को लागू करने का निर्णय लिया।
इसके बाद, ओबीसी के लिए 27% आरक्षण सरकारी नौकरियों और शैक्षिक संस्थानों में लागू किया गया। यह कदम भारतीय राजनीति और समाज में काफी विवादास्पद था, लेकिन इसे लंबे समय तक बहस और विरोध का सामना करने के बावजूद लागू किया गया।
21वीं सदी में ओबीसी आरक्षण
हालांकि, 50% से अधिक आरक्षण के खिलाफ कोर्ट ने निर्णय दिया और इसे संविधान की मूल संरचना के खिलाफ माना था। इसके बाद, ओबीसी आरक्षण को लेकर विभिन्न राज्यों में नीतियों में बदलाव हुए थे। कुछ राज्यों ने ओबीसी के आरक्षण को बढ़ाया था। इसके साथ ही, आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों के लिए भी आरक्षण देने की दिशा में कदम उठाए गए थे।
OBC आरक्षण की वर्तमान स्थिति
संविधान में ओबीसी आरक्षण को लेकर कोई विशेष रूप से निर्धारित सीमा नहीं है। यह राज्यों पर निर्भर करता है कि वे इसे कैसे लागू करें। वर्तमान में, OBC के लिए 27% आरक्षण सरकारी नौकरी और शिक्षा संस्थानों में दिया जा रहा है, लेकिन इसमें भी आर्थिक दृष्टि से पिछड़े वर्गों की स्थिति पर विचार किए जाने की आवश्यकता महसूस हो रही है।
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जानें OBC आरक्षण का इतिहास
मंडल आयोग की रिपोर्ट (1980)
1980 में मंडल आयोग की रिपोर्ट आई थी। 1990 में प्रधानमंत्री वी.पी. सिंह ने इसे लागू किया था। इसके बाद, ओबीसी के लिए 27% आरक्षण सरकारी नौकरियों और शैक्षिक संस्थानों में लागू हुआ था। यह कदम भारतीय राजनीति और समाज में विवादास्पद था। बावजूद इसके, इसे लंबे समय तक बहस और विरोध का सामना करने के बाद लागू किया गया था।
21वीं सदी में ओबीसी आरक्षण
इसके बाद, ओबीसी आरक्षण को लेकर विभिन्न राज्यों में नीतियों में बदलाव हुए थे। कुछ राज्यों ने ओबीसी के आरक्षण को बढ़ाया था। इसके साथ ही, आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों के लिए भी आरक्षण देने की दिशा में कदम उठाए थे।
OBC आरक्षण की वर्तमान स्थिति
संविधान में ओबीसी आरक्षण को लेकर कोई विशेष रूप से निर्धारित सीमा नहीं है। यह राज्यों पर निर्भर करता है कि वे इसे कैसे लागू करें। वर्तमान में, OBC के लिए 27% आरक्षण सरकारी नौकरी और शिक्षा संस्थानों में दिया जा रहा है। वहीं, इसमें भी आर्थिक दृष्टि से पिछड़े वर्गों की स्थिति पर विचार किए जाने की आवश्यकता महसूस हो रही है।
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