OBC आरक्षण केस: 27 से 29 अप्रैल तक होगी सुनवाई, अब टालने की गुंजाइश खत्म

Neel Tiwari | Apr 02, 2026, 15:11 IST
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obc reservation hearing april 27 28 29 mp high court order
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मध्यप्रदेश में OBC आरक्षण का बहुचर्चित मामला अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि अब इस केस की सुनवाई किसी भी हालत में नहीं टाली जाएगी। 27 से 29 अप्रैल तक लगातार सुनवाई तय की गई है।

News In Short

  • OBC आरक्षण केस की अंतिम सुनवाई 27, 28 और 29 अप्रैल को लगातार होगी।
  • चीफ जस्टिस की बेंच ने कहा, अब किसी भी हालत में सुनवाई नहीं टलेगी।
  • सुप्रीम कोर्ट से लौटे और बचे सभी मामलों को एक साथ लिस्ट किया जा रहा है
  • सभी पक्षों को अगली तारीख से पहले लिखित जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए गए हैं।
  • जजों के भी ओबीसी और सामान्य वर्ग के होने पर सवाल खड़े हुए हैं।

News In Detail

गुरुवार, 02 अप्रैल को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में ओबीसी आरक्षण मामले की सुनवाई हुई है। सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट कर दिया कि अब मामले की सुनवाई किसी भी स्थिति में टाली नहीं जाएगी।

कोर्ट ने 27, 28 और 29 अप्रैल को लगातार तीन दिन की सुनवाई करने को कहा है। साथ ही कहा कि इन दिनों में पूरे दिन इस मामले पर ही बहस होगी। इससे साफ संकेत मिल गए हैं कि अब यह मामला अंतिम चरण में पहुंच चुका है।

सुप्रीम कोर्ट से लौटे मामलों को भी जोड़ा जाएगा

सुनवाई के दौरान अधिवक्ता रामेश्वर ठाकुर ने कोर्ट को बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने पिछले आदेश में संशोधन करते हुए दो मामलों को सुनवाई के लिए वापस बुला लिया है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट से वापस आए सभी मामलों को इस मुख्य केस के साथ लिस्ट किया जाना है।

वहीं कुछ मामलों को सुप्रीम कोर्ट ने अपने पास वापस भी ले लिया है। इसके अलावा जो नई या लंबित याचिकाएं हैं, उन्हें भी अब इस सुनवाई के साथ जोड़ा जाएगा ताकि एक साथ सभी पहलुओं पर फैसला हो सके। साथ ही, आगे कोई तकनीकी बाधा न आए।

जजों के भी ओबीसी और अनारक्षित वर्ग के होने पर उठा सवाल

सुनवाई के दौरान एक अधिवक्ता के द्वारा सुप्रीम कोर्ट के आदेश के हवाले से यह कहा गया कि इस मामले की सुनवाई किसी ऐसे जज के सामने नहीं हो सकती जो स्वयं ओबीसी वर्ग के हो। हालांकि कोर्ट ने इस मांग को सिरे से खारिज कर दिया है। जानकारी के अनुसार अधिवक्ता का नाम उदय कुमार है पर इसकी पुष्टि नहीं हुई है।

रजिस्ट्रार कोर्ट में होगी तैयारी

हाईकोर्ट ने यह भी निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई से पहले सभी पक्ष अपने-अपने लिखित जवाब (Written Submissions) दाखिल करें। इसके लिए मामले को रजिस्ट्रार कोर्ट में लिस्ट किया गया है, ताकि सभी दस्तावेज, फाइलिंग और प्रक्रियात्मक कमियां पहले ही पूरी कर ली जाएं। कोर्ट का साफ कहना है कि 27 अप्रैल से शुरू होने वाली सुनवाई में किसी भी प्रकार की तकनीकी देरी नहीं होनी चाहिए।

टालने की कोशिश पर सख्ती

कोर्ट ने मौखिक रूप से यह भी स्पष्ट कर दिया कि अब यदि किसी भी पक्ष द्वारा सुनवाई टालने का अनुरोध किया जाता है तो उसे स्वीकार नहीं किया जाएगा। पहले बार-बार दायर हस्तक्षेप याचिकाओं के कारण मामला लंबा खिंचता रहा, लेकिन अब कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए इस पर पूरी तरह रोक लगाने के संकेत दे दिए हैं।

फुटबॉल अब गोलपोस्ट के पास

सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता शशांक रत्नू ने सुनवाई के बाद कहा कि अब यह मामला निर्णायक स्थिति में पहुंच चुका है। उनके शब्दों में, फुटबॉल अब गोलपोस्ट के पास है। उन्होंने बताया कि कोर्ट ने स्पष्ट रूप से तीन दिन तय कर दिए हैं। साथ ही, अब मुद्दों को फ्रेम कर अंतिम बहस की तैयारी की जा रही है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि लंबे समय से लंबित इस मामले के कारण भर्तियां रुकी रहीं और इसका नुकसान सभी वर्गों के युवाओं को हुआ है।

आरक्षण और 6 साल का विवाद अब खत्म होने की ओर

गौरतलब है कि मध्यप्रदेश में OBC आरक्षण को 14% से बढ़ाकर 27% किए जाने के बाद यह विवाद शुरू हुआ था। 87-13 फॉर्मूले, 50% सीमा और अंतरिम आदेशों के चलते हजारों भर्तियां अटक गईं।

यह मामला पिछले करीब 6 वर्षों से कोर्ट में लंबित है, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट की समयसीमा और हाईकोर्ट की सख्ती के बाद यह लगभग तय माना जा रहा है कि अप्रैल के अंत या अगले दो महीनों में इस विवाद का अंतिम समाधान सामने आ जाएगा।

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