यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे की राख को लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका

Neel Tiwari | Jul 28, 2025, 23:03 IST
Share
union-carbide-toxic
union-carbide-toxic

भोपाल की सामाजिक कार्यकर्ता और वकील ने वैज्ञानिक तकनीक से राख को नष्ट करने की मांग की। उन्होंने जापान और जर्मनी जैसे देशों का उदाहरण देते हुए कहा कि इनके पास मरकरी युक्त राख को नष्ट करने की तकनीक है।

भोपाल की सामाजिक कार्यकर्ता और वकील ने वैज्ञानिक तकनीक से राख को नष्ट करने की मांग की। उन्होंने जापान और जर्मनी जैसे देशों का उदाहरण देते हुए कहा कि इनके पास मरकरी युक्त राख को नष्ट करने की तकनीक है।

यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री के जहरीले कचरे को लेकर एक बार फिर चिंता गहराने लगी है। हाईकोर्ट में दायर जनहित याचिका में सनसनीखेज दावा किया गया है कि इस कचरे की राख में रेडियोएक्टिव यानी विकिरण पैदा करने वाले तत्व सक्रिय हैं, जो मिट्टी और पानी को दूषित कर सकते हैं और इसके गंभीर पर्यावरणीय और मानव स्वास्थ्य पर असर पड़ सकते हैं।

ये खबर भी पढ़िए... अब हाईकोर्ट में मामलों के निपटारे और न्यायिक व्यवस्था को मिलेगी मजबूती, 11 नए जज हुए नियुक्त

हाईकोर्ट ने दी मुख्य याचिका के साथ सुनवाई की मंजूरी

यह याचिका भोपाल निवासी वकील बीएल नागर और समाजसेवी साधना कार्णिक की ओर से दायर की गई थी, जिनकी पैरवी एडवोकेट ऋत्विक दीक्षित ने की। सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने याचिका को गंभीरता से लेते हुए इसे पहले से लंबित मुख्य जनहित याचिका के साथ जोड़े जाने का आदेश दिया।

ये खबर भी पढ़िए... सावन के तीसरे सोमवार को निकली भगवान महाकाल की सवारी, चंद्रमौलेश्वर-मनमहेश रूप में दिए दर्शन

जापान-जर्मनी के पास है राख को नष्ट करने की तकनीक

याचिकाकर्ताओं की ओर से बताया गया कि यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री में पड़े 337 मीट्रिक टन जहरीले कचरे को पीथमपुर स्थित एक विशेष सुविधा केंद्र में नष्ट तो कर दिया गया है, लेकिन उससे 850 टन राख और अवशेष निकले हैं, जिनमें भारी मात्रा में मरकरी (पारा) और रेडियोएक्टिव तत्व हैं। चिंता की बात ये है कि मरकरी को नष्ट करने की तकनीक केवल जापान और जर्मनी जैसे कुछ देशों के पास ही उपलब्ध है।

ये खबर भी पढ़िए... झालावाड़ स्कूल हादसा: हाईकोर्ट ने लिया संज्ञान, कहा-बहुत हो चुका, अब चेतने का समय

रेडियोएक्टिव राख को जमीन में दबाना भी है खतरा

याचिका में यह भी कहा गया है कि यह राख फिलहाल लैंडफिल सेल में दबाने की योजना है, लेकिन यदि उसमें रेडियोएक्टिव तत्व सक्रिय हैं, तो इससे आसपास की जमीन और जलस्रोत जहरीले हो सकते हैं। इससे न सिर्फ पर्यावरण को नुकसान होगा, बल्कि वहां के आसपास रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ेगा।

सरकारी और निजी एक्सपर्ट्स में मतभेद

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि राख को ठिकाने लगाने के लिए अभी तक विशेषज्ञों की राय में भी एकमत नहीं है। सरकारी और निजी विशेषज्ञों के मत अलग-अलग हैं, इसलिए इस प्रक्रिया को टालकर पहले वैज्ञानिक और तकनीकी रूप से अधिक सुरक्षित विकल्प ढूंढा जाना चाहिए।

5 पॉइंट्स में समझें पूरी स्टोरी

👉 भोपाल की वकील और सामाजिक कार्यकर्ता ने वैज्ञानिक तकनीक से राख को नष्ट करने की मांग की है।

👉 याचिका में दावा किया गया है कि यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री की राख में मरकरी और रेडियोएक्टिव तत्व सक्रिय हैं, जो पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकते हैं।

👉 राख को नष्ट करने की तकनीक जापान और जर्मनी के पास है, जो इस समस्या का समाधान कर सकते हैं।

👉 राख को लैंडफिल सेल में दबाने से आसपास की मिट्टी और जलस्रोत दूषित हो सकते हैं, जिससे स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर पड़ेगा।

👉 हाईकोर्ट ने याचिका को गंभीर मानते हुए इसे पहले से लंबित मुख्य याचिका के साथ जोड़ा और 1 अगस्त 2025 को अगली सुनवाई तय की।

जनहित याचिका के साथ होगी सुनवाई

फिलहाल हाईकोर्ट ने याचिका को गंभीर मानते हुए इसे पहले से लंबित मुख्य जनहित याचिका के साथ जोड़ा है। अगली सुनवाई 1 अगस्त 2025 को तय की गई है, जिसमें यह तय हो सकता है कि क्या केंद्र और राज्य सरकार इस राख के निपटारे को लेकर कोई नई और वैज्ञानिक पहल करेंगी या नहीं।

40 साल बीतने के बाद अभी बरकरार है खतरा

Bhopal gas tragedy case: 36 साल बाद विदेश कंपनी की कोर्ट में दलील, कहा-  जिला न्यायालय को सुनवाई का अधिकार नहीं - Bhopal gas tragedy case US Firm  That Took Over Union
Bhopal gas tragedy case: 36 साल बाद विदेश कंपनी की कोर्ट में दलील, कहा- जिला न्यायालय को सुनवाई का अधिकार नहीं - Bhopal gas tragedy case US Firm That Took Over Union


इस जनहित याचिका ने यूनियन कार्बाइड त्रासदी के 40 साल बाद एक बार फिर उस खतरे को सबके सामने ला खड़ा किया है, जो शायद अब भी मिटा नहीं है।बल्कि राख के रूप में अब भी ज़िंदा है। अब देखना होगा कि अदालत, सरकार और वैज्ञानिक संस्थाएं मिलकर इस गंभीर पर्यावरणीय संकट का समाधान किस तरह खोजती हैं।

thesootr links

दसूत्र की खबरें आपको कैसी लगती हैं? Google my Business पर हमें कमेंट केसाथ रिव्यू दें। कमेंट करने के लिए इसी लिंक पर क्लिक करें

अगर आपको ये खबर अच्छी लगी हो तो 👉 दूसरे ग्रुप्स, 🤝दोस्तों, परिवारजनों के साथ शेयर करें📢🔃🤝💬👩‍👦👨‍👩‍👧‍👧👩

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट | यूनियन कार्बाइड का कचरा | यूनियन कार्बाइड फैक्टरी | MP

Tags:
  • मध्यप्रदेश
  • मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
  • MP
  • भोपाल
  • यूनियन कार्बाइड फैक्टरी
  • यूनियन कार्बाइड का कचरा
गूगल पर द सूत्र चुनें ! Add as a preferredsource on Google
MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग

By Atul Dwivedi

MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग
एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री

By Ramanand Tiwari

एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री
मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा

By Ramanand Tiwari

मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा
मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन

By Jitendra Shrivastava

मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें

By Sanjay Dhiman

mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे

By Sanjay Gupta

झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा

By Arun Tiwari

बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा