विजयपुर विधायक बने रहेंगे मुकेश मल्होत्रा, SC ने हाईकोर्ट के आदेश पर लगाया स्टे
Sourabh Bhatnagar | Mar 19, 2026, 12:41 IST
vijaypur seat supreme court hearing mukesh malhotra
विजयपुर विधानसभा सीट को लेकर चल रहे कानूनी विवाद में गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला दिया है। कोर्ट ने मुकेश मल्होत्रा की विधायकी को बरकरार रखते हुए एमपी हाईकोर्ट के आदेश पर स्टे लगा दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने मुकेश मल्होत्रा की विधायकी को बरकरार रखते हुए एमपी हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच के उस फैसले पर स्टे लगा दिया है, जिसमें रामनिवास रावत को विधायक घोषित किया गया था।
सुप्रीम कोर्ट में मुकेश मल्होत्रा का पक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा ने रखा। उनकी दलीलें सुनने के बाद अदालत ने मल्होत्रा को राहत दी।
जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की डबल बेंच ने मुकेश मल्होत्रा को विधायक के तौर पर बने रहने की इजाजत तो दे दी। हालांकि साथ ही ये भी कहा कि जब तक आखिरी फैसला नहीं आता, तब तक कुछ पाबंदियां लागू रहेंगी।
मुकेश मल्होत्रा फिलहाल राज्यसभा चुनाव में वोट नहीं डाल सकेंगे। इसका मतलब है कि जून में होने वाले राज्यसभा चुनाव में वे अपना वोट नहीं दे पाएंगे।
इसके अलावा, जब तक कोर्ट इस मामले में अपना आखिरी फैसला नहीं सुनाता, मुकेश को विधायक के तौर पर मिलने वाला वेतन और भत्ते नहीं दिए जाएंगे। हालांकि, यह अभी साफ नहीं है कि उन्हें विधायक निधि मिलेगी या नहीं।
वरिष्ठ वकील विवेक तन्खा (Advocate Vivek Tankha) ने बताया कि इस मामले की अगली सुनवाई 23 जुलाई को होगी।
दरअसल, एमपी हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच ने क्रिमिनल केस छिपाने के आरोप में मुकेश मल्होत्रा का चुनाव शून्य घोषित कर दिया था और भाजपा के नेता रामनिवास रावत को विजेता माना था।
इसके बाद, मल्होत्रा ने हाईकोर्ट में ही एक आवेदन दिया और अपील करने के लिए कुछ समय मांगा था। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह साफ किया कि मुकेश मल्होत्रा के पास सुप्रीम कोर्ट में अपील करने के लिए 15 दिन का समय था।
पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने कहा कि इस ऐतिहासिक निर्णय से भाजपा के सियासी षडयंत्र फिर नाकाम हुए हैं! उम्मीद की जानी चाहिए कि लोकतंत्र और संविधान के अपमान का आदतन अपराध करने वाली बीजेपी इस कानूनी-सबक को हमेशा याद रखेगी! सत्यमेव जयते
विजयपुर की राजनीति में मुकेश मल्होत्रा और रामनिवास रावत, दोनों का कद काफी बड़ा है। रोचक तथ्य यह है कि दोनों ने ही चुनाव से पहले पाला बदला था। पूर्व राज्यमंत्री मुकेश मल्होत्रा ने 2 मई 2024 को प्रियंका गांधी की उपस्थिति में कांग्रेस (मुकेश मल्होत्रा कांग्रेस) का हाथ थामा था।
इससे पहले 2023 के विधानसभा चुनाव में वे निर्दलीय लड़े थे और 45 हजार वोट हासिल कर अपनी ताकत दिखाई थी। वहीं, क्षेत्र के 70 हजार से ज्यादा सहरिया आदिवासी वोटों के गणित ने इस पूरी लड़ाई को और भी दिलचस्प बना दिया है।
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सुप्रीम कोर्ट में मुकेश मल्होत्रा का पक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा ने रखा। उनकी दलीलें सुनने के बाद अदालत ने मल्होत्रा को राहत दी।
जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की डबल बेंच ने मुकेश मल्होत्रा को विधायक के तौर पर बने रहने की इजाजत तो दे दी। हालांकि साथ ही ये भी कहा कि जब तक आखिरी फैसला नहीं आता, तब तक कुछ पाबंदियां लागू रहेंगी।
सुप्रीम कोर्ट ने रखीं ये शर्तें
वोट नहीं डाल सकेंगे मल्होत्रा
वेतन भी नहीं मिलेगा
वरिष्ठ वकील विवेक तन्खा (Advocate Vivek Tankha) ने बताया कि इस मामले की अगली सुनवाई 23 जुलाई को होगी।
SC ने HC के आदेश पर लगाया स्टे
इसके बाद, मल्होत्रा ने हाईकोर्ट में ही एक आवेदन दिया और अपील करने के लिए कुछ समय मांगा था। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह साफ किया कि मुकेश मल्होत्रा के पास सुप्रीम कोर्ट में अपील करने के लिए 15 दिन का समय था।
ये सत्य, न्याय, लोकतंत्र और संविधान की जीत: जीतू
यह सत्य,
न्याय, लोकतंत्र,
संविधान की विजय है!
यह जनता-जनमत की जीत है!
माननीय सुप्रीम कोर्ट ने विजयपुर विधानसभा सीट पर कांग्रेस के जुझारू, ऊर्जावान विधायक श्री मुकेश मल्होत्रा जी की विधायकी को बरकरार रखा है! मैं शीर्ष अदालत का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं!
इस ऐतिहासिक निर्णय से… https://t.co/glMaY7L7Sr
— Jitendra (Jitu) Patwari (@jitupatwari) March 19, 2026
सत्यमेव जयते !
माननीय उच्चतम न्यायालय का फैसला स्वागत योग्य है। विजयपुर की जनता ने अपना विधायक मुकेश मल्होत्रा को चुना था, लेकिन सत्ता के अहंकार में डूबी सरकार और "पिंजरे में बंद तोते" की तरह काम करने वाले चुनाव आयोग ने जनादेश को पलटने की हर संभव कोशिश की।
आज माननीय सुप्रीम… pic.twitter.com/QYymWBiPlk
— Umang Singhar (@UmangSinghar) March 19, 2026
सियासी सफर: जब दोनों दिग्गजों ने बदली थी राह
इससे पहले 2023 के विधानसभा चुनाव में वे निर्दलीय लड़े थे और 45 हजार वोट हासिल कर अपनी ताकत दिखाई थी। वहीं, क्षेत्र के 70 हजार से ज्यादा सहरिया आदिवासी वोटों के गणित ने इस पूरी लड़ाई को और भी दिलचस्प बना दिया है।
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