आईआईटी बॉम्बे में राजस्थान के छात्र ने की खुदकुशी, आखिर क्यों टूट रहे हैं 'सुपर माइंड्स', जानें पूरा मामला
Ashish Bhardwaj | Feb 04, 2026, 16:25 IST
Photograph: (the sootr)
आईआईटी बॉम्बे में राजस्थान के छात्र नमन अग्रवाल ने हॉस्टल की नौवीं मंजिल से कूदकर जान दे दी। इस मौत से एक बार फिर यह सवाल खड़ा हुआ है कि आखिर उच्च शिक्षा संस्थानों में 'सुपर माइंड्स' क्यों टूट रहे हैं।
News In Short
- आईआईटी बॉम्बे के छात्र ने हॉस्टल नौवीं मंजिल से कूदकर दी जान
- मृतक छात्र नमन अग्रवाल रहने वाला था राजस्थान में पिलानी का
- फिलहाल नमन का कोई सुसाइड नोट पुलिस को नहीं मिला
- नमन की मौत से फिर वही सवाल, क्यों टूट रहे हैं 'सुपर माइंड्स'
- उच्च शिक्षा संस्थानों में सुसाइड रोकने के उपायों पर फिर गंभीरता दिखाने की जरूरत
News In Detail
नमन अग्रवाल ने मंगलवार देर रात हॉस्टल की नौवीं मंजिल से कूदकर जान दे दी। करीब 21 साल का नमन बीटेक सिविल इंजीनियरिंग के दूसरे वर्ष का छात्र था। इस मौत ने फिर उन कड़वे सवालों को जिंदा कर दिया है कि आखिर क्यों 'सपनों की फैक्ट्री' कहे जाने वाले इन उच्च तकनीकी संस्थानों में छात्र मौत को गले लगा रहे हैं?
आधी रात का वो भयावह मंजर
सुसाइड नोट न मिलना बनी गुत्थी
हर साल हो रही आईआईटी छात्रों की मौत
क्यों टूट रहे हैं 'सुपर माइंड्स'
- देश के टॉप 0.1% दिमागों के बीच होने वाली दौड़ में 'औसत' रह जाने का डर छात्रों को तोड़ देता है।
- करोड़ों के पैकेज की उम्मीद और माता-पिता की आकांक्षाओं का बोझ एक भारी मानसिक तनाव पैदा करता है।
- पढ़ाई के अत्यधिक दबाव के कारण छात्र सामाजिक जीवन से कट जाते हैं और अकेलेपन का शिकार हो जाते हैं।
- कई बार हिंदी माध्यम या आरक्षित वर्गों से आने वाले छात्र खुद को कैंपस के 'एलीट' माहौल में ढाल नहीं पाते।
- रात-रात भर जागना और मानसिक विश्राम न मिलना अवसाद को जन्म देता है।
- आईआईटी और आईआईएस जैसे उच्च शिक्षा संस्थानों को अब 'रिजल्ट' से ज्यादा 'रिलेशनशिप' पर ध्यान देने की जरूरत है।
- वरिष्ठ छात्रों और प्रोफेसरों को नए छात्रों के साथ भावनात्मक जुड़ाव बनाना चाहिए ताकि वे अपनी बात साझा कर सकें।
- कैंपस में मनोवैज्ञानिकों की संख्या बढ़ाई जाए और काउंसलिंग लेने को 'कलंक' न समझा जाए।
- केवल CGPA के आधार पर छात्र की योग्यता आंकने की पद्धति में बदलाव की आवश्यकता है।
- हॉस्टल की छतों और बालकनियों पर सुरक्षा जाली या सेंसर लगाना, जैसा कि कुछ संस्थानों ने शुरू किया है।
- अभिभावक बच्चों पर केवल 'नंबर 1' बनने का दबाव न डालें, उन्हें असफलता स्वीकार करना भी सिखाएं।
निष्कर्ष
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