पैरामेडिकल परीक्षा में 5.5 लाख की नकल डील फेल, 4 आरोपी गिरफ्तार
Mukesh Sharma | Jun 29, 2026, 20:11 IST
जयपुर में पैरामेडिकल परीक्षा में 5.5 लाख की नकल डील फेल, 4 आरोपी गिरफ्तार
जयपुर पुलिस ने पैरामेडिकल परीक्षा में 5.50 लाख रुपए में 45 छात्रों को सामूहिक नकल कराने की साजिश को नाकाम कर दिया है। मामले में पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
समझें क्या है पूरा मामला
- जयपुर में पैरामेडिकल परीक्षा में सामूहिक नकल का भंडाफोड़, 5.5 लाख की डील लीक।
- 45 छात्रों को एक कमरे में बैठाकर पास कराने की साजिश को पुलिस ने किया नाकाम।
- मामले से जुड़े कॉलेज संचालक, HOD और लेक्चरर गिरफ्तार, वॉट्सऐप चैट से खुलासा।
- नकल के लिए 3.27 लाख एडवांस, इनविजिलेटर सेट करने की थी ब्लैक डील।
- डायरी और वॉट्सऐप चैट में मिला रुपयों का पूरा हिसाब, 4 नकल माफियागिरफ्तार।
जयपुर के प्रभा देवी मेमोरियल पीजी कॉलेज परीक्षा केंद्र पर पेपर पढ़ाकर (नकल करवाकर) झुंझुनूं के एक कॉलेज के 45 छात्रों को परीक्षा पास करवानी थी। इसके एवज में कुल 5.50 लाख रुपए का सौदा तय हुआ था। फिलहाल, खोराबीसल थाना पुलिस गिरफ्तार किए गए चारों आरोपियों से पूछताछ कर रही है।
कॉलेज के संचालक, HOD और लेक्चरर गिरफ्तार
गिरफ्तार आरोपियों में झुंझुनूं के मुकुंदगढ़ स्थित एस. करण कॉलेज के HOD कृष्ण कुमार, लेक्चरर शंकर लाल जाट (27), और जयपुर के प्रभा देवी मेमोरियल पीजी कॉलेज के संचालक रामकृष्ण मंडीवाल व उनके भतीजे देव कृष्ण शामिल हैं।
एक ही कमरे में बैठाकर नकल कराने का था प्लान
साजिश के तहत इन सभी छात्रों को परीक्षा केंद्र के एक ही कमरे में बैठाया जाना था, जहां परीक्षा के दौरान ड्यूटी पर तैनात इनविजिलेटर (वीक्षक) के जरिए उन्हें पेपर पढ़ाया जाना था।
पुलिस कंट्रोल रूम को मिली सूचना
सूचना मिलते ही एक्टिव हुई DST टीम ने आरोपियों की तलाश शुरू की और प्रताप नगर से कृष्ण कुमार सैनी और शंकर लाल जाट को दबोच लिया।
तलाशी के दौरान उनके बैग से दो डायरियां मिलीं, जिनमें परीक्षा देने वाले छात्रों के नाम और उनसे ली गई रकम का पूरा हिसाब-किताब दर्ज था।
इनविजिलेटर सेट करने के लिए दिए थे 3.27 लाख रुपए
आरोपियों ने कबूल किया कि उन्होंने 45 छात्रों से कुल 5.50 लाख रुपए लिए थे, जिसमें से 27 जून को ही 3.27 लाख रुपए रामकृष्ण मंडीवाल के जरिए कॉलेज के संस्थापक देवकृष्ण मंडीवाल को दिए गए थे, ताकि परीक्षा कक्ष में मनपसंद इनविजिलेटर (वीक्षक) लगाकर नकल कराई जा सके।
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