राजस्थान में वायु परीक्षण : कैसा होगा चौमासा! जानिए वर्षा के बारे में भविष्यवाणी
Nitin Kumar Bhal | Jul 11, 2025, 11:15 IST
Photograph: (The Sootr)
राजस्थान में आषाढ़ वायु धारिणी पूर्णिमा के दिन वायु परीक्षण में अच्छी वर्षा, बेहतर कृषि उत्पादन, और जलस्रोतों के परिपूर्ण रहने के संकेत मिले। जयपुर में पारंपरिक और वैज्ञानिक विधियों से वायु परीक्षण किया गया।
राजस्थान (Rajasthan) में हर साल की तरह इस बार भी आषाढ़ वायु धारिणी पूर्णिमा के मौके पर राजधानी जयपुर (Jaipur) में पारंपरिक और वैज्ञानिक विधियों से वायु परीक्षण किया गया। यह परीक्षण वर्षा की स्थिति, कृषि उत्पादन और जलस्रोतों की स्थिति का पूर्वानुमान करने के लिए किया गया था। जंतर-मंतर से लेकर विज्ञान केंद्र तक अनुभवी ज्योतिषाचार्यों, पंचांगकर्ताओं और विद्वानों ने वायु की दिशा और गति का विश्लेषण किया, जिसके परिणाम उत्साहजनक रहे।
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राजधानी के ऐतिहासिक जंतर मंतर पर 110 फीट ऊंचे सम्राट यंत्र पर ज्योतिषाचार्यों और पंचांगकर्ताओं ने सूर्यास्त के समय ध्वजा की दिशा का अध्ययन किया। इस विधि से वायु प्रवाह का विश्लेषण किया गया। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार वर्ष संवत्सर का नाम 'सिद्धार्थ' होने के कारण बादल जल से परिपूर्ण रहेंगे और वर्षा अच्छी होगी। इससे अन्न-धान्य की प्रचुरता और राजनीतिक स्थिरता के साथ-साथ जनहितकारी कार्यों में वृद्धि के योग बनते हैं। इस मौके पर प्रो. डॉ. विनोद शास्त्री, डॉ. विनोद कुमार शर्मा, डॉ. लता श्रीमाली सहित कई दैवज्ञ और विद्वान मौजूद थे।
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शास्त्री नगर स्थित क्षेत्रीय विज्ञान केंद्र में भी अखिल भारतीय प्राच्य ज्योतिष शोध संस्थान द्वारा 298वां वायु परीक्षण किया गया। इस परीक्षण के संयोजक डॉ. रवि शर्मा के अनुसार, यहां भी वायु का प्रवाह पश्चिम दिशा में पाया गया, जो भरपूर जलवृष्टि और बेहतर कृषि उत्पादन के संकेत देता है। हालांकि, इस दौरान जल प्रकोप की आशंका भी व्यक्त की गई है। पं. चंद्रशेखर शर्मा के मुताबिक 'समय का वाहन अश्व (घोड़ा)' होने से प्राकृतिक आपदाओं जैसे तूफान, ओलावृष्टि और भूस्खलन की संभावना बनी रहती है। वहीं 'समय का वास धोबी के घर' में होने से जलस्रोतों के परिपूर्ण रहने और अच्छी वर्षा के संकेत मिलते हैं।
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विभिन्न जलवायु और कृषि से संबंधित स्तंभों का तुलनात्मक निष्कर्ष इस प्रकार था:
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आषाढ़ पूर्णिमा (गुरु पूर्णिमा) के दिन, जिसे वायु धारिणी पूर्णिमा भी कहा जाता है, वायु परीक्षण एक पारंपरिक विधि है, जिसका उद्देश्य वर्षा का पूर्वानुमान करना होता है। इस दिन, सूर्यास्त के समय, हवा की दिशा और गति का निरीक्षण किया जाता है, और इसे आने वाले मौसम तथा फसलों के बारे में एक संकेत माना जाता है।
सूर्यास्त के समय, हवा की दिशा और गति का निरीक्षण किया जाता है। खासतौर पर, हवा की दिशा को पूर्व से पश्चिम या पश्चिम से पूर्व की ओर बहने के रूप में देखा जाता है। इसके अलावा, वायु की गति का भी अनुमान लगाया जाता है।
माना जाता है कि वायु की दिशा और गति वर्षा के स्वरूप और फसलों की वृद्धि को प्रभावित करती हैं। उदाहरण के लिए, यदि हवा पूर्व से पश्चिम की ओर बहती है, तो इसे अच्छी वर्षा का संकेत माना जाता है। कुछ क्षेत्रों में वायु परीक्षण के लिए पारंपरिक यंत्रों का उपयोग किया जाता है, जैसे सम्राट यंत्र।
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जंतर-मंतर पर ध्वजा परीक्षण से वर्षा के संकेत
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विज्ञान केंद्र में 298वां वायु परीक्षण
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चार स्तंभों का तुलनात्मक निष्कर्ष
- जल स्तंभ (Water Column): 85.35% – वर्षा की स्थिति श्रेष्ठ
- तृण स्तंभ (Grass Column): 100% – चारे की उपलब्धता उत्तम
- वायु स्तंभ (Air Column): 10.72% – वायु में न्यूनता
- अन्न स्तंभ (Food Column): 21.67% – अन्न उत्पादन में संभावित रोग-प्रकोप
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आषाढ़ वायु धारिणी पूर्णिमा परीक्षण के बारे में जानें
विधि
महत्व
FAQ
- 1. आषाढ़ वायु धारिणी पूर्णिमा पर वायु परीक्षण क्यों किया गया?
आषाढ़ वायु धारिणी पूर्णिमा के अवसर पर वायु परीक्षण किया जाता है ताकि वर्षा की स्थिति, कृषि उत्पादन और जलस्रोतों की स्थिति का पूर्वानुमान किया जा सके। इस बार के परीक्षण में अच्छे परिणाम मिले हैं, जिनसे भरपूर वर्षा और बेहतर कृषि उत्पादन की उम्मीद जताई जा रही है। - 2. जंतर-मंतर पर ध्वजा परीक्षण से क्या संकेत मिले?
जंतर-मंतर पर ध्वजा परीक्षण से वायु प्रवाह की दिशा का अध्ययन किया गया, जिससे यह संकेत मिला कि इस बार वर्षा अच्छी होगी। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार 'सिद्धार्थ' वर्ष संवत्सर के कारण वर्षा का स्तर ऊँचा रहेगा, और इससे अन्न-धान्य की प्रचुरता की संभावना है। - 3. विज्ञान केंद्र में वायु परीक्षण के परिणाम क्या थे?
विज्ञान केंद्र में किए गए वायु परीक्षण में पश्चिम दिशा में वायु प्रवाह पाया गया, जो अधिक वर्षा और बेहतर कृषि उत्पादन के संकेत देता है। हालांकि, कुछ प्राकृतिक आपदाओं जैसे तूफान और ओलावृष्टि की भी संभावना जताई गई है।
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