रणथंभौर और सरिस्का टाइगर रिजर्व के चार बाघों का शिकार,10 बाघ टेरेटरी की लड़ाई में मरे

Ashish Bhardwaj | Feb 20, 2026, 16:12 IST
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bagh
Photograph: (the sootr)

राजस्थान के रणथंभौर और सरिस्का बाघ अभयारण्यों में बाघों की सुरक्षा फिर से खतरे में पड़ गई है। अभयारण्यों में सुरक्षा उपायों की खामी से 14 बाघों की मौत।

News In Short

  • राजस्थान के रणथंभौर और सरिस्का बाघ अभयारण्यों में सुरक्षा में खामी के कारण 14 बाघों की मौत।
  • कैग की रिपोर्ट में बाघों की सुरक्षा में कमी और वन विभाग के खाली पदों पर उठाए सवाल
  • 539 करोड़ के बजट में से 195 करोड़ खर्च ही नहीं हुए।
  • खराब वित्तीय प्रबंधन,अतिक्रमण और अवैध खनन को बताया बड़ा कारण
  • बाघों के संघर्षों को नियंत्रित करने और सुरक्षा सुधार के लिए कई सिफारिशें की गई
  • अवैध शिकार पर रोक लगाने और अतिक्रमण हटाने के लिए ठोस कार्रवाई की जरूरत जताई गई।

News In Detail

केंद्र और राज्य सरकार के लाख दावों और प्रयासों के बावजूद राजस्थान के रणथंभौर और सरिस्का बाघ अभयारण्यों में आज भी बाघों का शिकार जारी है। कैग रिपोर्ट के अनुसार दोनों अभ्यारण्यों में चार बाघों की मौत शिकारियों ने की है। रिपोर्ट के अनुसार इसके अतिरिक्त 10 बाघ दस बाघ क्षेत्रीय संघर्षों में मारे गए हैं।

सुरक्षा उपायों में खामियां और प्रशासनिक लापरवाही

कैग की रिपोर्ट में कहा गया है कि वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के पचास प्रतिशत से अधिक पद खाली हैं। इससे सुरक्षा उपायों में कमी आई। इसमें वन रक्षकों के 65 प्रतिशत पद खाली हैं। इसके अलावा आवंटित बजट 539 करोड़ में से 195 करोड़ भी खर्च नहीं किए गए जो वित्तीय प्रबंधन की खामियों को दर्शाता है।

आज भी हो रहा है बाघों का शिकार

रिपोर्ट में सबसे बड़ा खुलासा हुआ है कि रणथंभौर और सरिस्का टाइगर रिजर्व में चार बाघों का शिकार हुआ है। इसके अतिरिक्त बाघों की अत्यधिक भीड़ और क्षेत्रीय संघर्ष के कारण दस बाघ मारे गए। 2016 में 76 बाघों की संख्या बढ़कर 2023 में 110 हो गई। हालांकि नौ बाघों की मौत बीमारी से हुई।

बढ़ता अवैध खनन

रिपोर्ट में बताया है कि बाघों के लिए सबसे बड़ी चुनौती अवैध खनन और अतिक्रमण रहा है। तीनों बाघ अभयारण्यों में 320.29 हेक्टेयर भूमि पर 253 परिवारों ने अतिक्रमण कर लिया है। इसके अलावा, एसटीआर के आसपास खनन जारी रहा। इससे बाघों की सुरक्षा और संरक्षण में बाधाएं आईं।

खाली पद

तीन बाघ अभयारण्यों में 640 कर्मचारियों में से 295 ही कार्यरत थे। वन रक्षक के 469 में से 305 पद रिक्त थे। इसके अलावा, क्षेत्रीय वन अधिकारी और वनपाल के 17 से 28% पद भी खाली थे। इसके परिणामस्वरूप, सुरक्षा और संरक्षण उपायों में गंभीर कमी आई।

सुधार के सुझाव

रिपोर्ट में बाघों की सुरक्षा और संरक्षण के लिए कुछ सुधारों की सिफारिश की गई है:-

  • अवैध शिकार पर रोक लगाने के लिए एसटीएफ (स्पेशल टास्क फोर्स) का गठन किया जाए।
  • बाघों के संघर्षों को रोकने के लिए कॉरिडोर विकसित किए जाएं।
  • अतिक्रमण हटाने और बाघ अभयारण्यों का सीमांकन करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
  • पुनर्वास पैकेज को आकर्षक बनाया जाए ताकि ग्रामीणों के बीच पुनर्वास के लिए स्वीकार्यता बढ़ सके।

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