राजस्थान बजट 2026: कर्मचारियों की 'बल्ले-बल्ले', 8वें वेतन आयोग के लिए बनेगी हाईपावर कमेटी, सौगातों का पिटारा
Jinesh Jain | Feb 11, 2026, 17:08 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान में भजनलाल सरकार का तीसरा बजट सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए "बंपर बजट" साबित हुआ है। बजट 2026-27 ने न केवल वित्तीय सुरक्षा, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और कार्य संस्कृति के आधुनिकीकरण पर भी ध्यान केंद्रित किया है।
News In Short
- 8वें वेतन आयोग के लिए गठित होगी हाईपॉवर कमेटी
- महिला कर्मचारियों के लिए चाइल्ड केयर और सरोगेसी लीव
- सरकारी दफ्तरों में 'शिशु-पालन सदन' खुलेंगे, जहां 6 वर्ष तक के बच्चों की देखभाल होगी।
- कर्मचारी की मौत पर अनुकंपा नियुक्ति में अब 'पुत्रवधू' भी पा सकेगी नौकरी
- राजस्थान में अब 'रूल बेस्ड' से 'रोल बेस्ड' गवर्नेंस का नया दौर
News In Detail
8वें वेतन आयोग की राह हुई साफ: गठित होगी हाईपॉवर कमेटी
महिला कार्मिकों को 'डबल राहत': चाइल्ड केयर और सरोगेसी लीव
चाइल्ड केयर लीव (CCL): अब महिला कर्मचारी एक साल में 3 के बजाय 6 चरणों में यह अवकाश ले सकेंगी। इससे छोटे बच्चों की परवरिश और स्कूल की छुट्टियों के दौरान माताओं को अधिक लचीलापन मिलेगा।
सरोगेसी मातृत्व अवकाश: बदलते सामाजिक परिवेश को देखते हुए सरकार ने संवेदनशील निर्णय लिया है। अब सरोगेसी से मां बनने वाली महिला (कमीशनिंग मदर) को 90 दिन और सरोगेट मदर को 180 दिन का मातृत्व अवकाश मिलेगा।
मुख्यमंत्री शिशु-पालन सदन: दफ्तरों में बच्चों की चिंता खत्म करने के लिए चरणबद्ध तरीके से
'शिशु-पालन सदन' खुलेंगे, जहाँ 6 माह से 6 वर्ष तक के बच्चों की देखभाल होगी।
अनुकंपा नियुक्ति में अब 'पुत्रवधू' भी हकदार
सरकार ने सेवा नियमों के मानवीय पक्ष को मजबूत करते हुए अनुकंपा नियुक्ति के दायरे को बढ़ाया है। अब मृत सरकारी कर्मचारी के आश्रितों की सूची में 'पुत्रवधू' को भी शामिल किया जाएगा। इसके अलावा, यदि कोई कर्मचारी ड्यूटी के दौरान ऐसी दिव्यांगता का शिकार होता है कि वह राजकार्य करने में सक्षम न रहे, तो उसके परिवार के पात्र सदस्य को अनुकंपा नियुक्ति दी जाएगी। यह कदम परिवारों को आर्थिक असुरक्षा से बचाने में मील का पत्थर साबित होगा।
बजट में पेंशनर्स के लिए 'डिजिटल कवच'
दिव्यांग बच्चों को राहत: पारिवारिक पेंशन पाने वाले विशेष योग्यजन बच्चों को अब हर 3 साल में दिव्यांगता प्रमाण पत्र नहीं देना होगा; अब सिर्फ एक बार का प्रमाण पत्र ही मान्य होगा।
'रूल बेस्ड' से 'रोल बेस्ड' गवर्नेंस का नया दौर
स्मार्ट गवर्नेंस: उद्देश्य है कि प्रशासन केवल नियमों की लकीर न पीटे, बल्कि अपनी भूमिका (Role) को समझकर जनता की समस्याओं का त्वरित समाधान करे।
भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और प्रतीक्षा सूची
सैलरी अकाउंट पैकेज और वित्तीय ताकत
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