कांग्रेस छोड़ भाजपा में गए दिग्गज नेता हाशिए पर, नहीं बदल पाया भाग्य

Mukesh Sharma | Jun 19, 2026, 13:25 IST
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दल-बदल का दर्द
Photograph: (the sootr)

राजस्थान में चुनाव से पहले कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए बड़े नेता का सियासी भाग्य नहीं बदल पाया। अधिकतर ऐसे नेता आज भी उपेक्षित चल रहे हैं। केवल ज्योति मिर्धा को छोड़ किसी को महत्व नहीं मिला।

ऐसे समझें पूरा मामला

  • राजस्थान में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए अधिकांश दिग्गज नेता हाशिए पर।
  • ज्योति मिर्धा को छोड़कर किसी भी दल-बदलू नेता को नहीं मिली बड़ी जगह।
  • कद्दावर जाट नेता लालचंद कटारिया भाजपा में आज भी राजनीतिक पद से महरूम।
  • ईडी-आईटी के छापों से परेशान होकर भाजपा में आए राजेंद्र यादव भी कतार में।
  • भाजपा में उपेक्षा से तंग आकर मालवीय और खिलाड़ीलाल वापस कांग्रेस में लौटे।
राजस्थान में 2023 के विधानसभा चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव के समय कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए अधिकांश नेता हाशिए पर हैं।

विधानसभा चुनाव हुए ढाई साल और लोकसभा चुनाव को दो साल हो चुके हैं। पूर्व सांसद ज्योति मिर्धाको छोड़कर किसी अन्य नेता को सरकार तो दूर संगठन तक में महत्व नहीं मिला है।

ज्योति मिर्धा को भाजपा ने प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया है। उन्हें नागौर से लोकसभा चुनाव में प्रत्याशी बनाया था। हालांकि वह रालोपा प्रमुख हनुमान बेनीवाल से चुनाव हार गई थीं।

कांग्रेस में थे बड़े नेता, भाजपा में महत्वहीन

यूपीए-2 में केंद्रीय राज्य मंत्री और राजस्थान में कृषि मंत्री रहे लालचंद कटारिया कांग्रेस प्रभावशाली नेता थे। वह कांग्रेसी दिग्गज सीपी जोशी और पूर्व सीएम अशोक गहलोत दोनों के ही विश्वासपात्र थे।

कांग्रेस में वह अकेले ऐसे नेता थे, जिन्होंने सचिन पायलट को खुली चुनौती दी थी। राजनीतिक रुप से देखें तो भाजपा में लालचंद कटारिया के कद का जाट नेता दूसरा नहीं है। इसके बावजूद भाजपा ने उन्हें न तो संगठन में स्थान दिया है और न ही सरकार में किसी पद से नवाजा है।

ईडी के छापों से थे परेशान

इसी प्रकार पूर्व मंत्री राजेंद्र यादव भी जोशी व गहलोत के साथ ही सचिन पायलट के भी नजदीकी रहे हैं। इसी कारण उन्हें गहलोत सरकार में मंत्री बनाया गया था। वह भी पूरे पांच साल मंत्री रहे थे।

मंत्री रहने के दौरान ही ईडी और आयकर विभाग ने मिड-डे-मील सप्लाई में घोटाला करने के आरोप में उनके यहां पर छापे मारे थे। 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले वह भी भाजपा में शामिल हो गए थे।

लेकिन उनको भी भाजपा ने हाशिए पर रखा हुआ है। हालांकि कुछ जानकारों के अनुसार वह केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के जरिए भाजपा सरकार में पद पाने की जुगाड़ में लगे हैं।

परेशान होकर लौटे कई नेता

अलग-अलग कारणों से कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए कुछ कांग्रेस नेता लंबे समय तक भाजपा में नहीं रह पाए। वे वापस कांग्रेस में लौट आए हैं।

इनमें प्रमुख रुप से पूर्व मंत्री व दिग्गज आदिवासी नेता महेंद्रजीत सिंह मालवीया हैं। मालवीय बागीदौरा से कांग्रेस विधायक थे। फरवरी 2024 में उन्होंने विधायक पद से इस्तीफा देकर कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थामा था। भाजपा ने उन्हें बांसवाड़ा से लोकसभा चुनाव में प्रत्याशी भी बनाया था। लेकिन वह भारत आदिवासी पार्टी के प्रत्याशी राजकुमार रौत से चुनाव हार गए।

मालवीय के इस्तीफे से रिक्त हुई बागीदौरा विधानसभा सीट पर हुए उप-चुनाव में भी भाजपा का उनके प्रभाव का कोई फायदा नहीं हुआ। उप-चुनाव में भारत आदिवासी पार्टी के जयकृष्ण पटेल चुनाव जीत गए। इसके बाद भाजपा ने उन्हें दरकिनार कर दिया। अंतत: वह कांग्रेस में वापिस लौट आए।

इसी प्रकार पूर्व सांसद व विधायक खिलाडीलाल बैरवा लोकसभा चुनाव 2024 से पहले भाजपा में शामिल हुए थे। लेकिन करीब चार महीने बाद ही उन्होंने भाजपा से इस्तीफा दे दिया था। बैरवा का कहना था कि वह स्वयं को भाजपा की विचारधारा से नहीं जोड़ पाए।

यह​ भी लौटै कांग्रेस में

विधानसभा चुनाव में बागी होकर चुनाव लड़ने वाले कुछ नेताओं को पार्टी में वापस ले लिया गया है। इनमें पूर्व मंत्री वीरेंद्र बेनीवाल, बाड़मेर के पूर्व जिला अध्यक्ष फतेह खान, ओम बिश्नोई, सुनील परिहार और कामां से निर्दलीय प्रत्याशी रहे मुख्तार जैसे नाम शामिल हैं। इनके अलावा बाड़मेर के अमीन खान व मेवाराम जैन भी कांग्रेस में वापिस शामिल हो चुके हैं।

यह पूर्व कांग्रेसी नेता अभी भी भाजपा में

पूर्व मंत्री लालचंद कटारिया, राजेंद्र यादव, पूर्व मंत्री और आदिवासी नेता महेंद्रजीत सिंह मालवीय, पूर्व विधायक रिछपाल मिर्धा व उनके बेटे पूर्व विधायक विजयपाल मिर्धा भाजपा में अपने राजनीतिक भाग्य उदय की इंतजार में हैं।

इसी तरह पूर्व विधायक आलोक बेनीवाल, कांग्रेस सेवादल के पूर्व प्रमुख सुरेश चौधरी, अजमेर लोकसभा क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी रिजू झुनझुनवाला, पूर्व विधायक सुभाष मील और पूर्व विधायक गिरिराज सिंह मलिंगा भाजपा में पद के लिए छटपटा रहे हैं।

भाजपा में आए नेताओं की स्थिति को देखें तो उन्हें लंबे समय भी दल बदलने का फायदा नहीं मिला है। वे पार्टी में किनारे हो गए हैं।

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