छह साल से जेल में था बंद, जमानत मिली, हाई कोर्ट बोला, यह न्यायिक प्रक्रिया की विफलता का मामला

Mukesh Sharma | Feb 04, 2026, 15:11 IST
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rajasathana
Photograph: (the sootr)

राजस्थान संजीवनी क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसायटी के तत्कालीन चैयरमेन शैतान सिंह को जमानत मिल गई है। वह घोटाले के मामले में छह साल से जेल में बंद था।

News In Short

  • 6 साल से ट्रायल के इंतजार में जेल में बंद आरोपी को हाईकोर्ट से मिली जमानत।
  • संजीवनी क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसायटी मामले में हुआ था गिरफ्तार
  • आरोपी पर आम जनता से करोडों रुपए ठगने के हैं आरोप
  • 2019 से जेल में, 2020 में जांच पूरी लेकिन,अब तक आरोप तय नहीं
  • मामले में 12 आरोपियों को पहले ही मिल चुकी है जमानत

News In Detail

राजस्थान में छह साल से ट्रायल के इंतजार में जेल में बंद एक व्यक्ति को हाई कोर्ट से जमानत मिल गई है। हाई कोर्ट ने इस मामले में टिप्पणी की कि 7 साल तक की सजा के मामले में आरोपी को बिना ट्रायल के 6 साल तक जेल में रखना न्यायिक प्रक्रिया की विफलता है। अदालत ने इसे स्वतंत्रता के अधिकार का घोर उल्लंघन बताया है।

यह तो खतरनाक संकेत है

जस्टिस अनिल कुमार उपमन ने इस टिप्पणी के साथ करोड़ों रुपए के घोटाले के आरोपी संजीवनी क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसायटी के तत्कालीन चैयरमेन शैतान सिंह को बेल दे दी। उन्होंने कहा कि जब न्यायिक प्रक्रिया अपने आप में सजा हो जाए तो यह कानून का राज के लिए खतरनाक संकेत है ।

अधिकतम सजा 7 साल और 6 साल से जेल में

आरोपी के एडवोकेट राजीव सुराणा ने अदालत को बताया कि आरोपी शैतान सिंह के खिलाफ जिन धाराओं में चार्जशीट पेश की गई है, उसमें अधिकतम 7 साल की सजा का प्रावधान है। आरोपी 20 सितंबर 2019 से जेल में है। मामले में एसओजी साल 2020 में जांच पूरी कर चुकी है।

आरोपी से किसी प्रकार की बरामदगी भी नहीं हुई है। सह अभियुक्त देवी सिंह सहित 12 आरोपियों को पहले ही जमानत मिल चुकी है। आरोपियों के खिलाफ अब तक मामले में अभी तक आरोप तक तय नहीं हुए है। ऐसे में ट्रायल में समय लगेगा।

आरोपी पक्ष देरी की वजह

आरोपी शैतान सिंह की जमानत याचिका के विरोध में सरकार की ओर से कहा गया कि ट्रायल में देरी का कारण आरोपी स्वयं हैं। क्योंकि, वह आरोप तय करने के मुद्दे पर बहस के लिए लगातार समय मांग रहे हैं।

आरोपी पक्ष की ओर से दलीलें देने के लिए कम से कम 60 बार सुनवाई स्थगित करने की मांग हुई है। आरोपी आदतन अपराधी है। उसके खिलाफ 38 अन्य मामले दर्ज हैं। मामला करोड़ों रुपए के घोटाले से संबंधित है। इसलिए याचिकाकर्ता को जमानत का लाभ नहीं दिया जाए।

सजा से पहले सजा न्याय नहीं

दोनों पक्ष की सुनवाई के बाद अदालत ने इस मामले को न्यायिक प्रक्रिया की विफलता का गंभीर मामला बताया है। कोर्ट ने कहा कि किसी भी आरोपी को तब तक दोषी नहीं माना जा सकता, जब तक कि कानूनी रुप से उसका अपराध साबित ना हो जाए। ऐसे में उसे सालों तक जेल में बंद रखना वा​स्तविकता में सजा देने के समान है और यह संविधान की मूल भावना के विपरीत है।

सिर्फ आरोपी ही ट्रायल में देरी का दोषी नहीं

हाई कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि ट्रायल में देरी का भार अकेले आरोपी पर नहीं डाला जा सकता। विशेषकर तब, जब रिकॉर्ड से पता चल रहा हो कि अभियोजन की मुकदमे को आगे बढ़ाने में जरुरी तत्परता नहीं दिखा रहा हो।

यह था पूरा मामला

संजीवनी क्रेडिट कंपनी सोसायटी राजस्थान (मुख्यतः मराठा-जोधपुर) में लगभग ₹950 करोड़ से अधिक की हेराफेरी का मामला उजागर हुआ था। इस मामले में करीब 1.5 लाख से अधिक ग्राहकों को उच्च रिटर्न का लालच देकर उनसे निवेश कराया। यह राशि फिक्स्ड इंक (एफडी) के नाम पर ली गई। फिर उसे फर्जी लोन के तौर पर दिखाया। स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) ने अब तक इस मामले में कई लोगों को गिरफ्तार किया है।

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