घोटाले पर एक्शन नहीं होने पर हाई कोर्ट दिखा सख्त, तीन दिन में मांगी अफसरों की सूची

Mukesh Sharma | Mar 09, 2026, 20:18 IST
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Photograph: (the sootr)

राजस्थान हाई कोर्ट ने आईटी विभाग में करोड़ों के घोटाले पर एक्शन नहीं होने पर सख्त रुख दिया। कोर्ट में हाजिर एसीबी डीआईजी ने आश्वस्त किया कि वे अगली सुनवाई में नामों का खुलासा कर देंगे।

News In Short

  • राजस्थान हाई कोर्ट ने आईटी विभाग में घोटाले को लेकर दिखाया सख्त रुख।
  • हाई कोर्ट ने एसीबी डीआईजी से 3 दिन में मांगी अफसरों की सूची।
  • घोटाले की जांच में देरी पर हाई केार्ट ने जताई नाराजगी
  • याचिकाकर्ता ने अभी तक एक्शन नहीं करने पर उठाए सवाल।
  • कोर्ट बोला, चाहो तो सुप्रीम कोर्ट जाओ लेकिन भ्रष्टाचार नहीं होगा बर्दाश्त

News In Detail

राजस्थान हाई कोर्ट ने आईटी विभाग में करोड़ों के घोटालों पर एसीबी के एक्शन नहीं करने पर नाराजगी जताई है। जस्टिस अशोक कुमार जैन ने कोर्ट ने हाजिर हुए एसीबी के डीआईजी आनंद शर्मा को तीन दिन में भ्रष्टाचार के जिम्मेदार अधिकारियों की सूची पेश करने को कहा है।

जांच में देरी पर नाराज़गी

याचिकाकर्ता डॉ. टीएन शर्मा की ओर से एडवोकेट पूनम चंद भंडारी ने कोर्ट को बताया कि 6 सितंबर 2024 को दिए गए कोर्ट के आदेश की अब तक पालना नहीं की गई है। उन्होंने बताया कि याचिकाकर्ता ने दस्तावेजों सहित कई शिकायतें एसीबी में दर्ज कराई हैं। दो मार्च, 2026 को भी ई-मेल के माध्यम से सभी दस्तावेज भेजे गए, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

अदालत ने कहा-जिम्मेदारों पर होगी सख्ती

सुनवाई के दौरान एसीबी की ओर से एएजी भुवनेश शर्मा ने कार्रवाई के लिए चार सप्ताह का समय मांगा। अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि यदि आदेश से असंतुष्ट हैं तो सुप्रीम कोर्ट जा सकते हैं, लेकिन भ्रष्टाचार को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अदालत ने यह भी कहा कि अगर जांच अधिकारी भ्रष्टाचारियों को सहयोग करेगा तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।

कई परियोजनाओं में बड़े घोटालों के आरोप

याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि कई परियोजनाओं में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। ईपीडीएस प्रोजेक्ट में कथित तौर पर फर्जी हस्ताक्षरों से कार्य संतुष्टि प्रमाण पत्र जारी कर करोड़ों रुपये का भुगतान उठा लिया गया। राजनेट परियोजना में 17,750 डिवाइस लगाने के नाम पर भुगतान किया गया, जबकि तीन साल में केवल 1,750 डिवाइस ही लगाए गए। डिजिटल पेमेंट किट में 8,500 डिवाइस खरीदी गईं, जिनमें से आधी भी उपयोग में नहीं आईं।

13 मार्च तक नामों का खुलासा

सुनवाई के दौरान कोर्ट में उपस्थित एसीबी के डीआईजी आनंद शर्मा ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि 13 मार्च तक इन मामलों में शामिल अधिकारियों के नाम कोर्ट में पेश कर दिए जाएंगे। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को भी सभी मामलों का संक्षिप्त विवरण तैयार कर पेश करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 13 मार्च को होगी।

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