हाई कोर्ट के दो जज भी आवारा कुत्तों के हुए शिकार, एक तो रीढ़ की चोट से जूझ रहे
Mukesh Sharma | Jan 07, 2026, 20:15 IST
Photograph: (The Sootr)
सुप्रीम कोर्ट में आवारा कुत्तों के मामले में सुनवाई जारी है। सुनवाई में बताया गया कि राजस्थान के दो जज भी आवारा कुत्तों के शिकार हुए। इनमें एक जज अभी भी रीढ़ की हड्डी की चोट से जूझ रहे हैं।
Jaipur: सुप्रीम कोर्ट में आवारा कुत्तों के मामले पर बुधवार को सुनवाई हुई। इस दौरान कोर्ट ने कहा कि राजस्थान हाई कोर्ट के दो जज आवारा कुत्तों का शिकार हुए हैं। इनमें से एक जज तो अभी भी रीढ़ की हड्डी की चोट से जूझ रहे हैं।
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जस्टिस विक्रमनाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन.वी.अंजारिया की बैंच ने कहा, आज हम सबको समय देंगे। किसी को शिकायत ना रहे कि उसे नहीं सुना गया। पहले पीड़ितों को, फिर डॉग लवर्स को सुना जाएगा। इस मामले में गुरुवार को फिर सुनवाई होगी।
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शीर्ष कोर्ट ने स्टेट हाइवे,नेशनल हाइवे और एक्सप्रेस-वे से सभी मवेशियों और आवारा पशुओं को हटाने के निर्देश दिए थे। बुधवार को एमिकस क्यूरी गौरव अग्रवाल ने इस मामले में रिपोर्ट पेश की। उन्होंने बताया कि नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया को एसओपी तैयार करने के लिए कहा गया था। उन्होंने एसओपी तैयार भी कर ली है। कोर्ट को बताया गया कि एनएचएआई के अनुसार 1400 किलोमीटर का संवेदनशील क्षेत्र है। इसकी देखभाल राज्य सरकार को करनी होगी।
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याचिकाकर्ता की ओर से एडवोकेट कपिल सिब्बल ने कहा कि एनएचएआइ के समान ही रेलवे मंत्रालय को भी इसमें शामिल किया जाना चाहिए। क्योंकि, रेलवे स्टेशन पर भी कुत्तों के काटने से घायल होने की घटनाएं सामने आ रही हैं। इस पर जस्टिस संदीप मेहता ने बताया कि रेलवे ने तो इन्फ्रारेड ट्रैकिंग का समाधान निकाला है।
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सुनवाई के दौरान सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने कहा कि यदि वहां कोई कुत्ता है तो सेंटर को कॉल कर सकते हैं। वे कुत्ते की नसबंदी कर देंगे, फिर उसको वापस छोड़ दिया जाएगा। इस पर जस्टिस संदीप मेहता ने तंज कसते हुए कहा कि हां फिर एक ही चीज रह जाएगी कि कुत्तों की काउंसलिंग की जाए कि वो किसी को ना काटे।
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कपिल सिब्बल ने जस्टिस संदीप मेहता की टिप्पणी पर कहा, मुझे लगता है कि यह मजाकिया अंदाज में कहा गया है। यदि हमें दिक्कत है तो इसका अर्थ यह तो नहीं है कि हम क्रूर हो जाएं। जस्टिस मेहता ने कहा कि यह सिर्फ काटने की बात नहीं है, बल्कि कुत्तों के कारण होने वाली दुर्घटनाओं की भी बात है। जस्टिस मेहता ने सवाल उठाया कि आप कैसे पता कर सकते हैं कि सुबह-सुबह किस कुत्ते का क्या मूड है! आपको पता ही नहीं होता।
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एमिकस क्यूरी ने कोर्ट को बताया कि राज्य कोर्ट के आदेश के पालन का प्रयास कर रहे हैं। लेकिन, शेल्टर होम और स्टरलाइजेशन सेंटर का अभाव है। आदेश के अनुसार मवेशियों और आवारा कुत्तों को शेल्टर में रखने का निर्देश दिया है। इसके लिए बुनियादी ढांचे का विकास करना होगा।
उन्होंने कहा कि आवारा कुत्तों की आबादी को कंट्रोल करने के लिए पहले मेल डॉग्स को पहले स्टरलाइज किया जाए। उन्होंने यह भी बताया कि एबीसी सेंटर में भी मैन पावर की जरूरत होगी। सभी राज्यों को भी हलफनामे देने थे, लेकिन अभी तक सिर्फ 10 राज्यों के हलफनामे ही आए है। कोर्ट के पूछने पर उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश,यूपी,कर्नाटक और पंजाब जैसे बड़े राज्यों और सिक्किम जैसे छोटे राज्यों ने हलफनामे नहीं दिए है।
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कोर्ट ने कहा, सबको सुनेगें
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हाईवे से मवेशियों को हटाने पर रिपोर्ट पेश
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रेलवे मंत्रालय को भी शामिल करने की मांग
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फिर तो कुत्तों की काउंसलिंग हो कि वे किसी को ना काटें
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कैसे पता करें कि सुबह-सुबह कुत्ते का क्या मूड है !
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शेल्टर होम और स्टरलाइजेशन सेंटर का अभाव
उन्होंने कहा कि आवारा कुत्तों की आबादी को कंट्रोल करने के लिए पहले मेल डॉग्स को पहले स्टरलाइज किया जाए। उन्होंने यह भी बताया कि एबीसी सेंटर में भी मैन पावर की जरूरत होगी। सभी राज्यों को भी हलफनामे देने थे, लेकिन अभी तक सिर्फ 10 राज्यों के हलफनामे ही आए है। कोर्ट के पूछने पर उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश,यूपी,कर्नाटक और पंजाब जैसे बड़े राज्यों और सिक्किम जैसे छोटे राज्यों ने हलफनामे नहीं दिए है।
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मुख्य बिन्दु
- राजस्थान हाई कोर्ट के जज आवारा कुत्तों के शिकार हुए
- मवेशियों को हाईवे से हटाने के लिए एसओपी तैयार
- कुत्तों के लिए शेल्टर होम और स्टरलाइजेशन सेंटर की आवश्यकता
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