राजस्थान मंत्रियों की संपत्ति घोषणा : 13 साल से जनता के सामने हिसाब नहीं, जानिए पूरा मामला
Mukesh Sharma | Jun 01, 2026, 08:00 IST
rajasthan mantri sampatti ghoshna 13 saal
राजस्थान में 13 साल से किसी मंत्री ने सालाना संपत्ति घोषणा नहीं की है। भजनलाल सरकार को 29 महीने हो चुके हैं। सभी 25 मंत्री करोड़पति हैं, लेकिन हिसाब नहीं देते।
राजस्थान सरकार के कर्मचारी अगर 30 जनवरी तक अपनी संपत्ति का ब्यौरा नहीं देते, तो उनका प्रमोशन रुक जाता है। इंक्रीमेंट बंद हो जाता है। लेकिन उन्हीं कर्मचारियों के बॉस यानी मंत्री, पिछले 13 साल से अपनी संपत्ति का एक रुपया भी जनता को नहीं बता रहे। और कोई कुछ नहीं बोल रहा….
pm modi और उनके मंत्रियों की संपत्ति की घोषणा देखने के लिए क्लिक करें
विडंबना देखिए कि सूबे में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में भाजपा सरकार को बने 29 महीने पूरे हो चुके हैं। वहीं, अब तक किसी भी मंत्री ने अपनी संपत्ति की सार्वजनिक घोषणा करने की जहमत नहीं उठाई है।
जिस आदर्श आचार संहिता को राजनीति में नैतिकता बनाए रखने के लिए लागू किया गया था। वह पिछले 13 सालों से राजस्थान की सियासत में कचरा पेटी की शोभा बढ़ा रही है।
क्या है मंत्रियों की संपत्ति घोषणा की आचार संहिता और कैसे हुई शुरुआत?
- साल 2009 की पहल: तत्कालीन प्रधानमंत्री दिवंगत डॉ. मनमोहन सिंह ने केंद्र और राज्यों के मंत्रियों के लिए एक विशेष आदर्श आचार संहिता (Code of Conduct) बनाई थी।
- क्या है नियम: इस संहिता के अनुसार मंत्रियों को पद ग्रहण करने के तुरंत बाद (अधिकतम दो महीने के भीतर) अपनी और अपने परिवार के सदस्यों की चल-अचल संपत्ति (Assets and Liabilities) तथा व्यापारिक हितों (Business Interests) का पूरा विवरण देना अनिवार्य है।
- 31 अगस्त की डेडलाइन: इसके बाद हर साल 31 अगस्त तक मंत्रियों को प्रधानमंत्री (केंद्र के मामले में) या मुख्यमंत्री (राज्यों के मामले में) को पिछले वित्तीय वर्ष का संपत्ति घोषणा पत्र सौंपना होता है।
- महत्वपूर्ण तथ्य: यह पूरी व्यवस्था राजनीति में नैतिकता और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए एक उपाय के तौर पर शुरू की गई थी। इसके लिए कोई वैधानिक कानून नहीं बनाया गया था। यानी मंत्रियों के लिए ऐसा करना कोई कानूनी बाध्यता नहीं बल्कि एक नैतिक जिम्मेदारी है।
PM मोदी ने सेट किया बेंचमार्क, पर राजस्थान में रीति भूली सरकार
पीएम मोदी ने साफ निर्देश दिए कि सभी केंद्रीय मंत्रियों को हर साल 31 अगस्त तक अपनी संपत्ति सार्वजनिक करनी होगी। तब से लेकर आज तक स्वयं पीएम मोदी और उनकी टीम हर साल अपनी संपत्तियों का ब्यौरा देश के सामने पारदर्शी तरीके से रख रहे हैं।
लेकिन दिल्ली से जयपुर आते-आते यह पारदर्शिता कहीं खो जाती है। राजस्थान में भाजपा और कांग्रेस दोनों ही प्रमुख दलों के मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों ने इस आचार संहिता से दूरी बना ली है।
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पूर्व मंत्रियों का डेटा भी गायब!
यानी सरकार वर्तमान तो छोड़िए, पूर्व मंत्रियों की संपत्तियों की पुरानी जानकारी भी जनता के साथ साझा करने के मूड में नहीं है। सच तो यह है कि 2013 के बाद से राजस्थान के किसी भी मुख्यमंत्री ने अपने मंत्रियों से इस तरह का कोई ब्यौरा मांगा ही नहीं।
अफसरों और कर्मचारियों के लिए डंडा, मंत्रियों के लिए राहत?
दोनों ही कानूनी तौर पर लोक सेवक (Public Servant) की परिभाषा में आते हैं, लेकिन नियमों में जमीन-आसमान का अंतर है:
गजेटेड ऑफिसर्स (राजपत्रित अधिकारी) पर सख्ती:
- राज्य के सभी राजपत्रित अधिकारियों को हर साल अपनी संपत्तियों का सालाना ब्यौरा देना अनिवार्य है।
- अधिकारियों को न सिर्फ संपत्ति बतानी होती है, बल्कि संपत्ति खरीदने के लिए पैसे का सोर्स (Source of Fund) भी उजागर करना पड़ता है।
- इस पैसे का सोर्स अधिकारी के Income Tax Return (ITR) से मैच होना जरूरी है। राज्य के मुख्य सचिव (Chief Secretary) खुद हर साल अपनी संपत्ति का ब्यौरा सरकार को देते हैं और इसे सार्वजनिक भी किया जाता है।
आम कर्मचारियों पर भी शिकंजा
- पिछले साल राजस्थान सरकार ने नियमों का दायरा बढ़ाते हुए चतुर्थ श्रेणी से लेकर सभी स्तर के कर्मचारियों के लिए हर साल 30 जनवरी तक अपनी और परिजनों की संपत्ति का विवरण देना अनिवार्य कर दिया है।
- जुर्माना या कार्रवाई: यदि कोई कर्मचारी यह ब्यौरा नहीं देता है, तो उसका प्रमोशन (विभागीय पदोन्नति) और सालाना इंक्रीमेंट (वेतन वृद्धि) रोकने की सख्त चेतावनी दी गई है।
- राजनीतिक विश्लेषकों का मत: विश्लेषक मानते हैं कि यह पूरी तरह दोहरे मापदंड की नीति है। अफसरों और कर्मचारियों के लिए सेवा नियम बने हुए हैं जिसके तहत कानूनी बाध्यता है, लेकिन मंत्रियों के लिए कोई कानून या कड़ा नियम न होना ही इस लापरवाही की मुख्य वजह है।
चुनाव के समय के शपथ पत्र
जानिए कितने अमीर हैं राजस्थान के मंत्री?
| राजस्थान कैबिनेट का वेल्थ एनालिसिस | विवरण |
| करोड़पति दर्जा | राजस्थान सरकार के सभी 25 के 25 मंत्री (100%) करोड़पति हैं। |
| औसत संपत्ति | वर्तमान कैबिनेट के मंत्रियों की औसत संपत्ति 7.08 करोड़ रुपए है। |
| सबसे अमीर मंत्री | गजेंद्र सिंह खींवसर (कुल संपत्ति: 29.07 करोड़ रुपए)। |
| सबसे कम संपत्ति | बाबूलाल खराड़ी (कुल संपत्ति: 1.24 करोड़ रुपए)। |
| सबसे ज्यादा कर्ज (देनदारी) | संजय शर्मा (कुल कर्ज: 4.91 करोड़ रुपए)। |
कुछ और दिलचस्प और हैरान करने वाले आंकड़े
- सबसे अधिक निजी आय: प्रदेश की उप-मुख्यमंत्री दिया कुमारी की वार्षिक आय सबसे अधिक 2.88 करोड़ रुपए है, जो मुख्य रूप से उनके व्यापार, वेतन और भत्तों से आती है।
- शून्य (0) आय का दावा: राज्य के मंत्री जवाहर सिंह बेढम ने अपने चुनावी हलफनामे में स्वयं की वार्षिक आय 0 रुपए घोषित की है।
- घाटे के सौदागर: कैबिनेट मंत्री कन्हैयालाल ने हलफनामे में खुद को 34 लाख 43 हजार 385 रुपए के घाटे में दर्शाया है।
- मुख्यमंत्री की कमाई: सूबे के मुखिया भजन लाल शर्मा की स्वयं की वार्षिक आय छह लाख 86 हजार 660 रुपए थी, जो उनकी प्रोपराइटरशिप फर्म, मकान किराया, बैंक ब्याज और रेल मंत्रालय से मिलने वाले वेतन से होती है।
मंत्रियों की जुबानी: हमें तो पता ही नहीं, सीएम कहेंगे तो दे देंगे
पहले एक बार संपत्ति का विवरण दिया है। मुझे फाइल देखकर बताना पड़ेगा कि यह विवरण किस वर्ष दिया गया था। - जोगाराम पटेल, संसदीय कार्य तथा विधि व न्याय मंत्री हमें इस संबंध में न तो कोई विशेष जानकारी है और न ही हर साल संपत्ति की जानकारी देने को कहा गया है। मैं इस संबंध में पूरी डिटेल पता करूंगा। - बाबूलाल खराड़ी, जनजाति विकास मंत्री हमें इस नियम या व्यवस्था के बारे में बताया नहीं गया है। जिस दिन भी मुख्यमंत्री जी हमसे कहेंगे, हम अपनी संपत्ति की पूरी जानकारी दे देंगे। - अविनाश गहलोत, सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्री
पूर्व मंत्री बोले: जानकारी मांगी तो जरूर दी होगी
अब तीन साल बाद मुझे याद नहीं है। यदि सीएम ने जानकारी मांगी तो अवश्य ही दी होगी। अगर जानकारी दी होगी तो मेरे पीए साहब ने दी होगी। - भजनलाल जाटव, पूर्व मंत्री, कांग्रेस सरकार, राजस्थान एक बार सीएम ने सभी मंत्रियों से संपत्ति विवरण मांगा था। सभी मंत्रियों ने यह जानकारी दी भी थी। हालांकि मुझे यह याद नहीं है कि यह किस वर्ष की बात है। यह तय है कि हमसे जानकारी मांगी थी और हमने दी भी थी। - हेमाराम चौधरी, पूर्व मंत्री, कांग्रेस सरकार, राजस्थान मुझे अभी याद नहीं है कि मंत्री रहने के दौरान इस प्रकार की डिटेल कभी दी थी या नहीं। यदि दी भी होगी तो यह मेरे निजी सहायक को पता होगा। उनसे पूछकर ही बता सकती हूं। - शकुंतला रावत, पूर्व मंत्री, कांग्रेस सरकार, राजस्थान
संपत्ति का हिसाब देने से आएगी पारदर्शिता: विश्लेषक
जनप्रतिनिधियों को नैतिकता के नाते हर साल अपनी संपत्तियों की घोषणा करनी चाहिए। हालांकि यह सही है कि नामांकन के समय सभी प्रत्याशी इस संबंध में हलफनामा देते हैं। वैसे, आदर्श आचार संहिता के तहत हर साल जानकारी देना कानूनी बाध्यता नहीं है। लेकिन ऐसा करने से न केवल राजनीति में पारदर्शिता बनी रहेगी, बल्कि उनकी इमेज भी बेहतर होगी।' - राजीव जैन, राजनीतिक विश्लेषक और वरिष्ठ पत्रकार
केंद्र में बैठे हमारे लोकसेवक और सरकार में उच्च पदों पर आसीन व्यक्तियों द्वारा अपनी आय और संपत्ति का विवरण सार्वजनिक करना अत्यंत ही सराहनीय कदम है। इससे पारदर्शिता और जवाबदेही का उच्च आदर्श स्थापित होगा। अगर इसकी पहल राजस्थान में की जाती है तो यह अन्य राज्यों के लिए भी मिसाल होगा। - निसार अहमद, स्टेट को-ऑर्डिनेटर, बजट अध्ययन केंद्र, जयपुर
नैतिकता के लिए जरूरी है स्वेच्छा से पारदर्शिता
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि कानून का न होना एक बहाना हो सकता है। वहीं, जब देश के पीएम खुद को प्रधान सेवक कहकर हर साल अपनी संपत्ति सार्वजनिक कर सकते हैं, तो राज्यों के मंत्रियों को भी उसी राजनीतिक नैतिकता का परिचय देना चाहिए।
कर्मचारियों के इंक्रीमेंट रोकने वाली सरकार को यह सोचना होगा कि जनता की अदालत में पारदर्शिता का पैमाना सबके लिए एक समान होना चाहिए। अब देखना यह है कि क्या मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा दिल्ली की तर्ज पर जयपुर में भी अपने मंत्रियों को पाई-पाई का हिसाब देने का आदेश जारी करते हैं या नहीं?
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FAQ
- राजस्थान में मंत्रियों की संपत्ति घोषणा आखिरी बार कब हुई थी?
2009 से 2013 के बीच तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के कार्यकाल में राजस्थान में मंत्रियों की संपत्ति सार्वजनिक होती थी। 2013 के बाद से अब तक किसी भी सरकार ने यह घोषणा नहीं करवाई। - राजस्थान में मंत्री संपत्ति घोषणा न करें तो क्या कार्रवाई होती है?
अभी कोई कानूनी दंड नहीं है। यह सिर्फ आदर्श आचार संहिता का हिस्सा है, कोई कानून नहीं। इसलिए न कोई FIR होती है, न जुर्माना लगता है, न पद जाता है। - क्या राजस्थान के मंत्रियों की संपत्ति की कोई जानकारी मिल सकती है?
चुनाव के समय निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर हर उम्मीदवार का हलफनामा सार्वजनिक होता है। 2023 के हलफनामों के मुताबिक सभी 25 मंत्री करोड़पति हैं और औसत संपत्ति 7.08 करोड़ रुपए है। लेकिन उसके बाद का कोई ब्यौरा उपलब्ध नहीं है।
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