सरिस्का में सफारी के नाम पर विनाश, हजारों पेड़ कटे, बाला किला की दीवार ढहाई
Ashish Bhardwaj | Apr 22, 2026, 13:43 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान के सरिस्का बाघ अभ्यारण्य के बफर ज़ोन में अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। जंगल सफारी के नाम पर तैयार किए गए नए रास्ते ने न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचाया है, बल्कि ऐतिहासिक धरोहर को भी क्षति पहुंचाई है।
News In Short
- राजस्थान के सरिस्का टाइगर रिजर्वसरिस्का टाइगर रिजर्व में नई जंगल सफारी के लिए बनाया गया रास्ता।
- सफारी मार्ग बनाने के लिए हजारों हरे-भरे पेड़ों की गई कटाई।
- 400 साल पुराने ऐतिहासिक बाला किले की सुरक्षा दीवार (परकोटा) को तोड़ा गया।
- पर्यावरण प्रेमियों ने इसे प्रशासनिक आतंकवाद करार देते हुए कार्रवाई की मांग की है।
- अधिकारियों की अनभिज्ञता पर उठे सवाल, जांच की मांग।
News In Detail
राजस्थान का प्रसिद्ध सरिस्का बाघ अभ्यारण्य एक बार फिर गलत कारणों से चर्चा में है। सरिस्का के बफर ज़ोन में नई जंगल सफारी शुरू करने के नाम पर वन विभाग ने ऐसी मनमानी की है, जिसने पर्यावरणविदों और इतिहास प्रेमियों को भी आंदोलित कर दिया है।
सफारी के लिए नया रास्ता बनाने की होड़ में न केवल हजारों हरे-भरे पेड़ों की बलि चढ़ा दी गई, बल्कि 400 साल पुराने ऐतिहासिक बाला किला की अभेद्य दीवार को भी आधुनिक मशीनों से छलनी कर दिया गया।
नियमों को ताक पर रखकर बनाया नया मार्ग
400 साल पुराना परकोटा तोड़ा
यह सीधे तौर पर संरक्षित स्मारकों से जुड़े कानूनों का उल्लंघन है। जानकारों का मानना है कि इस तरह के कृत्य में विभाग के निचले स्तर से लेकर उच्च स्तर तक के अधिकारियों की संलिप्तता या मौन स्वीकृति के बिना संभव नहीं है।
पर्यावरण प्रेमियों में भारी आक्रोश
प्रसिद्ध पर्यावरण प्रेमी डॉ. कांति प्रसाद शर्मा ने इस मामले पर कड़ा रुख अख्तियार किया है। उन्होंने इसे प्रशासनिक आतंकवाद करार देते हुए कहा, यह केवल पेड़ों की कटाई नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की हत्या है। ऐतिहासिक धरोहर और प्रकृति के साथ ऐसा खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई नहीं हुई और इस अवैध निर्माण को नहीं रोका गया, तो वे माननीय राजस्थान उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर करेंगे।
अधिकारियों की अनभिज्ञता पर उठे सवाल
हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि बफर ज़ोन में बिना उच्च स्तरीय स्वीकृति के एक पत्थर भी नहीं हिलाया जा सकता, ऐसे में हजारों पेड़ों की कटाई और किले की दीवार का टूटना अधिकारियों के दावों पर सवालिया निशान लगाता है।
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