छत्तीसगढ़ से सशस्त्र नक्सलवाद खत्म, गृहमंत्री विजय शर्मा का आधिकारिक ऐलान
VINAY VERMA | Mar 31, 2026, 17:17 IST
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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के अंत को लेकर बड़ा दावा सामने आया है, जहां गृहमंत्री विजय शर्मा ने राज्य को सशस्त्र नक्सल गतिविधियों से मुक्त बताया। लेकिन 50 साल पुरानी समस्या के 2 साल में खत्म होने पर सवाल भी उठ रहे हैं।
छत्तीसगढ़ में सशस्त्र नक्सलवाद के अंत का बड़ा दावा सामने आया है। गृहमंत्री विजय शर्मा ने 31 मार्च 2026 को प्रेस क्लब में इसकी आधिकारिक घोषणा की। उन्होंने कहा कि राज्य अब सशस्त्र नक्सल गतिविधियों से पूरी तरह मुक्त हो चुका है। इस घोषणा के साथ ही सरकार ने इसे ऐतिहासिक उपलब्धि बताया है।
गृहमंत्री ने पिछले दो वर्षों के आंकड़े पेश करते हुए बताया कि करीब 3000 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर पुनर्वास लिया। वहीं 2000 नक्सलियों को गिरफ्तार किया गया। इसके अलावा 536 नक्सली मुठभेड़ों में मारे गए। सरकार का दावा है कि इन कार्रवाइयों से नक्सल संगठन का 99% ढांचा खत्म हो चुका है।
सरकार के इस दावे के बाद लोगों के मन में सवाल उठ रहे हैं। 50 साल पुरानी समस्या आखिर 2 साल में कैसे खत्म हो गई? क्या जमीनी हकीकत भी यही है या यह केवल आंकड़ों का खेल है? विशेषज्ञ मान रहे हैं कि असली स्थिति का आकलन आने वाले समय में होगा।
विजय शर्मा ने बताया कि दिसंबर 2023 में सरकार बनने के बाद बस्तर में बड़ी बैठक हुई। इसमें देशभर के डीजीपी और केंद्रीय एजेंसियों ने हिस्सा लिया। 24 अगस्त 2024 को दूसरी बैठक में लक्ष्य तय किया गया कि 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद समाप्त करना है। इसके बाद उसी रणनीति पर लगातार काम हुआ।
सरकार के मुताबिक, सीआरपीएफ को विशेष टास्क दिया गया था। ऑपरेशनों को टेक्निकली मजबूत बनाया गया। इंटेलिजेंस और डिजिटल ट्रैकिंग का इस्तेमाल बढ़ाया गया। इसी वजह से ऑपरेशन सटीक और प्रभावी हुए। सरकार का दावा है कि इसी रणनीति ने नक्सल नेटवर्क को तोड़ दिया।
गृहमंत्री ने कहा कि इस अभियान में सबसे बड़ा योगदान बस्तर की जनता का रहा। लोगों ने ‘लाल आतंक’ से दूरी बनाने का फैसला किया। पंचायत प्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और पत्रकारों ने भी नक्सलियों को मुख्यधारा में लाने में भूमिका निभाई। कई पत्रकारों ने अपने नंबर जारी कर पुनर्वास में मदद की।
विजय शर्मा ने कांग्रेस पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष से सहयोग की उम्मीद थी, लेकिन इसके बजाय लगातार सवाल और आरोप लगाए गए। यहां तक कि कुछ नेताओं ने एनकाउंटर पर भी सवाल उठाए, जिससे अभियान प्रभावित हुआ।
सरकार के मुताबिक, अब छत्तीसगढ़ में सक्रिय नक्सलियों की संख्या बेहद कम रह गई है। करीब 25-30 लोग ही बचे हैं, जो सक्रिय नहीं हैं। कुछ लोग वर्दी छोड़कर गांवों में वापस लौट चुके हैं। हालांकि कांकेर के नॉर्थ एरिया में कुछ गतिविधियां अभी भी चिन्हित की गई हैं।
सबसे बड़ा सवाल अब यही है कि क्या यह शांति स्थायी होगी? चुनाव के बाद जमीनी हालात कैसे रहेंगे? क्या नक्सलवाद पूरी तरह खत्म हुआ है या फिर यह अस्थायी विराम है? आने वाले महीनों में सरकार के दावे की असली परीक्षा होगी।
गृहमंत्री ने कहा कि बस्तर के लोगों में अब आजादी जैसा माहौल है। दशकों से भय और हिंसा के बीच जी रहे लोगों को अब राहत मिली है। हालांकि असली सफलता तभी मानी जाएगी जब यह शांति लंबे समय तक कायम रहे और विकास की रफ्तार तेज हो।
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