शिक्षकों के मुद्दे पर अपनी ही सरकार के खिलाफ बीजेपी सांसद दर्शन सिंह चौधरी, केंद्र तक पहुंचाई बात

Amresh Kushwaha | Mar 17, 2026, 10:35 IST
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mp teachers tet compulsory protest bjp mp darshan singh letter
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मध्य प्रदेश में 1.5 लाख शिक्षकों पर TET परीक्षा पास करने का दबाव बढ़ गया है। वहीं, बीजेपी सांसद दर्शन सिंह चौधरी और पूर्व विधायक ने अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

मध्यप्रदेश की राजनीति में इस वक्त एक नया मोड़ आ गया है। मामला शिक्षा विभाग और राज्य के डेढ़ लाख शिक्षकों के भविष्य से जुड़ा है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या दशकों का अनुभव बड़ी योग्यता है या फिर नए दौर की पात्रता परीक्षा?

इसी कशमकश के बीच अब एमपी सरकार अपनी ही पार्टी के भीतर से घिरती नजर आ रही है। होशंगाबाद से बीजेपी सांसद दर्शन सिंह चौधरी ने अपनी ही सरकार के फैसले पर सवाल उठाते हुए शिक्षकों का पक्ष लिया है।

अपनों के ही निशाने पर सरकार

मध्य प्रदेश के करीब एक लाख 50 हजार शिक्षकों पर मंडराते संकट को देखते हुए होशंगाबाद-नरसिंहपुर से लोकसभासांसद दर्शन सिंह चौधरी ने सीधे केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पत्र लिखा है। उन्होंने मांग की है कि सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की जाए।

सांसद का तर्क है कि जिन शिक्षकों ने अपनी जिंदगी के 25 साल से ज्यादा समय शिक्षा को दे दिए, आज उन्हें नौकरी खोने का डर सता रहा है। यह शिक्षक उस समय भर्ती हुए थे जब राज्य सरकार के नियम और वैधानिक प्रावधान (Statutory Provisions) अलग थे, लेकिन अब अचानक पात्रता परीक्षा (TET) अनिवार्य करना उनके साथ अन्याय है।

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पूर्व विधायक ने सरकार को दी चेतावनी

सिर्फ सांसद ही नहीं, बल्कि सुसनेर से भाजपा के पूर्व विधायक मुरलीधर पाटीदार ने भी सीएम मोहन यादव और स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह को कड़े शब्दों में पत्र लिखा है। पाटीदार ने इसे तत्काल निरस्त (Cancel) करने की मांग की है।

उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE Act) में जरूरी संशोधन कर रास्ता नहीं निकाला, तो शिक्षक उग्र आंदोलन करेंगे। पाटीदार ने यहां तक कह दिया कि वे खुद शिक्षकों के साथ सड़कों पर उतरने को तैयार हैं।

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28 मार्च तक चलेगी आर-पार की जंग

इधर, मध्य प्रदेश शासकीय शिक्षक संगठन ने भी कमर कस ली है। संगठन ने 15 मार्च से 28 मार्च तक एक व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाने का निर्णय लिया है। इस दौरान प्रदेश के सभी सांसदों, विधायकों और जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन सौंपकर संसद और विधानसभा में आवाज उठाने का दबाव बनाया जाएगा। शिक्षकों की मांग स्पष्ट है: TET की अनिवार्यता पर रोक लगे या फिर संविधान संशोधन (Constitutional Amendment) के जरिए उन्हें राहत दी जाए।

29 मार्च को भोपाल में महापंचायत

आंदोलन की अगली बड़ी तारीख 29 मार्च तय की गई है। इस दिन राजधानी भोपाल में प्रदेशभर के शिक्षक संगठनों की एक बड़ी बैठक होगी। इस बैठक में शिक्षक संयुक्त मोर्चा के गठन पर मुहर लगेगी। यह मोर्चा भविष्य की आंदोलनात्मक रणनीति और सरकार को घेरने की योजना को अंतिम रूप देगा।

क्यों पैदा हुआ यह संकट?

शिक्षकों और सरकार के बीच इस विवाद की जड़ें नियमों में छिपी हैं। आइए इसे आसान भाषा में समझते हैं:

  • सुप्रीम कोर्ट का निर्देश: कोर्ट ने साफ किया है कि कक्षा 1 से 8 तक के शिक्षकों के लिए टीईटी (TET) अनिवार्य है।
  • नियम की मार: यह प्रावधान आरटीई एक्ट 2009 (RTE Act 2009) और एनसीटीई (NCTE) की 2010 की गाइडलाइन से जुड़ा है।
  • कौन दायरे में है: वे शिक्षक जिनकी सेवानिवृत्ति (Retirement) में 5 साल से ज्यादा का समय बचा है, उन्हें जुलाई-अगस्त 2026 में होने वाली विशेष परीक्षा देनी होगी।
  • फेल हुए तो क्या: विभाग ने परीक्षा पास करने के लिए 2 साल का समय दिया है। असफल होने पर सेवा से मुक्त (Termination) करने का प्रावधान है।
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