5561 किमी ट्रैक पर दुर्घटना रोकने बिछेगा सुरक्षा जाल, 2300 करोड़ रुपए होंगे खर्च
Ashish Bhardwaj | Mar 13, 2026, 17:55 IST
Photograph: (the sootr)
उत्तर पश्चिम रेलवे अपने पूरे रेल नेटवर्क को सुरक्षित करने के लिए स्वीदेशी 'कवच 4.0' प्रणाली लगाएगा। इसके जरिए राजस्थान के रेल मार्ग को 'एंटी-कोलिजन' तकनीक से लैस किया जाएगा।
News In Short
- उत्तर पश्चिम रेलवे (NWR) के पूरे नेटवर्क में लगेगी 'कवच 4.0'।
- 'कवच 4.0' प्रणाली 'एंटी-कोलिजन' (टक्कर रोधी) तकनीक।
- यह सिस्टम संचार नेटवर्क, सिग्नलिंग और लोकोमोटिव तकनीक का है संगम।
- इस सिस्टम को लगाने के लिए रखा गया है 2300 करोड़ रुपये का बजट।
- कवच 4.0' (Kavach 4.0) के सक्रिय होने दुर्घटनाओं पर लगेगा 'ऑटोमैटिक' ब्रेक।
News In Detail
भारतीय रेलवे तकनीक और सुरक्षा के मामले में एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। इसी कड़ी में राजस्थान के रेल यात्रियों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। उत्तर पश्चिम रेलवे (NWR) ने अपने पूरे नेटवर्क को पूरी तरह सुरक्षित बनाने के लिए स्वदेशी रूप से विकसित 'कवच 4.0' (Kavach 4.0) प्रणाली को लागू करने का निर्णय लिया है। लगभग 2300 करोड़ रुपये के बजट वाली इस परियोजना के तहत राजस्थान के रेल मार्ग को 'एंटी-कोलिजन' (टक्कर रोधी) तकनीक से लैस किया जाएगा।
दुर्घटनाओं पर लगेगा 'ऑटोमैटिक' ब्रेक
ऑप्टिकल फाइबर का जाल
नेटवर्क टावर: ट्रेन और स्टेशन कंट्रोल रूम के बीच निर्बाध संचार के लिए ट्रैक के किनारे कुल 250 हाई-टेक टावर लगाए जा रहे हैं। इनमें से 221 टावरों का निर्माण कार्य प्रगति पर है।
ऑप्टिकल फाइबर केबल (OFC): संचार की गति बढ़ाने के लिए 1586 किलोमीटर मार्ग पर ओएफसी बिछाने के टेंडर जारी किए जा चुके हैं, जिनमें से 56 फीसदी काम पूरा भी हो चुका है।
RFID टैग: यह इस तकनीक की 'आंखें' हैं। रेलवे ट्रैक पर हर एक किलोमीटर की दूरी पर RFID (Radio Frequency Identification) टैग लगाए जाएंगे। ये टैग लोकोमोटिव (इंजन) को ट्रेन की सटीक लोकेशन, दिशा और गति की जानकारी देते रहेंगे।
कैसे काम करती है यह जादुई तकनीक
सटीक निगरानी: इंजन में लगा 'लोको कवच' सिस्टम ट्रैक पर लगे RFID टैग से डेटा प्राप्त करता है।
त्वरित चेतावनी: यदि लोको पायलट निर्धारित गति सीमा का उल्लंघन करता है या गलती से रेड सिग्नल पार करने की कोशिश करता है, तो सिस्टम पहले ऑडियो-विजुअल चेतावनी देता है।
स्वचालित हस्तक्षेप: चेतावनी के बाद भी यदि पायलट प्रतिक्रिया नहीं देता, तो कवच सिस्टम खुद ही ट्रेन के ब्रेकिंग सिस्टम को सक्रिय कर देता है और गाड़ी को सुरक्षित दूरी पर रोक देता है।
उत्तर पश्चिम रेलवे की नई पहचान
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