टाटा संस में उत्तराधिकारी की तलाश क्यों अटकी? नोएल टाटा के सवाल से खुला राज

Rajesh Lahoti | Aug 13, 2026, 18:55 IST
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टाटा संस में उत्तराधिकारी की तलाश
टाटा संस में उत्तराधिकारी की तलाश

टाटा संस में उत्तराधिकारी की तलाश पर सवाल उठ रहे हैं। नोएल टाटा ने 2025 में बोर्ड से चंद्रशेखरन के बाद नेतृत्व योजना मांगी थी। अब चेयरमैन बदलने की चर्चा के बीच टाटा समूह के सामने नया नेतृत्व चुनने की चुनौती है।

टाटा समूह में चंद्रशेखरन के जाने की खबर से ज्यादा दिलचस्प कहानी उस सवाल की है जो उनके जाने से कई महीने पहले टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने टाटा संस के बोर्ड के सामने रखा था। सवाल सीधा था-अगर एन. चंद्रशेखरन आगे नहीं रहेंगे तो उनकी जगह कौन आएगा और उसकी तैयारी कहां तक पहुंची? जनवरी 2025 में यह सवाल उठा, फरवरी में दोबारा पूछा गया, लेकिन अंदर से जो जवाब मिला, वह स्पष्ट नहीं था। यही वह बिंदु है जहां से टाटा समूह की उत्तराधिकार की कहानी दिलचस्प हो जाती है। मामला सिर्फ इतना नहीं कि करीब नौ साल बाद चंद्रशेखरन टाटा संस की कमान छोड़ रहे हैं। असली कहानी यह है कि जिस उत्तराधिकारी की तलाश का सवाल टाटा ट्रस्ट्स पहले ही उठा चुका था, उसकी तस्वीर अब तक साफ क्यों नहीं हुई? और अगर तैयारी चल रही थी, तो फिर टाटा संस के बोर्ड के पास कोई स्पष्ट रोडमैप क्यों नहीं था? यही सवाल अब टाटा समूह के सबसे ताकतवर बोर्डरूम के सामने खड़ा है।

नोएल टाटा ने पहले ही भांप लिए थे हालात

अक्टूबर 2024 में रतन टाटा के निधन के बाद जब नोएल टाटा ने टाटा ट्रस्ट्स की कमान संभाली, तब उनके सामने भविष्य में समूह के नेतृत्व का सवाल भी था। टाटा ट्रस्ट्स की टाटा संस में करीब 65 प्रतिशत हिस्सेदारी है। इसलिए टाटा संस के चेयरमैन का उत्तराधिकारी कौन होगा, यह ट्रस्ट्स के लिए कोई सामान्य कॉरपोरेट नियुक्ति नहीं है। जनवरी 2025 में नोएल टाटा ने टाटा संस की नामांकन एवं पारिश्रमिक समिति (NRC) से उत्तराधिकार योजना की जानकारी मांगी। सवाल यह नहीं था कि चंद्रशेखरन आज जा रहे हैं या कल। सवाल था कि अगला नेतृत्व तैयार करने की प्रक्रिया कहां तक पहुंची है। फरवरी में यह सवाल दोबारा उठाया गया, लेकिन मामले से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, इस बार भी कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला। यही वह तथ्य है जो अब पूरी कहानी का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है।

एक तरफ एक्सटेंशन, दूसरी तरफ तलाश

चंद्रशेखरन के कार्यकाल को जुलाई 2025 में एक साल बढ़ाया गया था। टाटा ट्रस्ट्स के प्रमुख न्यासियों ने सेवानिवृत्ति की उम्र से जुड़े नियमों में बदलाव को भी मंजूरी दी थी, जिससे उन्हें कार्यकारी चेयरमैन के तौर पर आगे बने रहने का रास्ता मिला। ऊपर से देखने पर यह टाटा समूह में स्थिरता का फैसला था, लेकिन अंदर की तस्वीर को देखें तो इसी दौर में उत्तराधिकार को लेकर सवाल भी मौजूद था। यानी एक तरफ मौजूदा चेयरमैन को आगे बढ़ाया जा रहा था, दूसरी तरफ यह सवाल भी मौजूद था कि आखिर उनके बाद कौन आएगा। अब चंद्रशेखरन के पद छोड़ने का फैसला सामने आने के बाद वही पुराना सवाल फिर से टाटा संस के बोर्डरूम में लौट आया है-क्या उत्तराधिकारी तैयार है या अब तलाश शुरू होगी?

टाटा संस में यह नियुक्ति इतनी अहम क्यों

टाटा संस को सिर्फ टाटा समूह की एक कंपनी समझना गलती होगी। यह वह होल्डिंग कंपनी है जिसके जरिए टाटा समूह की तमाम बड़ी कंपनियों की रणनीतिक दिशा तय होती है। इसलिए अगला चेयरमैन केवल बोर्ड की एक कुर्सी नहीं संभालेगा। उसके सामने टाटा समूह के कई अरब डॉलर के कारोबार, दर्जनों कंपनियों, बड़े निवेश और भविष्य की रणनीति को एक साथ संभालने की चुनौती होगी। यह चुनौती ऐसे समय आई है जब टाटा समूह खुद बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है।

एयर इंडिया से लेकर डिजिटल कारोबार

टाटा समूह ने पिछले कुछ वर्षों में अपने पुराने कारोबारों के साथ-साथ नए क्षेत्रों में भी बड़े दांव लगाए हैं। एयर इंडिया का अधिग्रहण इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। इसके अलावा टाटा डिजिटल जैसे कारोबारों को भी समूह भविष्य की ग्रोथ के लिए महत्वपूर्ण मानता है। दूसरी तरफ टीसीएस जैसी कंपनियां टाटा समूह की आर्थिक ताकत की रीढ़ हैं। यानी अगले चेयरमैन को एक साथ दो टाटा संभालने होंगे। एक वह टाटा जो दशकों से मजबूत कारोबार चला रहा है और दूसरा वह टाटा जो डिजिटल, एविएशन और नए दौर के कारोबार में अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रहा है।

सबसे बड़ा संकट टाटा संस की लिस्टिंग

उत्तराधिकार का यह पूरा मामला ऐसे समय में सामने आया है जब टाटा संस को संभावित शेयर बाजार सूचीबद्धता के सवाल का सामना करना पड़ रहा है।भारतीय रिजर्व बैंक के नियमों के कारण टाटा संस की लिस्टिंग को लेकर दबाव बना हुआ है। अगर कंपनी बाजार में सूचीबद्ध होती है तो टाटा समूह की मौजूदा संरचना और नियंत्रण व्यवस्था पर उसका असर पड़ सकता है। ऐसे में नया चेयरमैन सिर्फ नेतृत्व परिवर्तन नहीं करेगा, बल्कि समूह की संरचना से जुड़े बेहद महत्वपूर्ण फैसलों का हिस्सा भी बनेगा।

इसलिए उम्मीदवार सिर्फ टाटा का आदमी नहीं हो सकता

टाटा समूह को अब ऐसा चेहरा चाहिए जो संस्थागत विरासत को समझता हो, लेकिन बदलती कारोबारी दुनिया के साथ चलने की क्षमता भी रखता हो। उसे टाटा ट्रस्ट्स के साथ तालमेल रखना होगा। टाटा संस के बोर्ड को साथ लेकर चलना होगा। समूह की अलग-अलग कंपनियों के हितों में संतुलन बनाना होगा और निवेशकों तथा बाजार की बदलती अपेक्षाओं को भी समझना होगा। सबसे महत्वपूर्ण बात नए चेयरमैन को आने वाले दस वर्षों के लिए टाटा समूह की दिशा तय करनी होगी। चंद्रशेखरन का जाना अपने आप में बड़ी खबर है, लेकिन उनके जाने से ज्यादा बड़ा मामला उत्तराधिकारी की खोज में हुई देरी है। जनवरी 2025 में जब नोएल टाटा ने सवाल पूछा था, तब समय था। फरवरी में दोबारा सवाल उठा, तब भी समय था। बाद में चंद्रशेखरन का कार्यकाल बढ़ाया गया, तब भी समय था। अब जब नेतृत्व परिवर्तन सामने है, तो वही समय टाटा संस के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। अब देखना यह है कि टाटा संस का बोर्ड उस उत्तराधिकार योजना को कितनी जल्दी सामने लाता है, जिसकी जरूरत का संकेत पहले ही मिल चुका था। टाटा समूह के इतिहास में नेतृत्व बदलना नई बात नहीं है, लेकिन इस बार असली कहानी उस कुर्सी की नहीं है जो खाली होने जा रही है और उसके बारे में सवाल पहले ही पूछा जा चुका था, लेकिन जवाब अब तक सामने नहीं आया।

FAQ

  1. टाटा संस के अगले चेयरमैन को लेकर सवाल क्यों उठ रहे हैं?
    एन. चंद्रशेखरन के संभावित पद छोड़ने की चर्चा के बाद टाटा संस के उत्तराधिकारी को लेकर सवाल बढ़ गए हैं। नोएल टाटा पहले ही बोर्ड से उत्तराधिकार योजना की जानकारी मांग चुके थे।
  2. नोएल टाटा ने उत्तराधिकारी को लेकर कब सवाल उठाए थे?
    नोएल टाटा ने जनवरी 2025 में टाटा संस की नामांकन एवं पारिश्रमिक समिति से उत्तराधिकार योजना की जानकारी मांगी थी। फरवरी 2025 में यह मुद्दा दोबारा उठाया गया था।
  3. टाटा संस का नया चेयरमैन चुनना इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
    टाटा संस पूरे टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी है। नया चेयरमैन समूह की रणनीति, बड़े निवेश, एयर इंडिया, डिजिटल कारोबार और भविष्य की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा।

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