13 मई का इतिहास: कैसे शुरू हुई थी हमारी लोकसभा और राज्यसभा, जानें आज कितना एडवांस है हमारा सदन
Kaushiki | May 13, 2026, 08:00 IST
Photograph: (THESOOTR)
13 मई 1952 को भारत की पहली चुनी हुई संसद का पहला सत्र शुरू हुआ था। इस लेख में हम बता रहे है लोकसभा और राज्यसभा के ऐतिहासिक सफर और अब तक के महत्वपूर्ण बदलावों की पूरी कहानी...
आज के दिन की कहानी: कल्पना कीजिए उस सुबह की जब भारत ने पहली बार अपने चुने हुए प्रतिनिधियों को संसद में बैठ हुए देखा। तारीख थी 13 मई 1952। अंग्रेजों की गुलामी से आजाद हुए हमें कुछ ही साल हुए थे। चारों तरफ उत्साह का माहौल था। लाखों लोगों ने वोट देकर अपनी सरकार चुनी थी। पुराने संसद भवन के गलियारों में एक नई ऊर्जा थी।
पहली बार आम आदमी की आवाज कानून बनाने वाली सबसे बड़ी पंचायत तक पहुंची थी। नेहरू जी और उनके साथी देश के भविष्य की नींव रख रहे थे। यह सिर्फ एक सत्र नहीं, बल्कि एक नए भारत का उदय था।
![Hindi-On this Day - 13 May: The first session of the Parliament of independent India was held]()
भारत में पहले आम चुनाव 1951 से 1952 के बीच हुए थे। चुनाव खत्म होने के बाद लोकसभा और राज्यसभा का गठन हुआ। 13 मई 1952 को सुबह 11 बजे लोकसभा की पहली बैठक हुई।
ठीक उसी समय राज्यसभा की भी पहली बैठक आयोजित की गई थी। उस समय लोकसभा को House of the People कहा जाता था। वहीं राज्यसभा को Council of States के नाम से जाना जाता था।
इन दोनों सदनों के नाम 1954 में हिंदी में बदले गए। पहले सत्र की अध्यक्षता जी.वी. मावलंकर ने लोकसभा अध्यक्ष के रूप में की। सर्वपल्ली राधाकृष्णन राज्यसभा के पहले सभापति बने थे।
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भारतीय संसद का सफर बहुत ही शानदार और प्रेरणादायक रहा है। आइए इसे कुछ मुख्य पड़ावों के जरिए आसान तरीके से समझते हैं:
![13 मई 1952 को पहली बार हुई थी संसद के ऊपरी सदन राज्यसभा की बैठक - Sixty Eight Years Of Upper House Of Indian Parliament Rajaya Sabha Council Of States - Amar]()
![आज ही के दिन देश में गठित हुई थी पहली लोकसभा, सबसे पहले पास हुआ था भूमि सुधार बिल - News18 हिंदी]()
![first session of parliament started in independent India on this day, know interesting stories of 13 may | 13 May History: आजाद भारत में आज ही के दिन शुरू हुआ था संसद]()
लोकसभा को निचला सदन कहा जाता है, जहां सांसद सीधे जनता चुनती है। यहां सरकार बनाने और बजट पास करने का मुख्य काम होता है। इसका कार्यकाल सामान्यतः 5 साल का होता है।
लोकसभा के पहले अध्यक्ष गणेश वासुदेव मावलंकर (G.V. Mavalankar) थे। इन्हें 'लोकसभा के जनक' के रूप में भी जाना जाता है। वहीं, राज्यसभा के पहले सभापति भारत के प्रथम उपराष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन थे।
दूसरी तरफ राज्यसभा को ऊपरी सदन या 'बौद्धिकों का सदन' (House of Intellectuals) कहते हैं। इसके सदस्य राज्यों की विधानसभाओं द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से चुने जाते हैं।
यह सदन कभी पूरी तरह भंग नहीं होता है। राज्यसभा में हर दो साल में एक-तिहाई सदस्य रिटायर हो जाते हैं। दोनों सदन मिलकर देश के लिए जरूरी कानून और नियम बनाते हैं। इनके बिना भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था अधूरी मानी जाती है।
70 से ज्यादा सालों तक पुरानी संसद ने भारत का इतिहास लिखा। लेकिन समय के साथ जगह की कमी महसूस होने लगी थी। इसी जरूरत को देखते हुए नए संसद भवन का निर्माण हुआ।
नया संसद भवन पूरी तरह से आधुनिक सुविधाओं से लैस है। इसमें सांसदों के बैठने के लिए कहीं ज्यादा बड़ी जगह है। यह आत्मनिर्भर भारत की नई सोच का एक जीता-जागता प्रतीक है।
डिजिटल इंडिया के इस दौर में अब संसद पेपरलेस हो रही है। नई तकनीक ने कानून बनाने की प्रक्रिया को और पारदर्शी बनाया है। यह भवन भारत की सांस्कृतिक विविधता को भी दर्शाता है।
![लोकसभा चुनाव 1952: पहले आम चुनाव की कहानी]()
आज का इतिहास मेंहर दिन का अपना एक अलग महत्व होता है। 13 मई का दिन भी इतिहास (आज की यादगार घटनाएं) में कई महत्वपूर्ण घटनाओं के लिए दर्ज है। इस दिन दुनिया में कई ऐसी घटनाएं हुईं, जिन्होंने इतिहास की दिशा बदल दी।
आइए जानते हैं 13 मई (आज की तारीख का इतिहास) को भारत और विश्व में घटी कुछ प्रमुख घटनाओं के बारे में, जो आपके सामान्य ज्ञान को बढ़ा सकती हैं-
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पहली बार आम आदमी की आवाज कानून बनाने वाली सबसे बड़ी पंचायत तक पहुंची थी। नेहरू जी और उनके साथी देश के भविष्य की नींव रख रहे थे। यह सिर्फ एक सत्र नहीं, बल्कि एक नए भारत का उदय था।
Hindi-On this Day - 13 May: The first session of the Parliament of independent India was held
कैसे हुई थी भारतीय संसद की शुरुआत
ठीक उसी समय राज्यसभा की भी पहली बैठक आयोजित की गई थी। उस समय लोकसभा को House of the People कहा जाता था। वहीं राज्यसभा को Council of States के नाम से जाना जाता था।
इन दोनों सदनों के नाम 1954 में हिंदी में बदले गए। पहले सत्र की अध्यक्षता जी.वी. मावलंकर ने लोकसभा अध्यक्ष के रूप में की। सर्वपल्ली राधाकृष्णन राज्यसभा के पहले सभापति बने थे।
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संसद की टाइमलाइन: 1952 से लेकर अब तक के बड़े पड़ाव
- 1952: लोकतंत्र की पहली आधिकारिक शुरुआत
आजाद भारत में पहले आम चुनाव के बाद 13 मई 1952 को संसद का पहला सत्र शुरू हुआ। यह वह ऐतिहासिक पल था जब देश को अपनी पहली चुनी हुई लोकसभा और राज्यसभा मिली। इसी दिन से भारत ने दुनिया के सबसे बड़े लिखित संविधान के आधार पर अपनी विधायी यात्रा शुरू की। - 1954: सदनों को मिले उनके हिंदी नाम
शुरुआत में संसद के दोनों सदनों को अंग्रेजी नामों Council of States और House of the People से जाना जाता था। 1954 में आधिकारिक तौर पर इन्हें राज्यसभा और लोकसभा जैसे हिंदी नाम दिए गए। यह बदलाव भारतीय संसद को देश की भाषाई पहचान और संस्कृति से जोड़ने के लिए एक बड़ा कदम था।
13 मई 1952 को पहली बार हुई थी संसद के ऊपरी सदन राज्यसभा की बैठक - Sixty Eight Years Of Upper House Of Indian Parliament Rajaya Sabha Council Of States - Amar
- 1962: युद्ध और आपातकाल की पहली गंभीर चुनौती
भारत-चीन युद्ध के दौरान 1962 में संसद ने पहली बार राष्ट्रीय सुरक्षा और आपातकाल जैसे अत्यंत गंभीर विषयों पर चर्चा की। इस दौरान सदन ने देश की संप्रभुता की रक्षा के लिए कई कड़े कानून बनाए और एकजुटता का परिचय दिया। संसदीय बहस के जरिए सरकार की रणनीतियों और सेना की जरूरतों पर विस्तार से विचार-मंथन हुआ। - 1975: भारतीय लोकतंत्र का सबसे कठिन परीक्षा काल
साल 1975 में देश में 'आपातकाल' यानी इमरजेंसी लागू की गई, जिसे भारतीय लोकतंत्र का काला अध्याय कहा जाता है। इस दौरान संसद की शक्तियां सीमित हो गई थीं और नागरिक अधिकारों पर कई पाबंदियां लगा दी गई थीं। हालांकि, इस दौर ने भविष्य के लिए संसद और न्यायपालिका की शक्तियों को और अधिक स्पष्ट करने का सबक दिया। - 2001: लोकतंत्र के मंदिर पर आतंकी हमला
13 दिसंबर 2001 को आतंकवादियों ने भारतीय संसद पर हमला कर पूरे देश को स्तब्ध कर दिया था। हमारे वीर जवानों ने अपनी जान पर खेलकर लोकतंत्र के इस पवित्र मंदिर की रक्षा की और आतंकियों के मंसूबों को नाकाम किया। इस घटना के बाद संसद की सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह से हाई-टेक और अभेद्य बना दिया गया।
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- 2019: ऐतिहासिक फैसलों और बड़े बदलावों का साल
इस साल संसद ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाने जैसा साहसी और ऐतिहासिक विधायी फैसला लिया। इसके अलावा तीन तलाक को खत्म करने और नागरिकता संशोधन कानून जैसे कई महत्वपूर्ण बिल भी पारित हुए। इन फैसलों ने देश की राजनीतिक और सामाजिक दिशा को बदलने में बहुत बड़ी भूमिका निभाई। - 2023: नई दिल्ली में नए आधुनिक संसद भवन का उदय
भारत की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए 2023 में पुराने भवन की जगह अत्याधुनिक और भव्य 'नए संसद भवन' का उद्घाटन हुआ। यह नया सदन आत्मनिर्भर भारत की भव्यता और आधुनिक तकनीक का एक बेजोड़ उदाहरण पेश करता है। मानसून सत्र के साथ ही सांसदों ने इस नए डिजिटल और पेपरलेस सदन में काम करना शुरू किया। - 2026: संसदीय गौरव के 74 साल और भविष्य की राह
आज साल 2026 में हम अपनी संसद की स्थापना के शानदार 74 वर्ष पूरे होने का जश्न मना रहे हैं। इन दशकों में संसद ने सैकड़ों ऐतिहासिक कानून बनाए हैं और करोड़ों भारतीयों की उम्मीदों को कानून का रूप दिया है। अब यह संस्थान नई तकनीक और युवा ऊर्जा के साथ विकसित भारत के सपने को साकार करने की ओर अग्रसर है।
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लोकसभा और राज्यसभा: दोनों के बीच का अंतर
लोकसभा के पहले अध्यक्ष गणेश वासुदेव मावलंकर (G.V. Mavalankar) थे। इन्हें 'लोकसभा के जनक' के रूप में भी जाना जाता है। वहीं, राज्यसभा के पहले सभापति भारत के प्रथम उपराष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन थे।
दूसरी तरफ राज्यसभा को ऊपरी सदन या 'बौद्धिकों का सदन' (House of Intellectuals) कहते हैं। इसके सदस्य राज्यों की विधानसभाओं द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से चुने जाते हैं।
यह सदन कभी पूरी तरह भंग नहीं होता है। राज्यसभा में हर दो साल में एक-तिहाई सदस्य रिटायर हो जाते हैं। दोनों सदन मिलकर देश के लिए जरूरी कानून और नियम बनाते हैं। इनके बिना भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था अधूरी मानी जाती है।
आधुनिक सुविधाओं से लैस नया भवन
नया संसद भवन पूरी तरह से आधुनिक सुविधाओं से लैस है। इसमें सांसदों के बैठने के लिए कहीं ज्यादा बड़ी जगह है। यह आत्मनिर्भर भारत की नई सोच का एक जीता-जागता प्रतीक है।
डिजिटल इंडिया के इस दौर में अब संसद पेपरलेस हो रही है। नई तकनीक ने कानून बनाने की प्रक्रिया को और पारदर्शी बनाया है। यह भवन भारत की सांस्कृतिक विविधता को भी दर्शाता है।
लोकसभा चुनाव 1952: पहले आम चुनाव की कहानी
1952 से अबतक भारतीय संसद कितना बदला
- टेक्नोलॉजी का इम्पैक्ट:
1952 के दौर में संसद की कार्यवाही केवल बंद कमरों और फाइलों तक सीमित थी। लेकिन आज डिजिटल इंडिया के दौर में सबकुछ बदल गया है। सबसे क्रांतिकारी बदलाव 1989 में शुरू हुआ, जब संसद की कार्यवाही का Live Telecast शुरू किया गया। आज संसद टीवी के माध्यम से हर आम नागरिक अपने मोबाइल पर लाइव देख सकता है कि उसके प्रतिनिधि सदन में क्या बोल रहे हैं। इससे जवाबदेही और पारदर्शिता बहुत बढ़ गई है। - पेपरलेस और स्मार्ट वर्किंग:
पहले संसद का मतलब होता था ढेरों कागज और भारी-भरकम फाइलें। लेकिन अब हमारी संसद डिजिटल होने की दिशा में बढ़ चुकी है। सांसदों को अब बिल और रिपोर्ट्स ई-पोर्टल के जरिए टैबलेट और कंप्यूटर पर उपलब्ध कराए जाते हैं। इससे न केवल पर्यावरण की सुरक्षा हो रही है, बल्कि डेटा सर्च करना और जानकारी शेयर करना भी बहुत इजी और फास्ट हो गया है। - इंफ्रास्ट्रक्चर में बदलाव:
70 सालों तक पुराने ब्रिटिश कालीन भवन में काम करने के बाद, 2023 में भारत को अपना नई पार्लियामेंट बिल्डिंग मिला। यह केवल एक नई बिल्डिंग नहीं है, बल्कि आधुनिक जरूरतों का समाधान है। इसमें हाई-टेक बायोमेट्रिक वोटिंग सिस्टम, शानदार ऑडियो-विजुअल टूल्स और भविष्य के हिसाब से सांसदों के बैठने की ज्यादा जगह है। - चर्चा का समय और घटते सत्र:
एक चिंताजनक बदलाव सत्रों की अवधि में आया है। साल 1950 के दशक में संसद साल में 120 से अधिक दिन चलती थी, जो अब घटकर 60-70 दिन के आसपास रह गई है। सत्रों के दौरान हंगामे और शोर-शराबे की वजह से रचनात्मक चर्चा का समय कम हुआ है, जो आधुनिक लोकतंत्र के लिए एक बड़ी चुनौती है।
Reference Links:
- Official Website of Lok Sabha - History
- Rajya Sabha - Origin and Growth
- National Archives of India - First Election Records
- Parliament Museum of India - Archives
13 मई की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाएं
आइए जानते हैं 13 मई (आज की तारीख का इतिहास) को भारत और विश्व में घटी कुछ प्रमुख घटनाओं के बारे में, जो आपके सामान्य ज्ञान को बढ़ा सकती हैं-
विश्व इतिहास की प्रमुख घटनाएं...
- 1373: अंग्रेजी रहस्यवादी जूलियन को यीशु मसीह के दिव्य दर्शन हुए, जिसे उन्होंने अपनी प्रसिद्ध किताब में लिखा।
- 1643: चिली में विनाशकारी भूकंप आया, जिससे देश की एक तिहाई आबादी की मौत हो गई।
- 1779: रूस और फ्रांस की मध्यस्थता से 'टेस्चेटो की संधि' हुई और बवेरियन उत्तराधिकार का युद्ध समाप्त हुआ।
- 1830: इक्वेडोर गणराज्य की स्थापना हुई और जुआन जोस फ्लोरेंस इसके पहले राष्ट्रपति बने।
- 1846: संयुक्त राज्य अमेरिका ने आधिकारिक तौर पर मेक्सिको के खिलाफ युद्ध की घोषणा की।
- 1848: फिनलैंड के राष्ट्रगान 'माएमे' का पहली बार सार्वजनिक प्रदर्शन किया गया।
- 1880: थॉमस एडिसन ने न्यू जर्सी के मेनलो पार्क में अपनी पहली प्रायोगिक इलेक्ट्रिक रेल का प्रदर्शन किया।
- 1888: ब्राजील की राजकुमारी इसाबेल ने 'लेई ऑरिंटो' कानून पर हस्ताक्षर कर दासता (Slavery) को समाप्त किया।
- 1909: इटली में प्रसिद्ध 'Giro d'Italia' लंबी दूरी की रोड साइकिल रेसिंग की शुरुआत हुई।
- 1913: इगोर सिकोरस्की ने दुनिया के पहले मल्टी-इंजन विमान 'रस्की वाइटाज़' को पहली बार उड़ाया।
- 1917: पुर्तगाल के फातिमा में बच्चों को 'मैरियन' (आवर लेडी ऑफ फातिमा) के दर्शन होने शुरू हुए।
- 1918: अमेरिका में पहला एयरमेल स्टैम्प जारी हुआ, जो 'इनवर्टेड जेनी' प्रिंटिंग एरर के कारण प्रसिद्ध हुआ।
- 1930: ब्रिटिश श्रम मंत्रालय ने देश में 1.7 मिलियन बेरोजगारों की सूची जारी की।
- 1931: पॉल ड्यूमर को फ्रांस के नए राष्ट्रपति के रूप में चुना गया।
- 1935: लंदन में प्रसिद्ध हॉरर फिल्म 'वेयरवोल्फ' रिलीज की गई थी।
- 1939: अमेरिका के कनेक्टिकट में दुनिया का पहला कमर्शियल FM रेडियो स्टेशन (WDRC-FM) लॉन्च हुआ।
- 1950: इंग्लैंड के सिल्वरस्टोन में पहली बार 'एफआईए फॉर्मूला वन वर्ल्ड चैम्पियनशिप' की दौड़ आयोजित हुई।
- 1958: बेन कारलिन उभयचर वाहन (Amphibious Vehicle) से दुनिया का चक्कर लगाने वाले पहले व्यक्ति बने।
- 1969: कुआलालंपुर (मलेशिया) में भयंकर सांप्रदायिक दंगे हुए, जिसे '13 मई की घटना' कहा जाता है।
- 1981: मेहमत अली अगाका ने वेटिकन सिटी में पोप जॉन पॉल द्वितीय की हत्या का असफल प्रयास किया।
- 1985: फिलाडेल्फिया पुलिस ने 'मूव' (ब्लैक लिबरेशन ग्रुप) के ठिकाने पर बम गिराया, जिसमें 11 लोग मारे गए।
- 1992: ली होंगज़ी ने चीन में पहली बार 'फालुन गोंग' (आध्यात्मिक अभ्यास) का सार्वजनिक परिचय दिया।
- 1995: एलिसन हरग्रेव्स बिना ऑक्सीजन और शेरपा के एवरेस्ट फतह करने वाली पहली महिला बनीं।
- 1996: बांग्लादेश में भीषण तूफान और बवंडर के कारण 600 से अधिक लोगों की जान चली गई।
- 1999: कार्लो एज़ेल्लो सिमाई को इटली के राष्ट्रपति के रूप में चुना गया।
- 2000: नीदरलैंड के आतिशबाजी कारखाने में बड़ा विस्फोट हुआ, जिसमें 22 लोगों की मौत हुई।
- 2001: सिल्वियो बर्लुस्कोनी ने चुनाव जीता और दूसरी बार इटली के प्रधानमंत्री बने।
- 2005: उज्बेकिस्तान के अंदिजान में प्रदर्शनकारियों पर हुई गोलीबारी में सैकड़ों लोग मारे गए।
- 2014: तुर्की की एक कोयला खदान में विस्फोट और आग लगने से 238 खदान कर्मियों की मौत हुई।
भारत के इतिहास की प्रमुख घटनाएं...
- 1638: मुगल सम्राटों के निवास स्थल 'लाल किले' (दिल्ली) के निर्माण का कार्य शुरू हुआ।
- 1648: दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले का निर्माण कार्य पूरी तरह संपन्न हुआ।
- 1952: स्वतंत्र भारत की पहली संसद (लोकसभा और राज्यसभा) का पहला सत्र शुरू हुआ।
- 1952: भारतीय संसद के ऊपरी सदन 'राज्यसभा' की पहली बैठक आयोजित की गई।
- 1962: महान दार्शनिक डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन भारत के दूसरे राष्ट्रपति बने।
- 1967: डॉ. जाकिर हुसैन भारत के तीसरे और पहले मुस्लिम राष्ट्रपति के रूप में निर्वाचित हुए।
- 1998: भारत ने राजस्थान के पोखरण में दो और सफल परमाणु परीक्षण (Pokhran-II) किए।
- 2008: राजस्थान की राजधानी जयपुर में 15 मिनट के भीतर 9 सिलसिलेवार बम धमाके हुए।
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