24 जून का इतिहास: 1793 का फ्रेंच कॉन्स्टिट्यूशन, जानें हमारे संविधान से कनेक्शन
Kaushiki | Jun 24, 2026, 08:00 IST
france first republican constitution
साल 1793 में फ्रांस ने पहली बार अपने ऐतिहासिक रिपब्लिकन संविधान को अपनाया था। इस बड़े कदम ने न केवल यूरोप बल्कि पूरी दुनिया में राजाशाही को खत्म कर दिया। इसके बाद दुनिया भर में लोकतंत्र, समानता और स्वतंत्रता की एक नई लहर दौड़ गई।
France First Republican Constitution 1793: आज हम वर्ल्ड हिस्ट्री के एक बहुत ही रोमांचक और दिलचस्प पन्ने को पलटने जा रहे हैं। क्या आपने कभी सोचा है कि दुनिया में राजाओं का राज कैसे खत्म हुआ? जनता को वोट देने और खुलकर जीने की आजादी कैसे मिली? इस पूरी कहानी की शुरुआत होती है साल 1793 में, जब फ्रांस ने पहली बार अपने रिपब्लिकन संविधान (Republican Constitution) को अपनाया था।
यह सिर्फ एक कानूनी किताब नहीं थी, बल्कि यह आम जनता की ताकत का सबसे बड़ा ऐलान था। आज के इस आर्टिकल में हम इस पूरी ऐतिहासिक घटना को बहुत ही आसान शब्दों में समझेंगे। साथ ही यह भी जानेंगे कि इस विदेशी क्रांति का हमारे प्यारे देश भारत से क्या सीधा कनेक्शन है...
![फ्रांसीसी क्रांति की योजना टेनिस कोर्ट पर बनाई गई थी | इतिहास]()
साल 1793 से पहले फ्रांस में लुई 16वें (Louis XVI) नाम के राजा का क्रूर शासन हुआ करता था। राजा और उसके अमीर दरबारी ऐशो-आराम की जिंदगी जीते थे। इसके विपरीत, वहां की आम जनता गरीबी और भुखमरी से बहुत ज्यादा परेशान थी। जनता पर भारी टैक्स भी लगाया जाता था। इस भयंकर भेदभाव के कारण फ्रांस के लोगों में भारी गुस्सा भर गया था। आखिरकार, जनता ने राजा के खिलाफ एक बहुत बड़ी क्रांति शुरू कर दी।
![France First Republican Constitution]()
इस ऐतिहासिक विद्रोह को दुनिया फ्रांसीसी क्रांति (French Revolution) के नाम से जानती है। जनता ने राजा के महल पर पूरी तरह कब्जा कर लिया था। इसके बाद राजा लुई 16वें को उनके किए की कड़ी सजा दी गई। उन्हें सरेआम मौत के घाट उतार दिया गया था। राजा के खत्म होते ही फ्रांस को एक लोकतांत्रिक देश बनाने की प्रक्रिया शुरू हुई। इसी सोच के साथ नए संविधान का निर्माण किया गया।
24 जून 1793 को फ्रांस ने अपने पहले रिपब्लिकन संविधान को आधिकारिक मंजूरी दी थी। इस कानून ने देश का पूरा चेहरा बदल दिया। यह नया संविधान पूरी तरह से जनता के अधिकारों पर आधारित था। इसने समाज के सबसे गरीब तबके को भी बहुत मजबूत बनाया। अब राजा का कोई बेटा देश का अगला शासक नहीं बन सकता था। देश चलाने के लिए सरकार को चुनना अब पूरी तरह जनता के हाथ में था।
इस रिपब्लिकन संविधान ने दुनिया को तीन सबसे बड़े और जादुई शब्द दिए। ये शब्द थे- स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व (Liberty, Equality, Fraternity)। संविधान के तहत देश के हर वयस्क नागरिक को वोट देने का अधिकार मिला। अब अमीर और गरीब का भेद पूरी तरह मिटा दिया गया था। इसके अलावा, सरकार के खिलाफ बोलने और अपने विचार रखने की आजादी मिली। शिक्षा और रोजगार के नए अवसर भी आम लोगों के लिए खोले गए।
![प्रथम फ्रांसीसी गणराज्य और राजहत्या | पश्चिमी सभ्यता का इतिहास II]()
फ्रांस का 1793 का पहला रिपब्लिकन संविधान इतिहास का एक बहुत बड़ा टर्निंग पॉइंट था।
भले ही यह संविधान बहुत ही शानदार और एडवांस विचारों वाला था। लेकिन इसे पूरी तरह से लागू करना आसान नहीं रहा। उस समय फ्रांस के भीतर और बाहर कई तरह के युद्ध चल रहे थे। देश में राजनीतिक अस्थिरता बहुत ज्यादा बढ़ चुकी थी। इस वजह से इस संविधान को कुछ समय के लिए टालना भी पड़ा था। लेकिन इसके विचारों ने दुनिया के दिलों में अपनी जगह बना ली थी।
![1793 का फ्रांसीसी संविधान - विकिपीडिया]()
अब आप सोच रहे होंगे कि फ्रांस की इस पुरानी कहानी का भारत से क्या संबंध है? तो आपको बता दें कि इसका हमारे देश से बहुत गहरा नाता है। जब हमारा देश आजाद हुआ और बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने भारत का संविधान लिखा। तब उन्होंने दुनियाभर के अच्छे विचारों को इसमें शामिल किया। हमारे भारतीय संविधान की प्रस्तावना (Constitution Preamble) में जो Liberty, Equality और Fraternity के आइडियल वर्ड हैं, वे इसी फ्रांसीसी क्रांति से लिए गए हैं।
इतना ही नहीं, इतिहास में भारत और फ्रांस का एक और दिलचस्प कनेक्शन मिलता है। मैसूर के महान शासक टीपू सुल्तान भी इस क्रांति से प्रभावित थे। टीपू सुल्तान ने फ्रांस की इस क्रांति का खुलकर समर्थन किया था। उन्होंने श्रीरंगपट्टनम में स्वतंत्रता का वृक्ष (Tree of Liberty) भी लगाया था। उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ लड़ने के लिए फ्रांसीसी सैनिकों की मदद भी ली थी। इस तरह फ्रांस के विचार बहुत पहले ही भारत पहुंच चुके थे।
![फ्रांसीसी क्रांति - विकिपीडिया]()
दुनिया के
फ्रांस का 1793 का यह रिपब्लिकन संविधान दुनिया के लिए एक बहुत बड़ा टर्निंग पॉइंट (Constitutional Rights) साबित हुआ। इसने साबित किया कि कोई भी देश बिना किसी राजा या रानी के भी बहुत अच्छे से चल सकता है। असली ताकत सिर्फ जनता में होती है। आज दुनिया के जितने भी लोकतांत्रिक देश हैं, वे कहीं न कहीं इसी विचार पर चलते हैं। फ्रांस ने दुनिया को जीने का एक नया रास्ता दिखाया था।
आज का इतिहास मेंहर दिन का अपना एक अलग महत्व होता है। 24 जून का दिन भी इतिहास (आज की यादगार घटनाएं) में कई महत्वपूर्ण घटनाओं के लिए दर्ज है। इस दिन दुनिया में कई ऐसी घटनाएं हुईं, जिन्होंने इतिहास की दिशा बदल दी।
आइए जानते हैं 24 जून (आज की तारीख का इतिहास) को भारत और विश्व में घटी कुछ प्रमुख घटनाओं के बारे में, जो आपके सामान्य ज्ञान को बढ़ा सकती हैं-
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यह सिर्फ एक कानूनी किताब नहीं थी, बल्कि यह आम जनता की ताकत का सबसे बड़ा ऐलान था। आज के इस आर्टिकल में हम इस पूरी ऐतिहासिक घटना को बहुत ही आसान शब्दों में समझेंगे। साथ ही यह भी जानेंगे कि इस विदेशी क्रांति का हमारे प्यारे देश भारत से क्या सीधा कनेक्शन है...
फ्रांसीसी क्रांति की योजना टेनिस कोर्ट पर बनाई गई थी | इतिहास
क्या है 1793 के संविधान की बैकस्टोरी
France First Republican Constitution
जब फ्रांस ने राजाशाही को उखाड़ फेंका
पहली बार जनता के हाथ में आई असली ताकत
इस नए संविधान की सबसे मुख्य बातें
प्रथम फ्रांसीसी गणराज्य और राजहत्या | पश्चिमी सभ्यता का इतिहास II
रिपब्लिकन संविधान
- End of Monarchy: इस संविधान ने फ्रांस में सदियों से चली आ रही राजाशाही को पूरी तरह से खत्म कर दिया और देश को आधिकारिक तौर पर एक संप्रभु गणतंत्र घोषित किया।
- Right to Vote: इसके तहत देश के हर वयस्क पुरुष नागरिक (Adult Male Citizen) को वोट देने का अधिकार मिला, चाहे वह अमीर हो या गरीब। इसमें संपत्ति की अनिवार्यता को खत्म कर दिया गया था।
- Liberty, Equality, Fraternity: इस कानून ने दुनिया को स्वतंत्रता (Liberty), समानता (Equality) और भाईचारे (Fraternity) का सबसे बड़ा संदेश दिया, जो आज हमारे भारतीय संविधान की भी मुख्य आत्मा है।
- Right to Rebellion: इस संविधान में एक बहुत ही अनोखा नियम था कि अगर सरकार नागरिकों के अधिकारों का हनन करती है, तो जनता के पास सरकार के खिलाफ विद्रोह करने का कानूनी अधिकार होगा।
- Abolition of Slavery: इसके जरिए समाज में इंसानों की खरीद-बिक्री और गुलामी को पूरी तरह गैरकानूनी घोषित करने की नींव रखी गई, जिसने दबे-कुचले लोगों को जीने का अधिकार दिया।
- Social Welfare & Education: इसमें राज्य की यह जिम्मेदारी तय की गई कि वह गरीब और जरूरतमंद लोगों को रोजगार दे और हर नागरिक के लिए मुफ्त प्राथमिक शिक्षा का इंतजाम करे।
- Power to the Public (Direct Democracy): इसमें कानून बनाने की प्रक्रिया में जनता की राय को बहुत महत्व दिया गया था। किसी भी बड़े कानून को पास करने के लिए नेशनल असेंबली के साथ-साथ जनता की सहमति का भी प्रावधान था।
फ्रांस के इस नए संविधान में आई कुछ रुकावटें
1793 का फ्रांसीसी संविधान - विकिपीडिया
भारत के साथ इस क्रांति का कनेक्शन
मैसूर के सुल्तान टीपू का फ्रांस से रिश्ता
फ्रांसीसी क्रांति - विकिपीडिया
दुनिया के लोकतंत्र के लिए क्यों जरूरी है ये घटना
24 जून की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाएं
आइए जानते हैं 24 जून (आज की तारीख का इतिहास) को भारत और विश्व में घटी कुछ प्रमुख घटनाओं के बारे में, जो आपके सामान्य ज्ञान को बढ़ा सकती हैं-
विश्व और भारत इतिहास की प्रमुख घटनाएं...
- 1793: फ्रांस ने अपने इतिहास में पहली बार रिपब्लिकन संविधान (1793 का फ्रेंच कॉन्स्टिट्यूशन) को अपनाया था।
- 2004: जॉन नेग्रोपोटे इराक देश में अमेरिका के पहले आधिकारिक राजदूत नियुक्त किए गए थे।
- 2005: अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी को अपनी मान्यता दी।
- 2006: फिलीपींस देश ने अपने कानून से मौत की सजा को पूरी तरह से समाप्त कर दिया।
- 2007: इराक की अदालत ने सद्दाम हुसैन के चचेरे भाई 'केमिकल अली' सहित तीन लोगों को फांसी की सजा सुनाई।
- 2008: नेपाल के तत्कालीन प्रधानमंत्री गिरिजा प्रसाद कोइराला ने अपने पद से आधिकारिक तौर पर इस्तीफा दे दिया था।
- 1937: भारतीय राजनीतिज्ञ और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा का जन्म हुआ था।
- 1937: अंग्रेजी साहित्य की मशहूर और प्रख्यात लेखिका अनीता देसाई का जन्म हुआ था।
- 1897: भारत के प्रसिद्ध शिक्षाशास्त्री, संगीतज्ञ और महान शास्त्रीय गायक ओंकारनाथ ठाकुर का जन्म हुआ था।
- 1885: भारत के प्रसिद्ध राजनीतिज्ञ और जाने-माने सिख नेता मास्टर तारा सिंह का जन्म हुआ था।
- 1869: देश की आजादी के लिए लड़कर अमर होने वाले महान क्रांतिकारी दामोदर हरी चापेकर का जन्म हुआ था।
- 1863: प्रसिद्ध भारतीय लेखक, इतिहासकार, श्रेष्ठ वक्ता और विद्वान विश्वनाथ काशीनाथ राजवाडे का जन्म हुआ था।
- 2001: भारत के जाने-माने प्रसिद्ध लेखक और वरिष्ठ पत्रकार अवधानम सीता रमन का निधन हुआ था।
- 1950: प्रथम विश्व युद्ध के दौरान सबसे बड़ा ब्रिटिश सैन्य पुरस्कार 'विक्टोरिया क्रॉस' पाने वाले भारतीय सैनिक दरबान सिंह नेगी का निधन हुआ था।
- 1881: प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी और 'ओम जय जगदीश हरे' आरती के रचयिता पंडित श्रद्धाराम शर्मा का निधन हुआ था।
- 1564: मुगलों के खिलाफ युद्ध के मैदान में लड़ते हुए गोंडवाना की महान वीरांगना महारानी दुर्गावती शहीद हुई थीं।
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