World Thalassemia Day: क्या है यह खतरनाक बीमारी, जिसने ले ली थी मिस्र के महान राजा की जान?
Anjali Dwivedi | May 08, 2026, 08:00 IST
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विश्व थैलेसीमिया दिवस हर साल 8 मई को मनाया जाता है। यह एक गंभीर आनुवंशिक रक्त विकार है जिसमें शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी हो जाती है। समय पर जांच और जागरूकता से इसका बेहतर प्रबंधन संभव है।
World Thalassemia Day: थैलेसीमिया खून से जुड़ी एक गंभीर और आनुवंशिक बीमारी है, जो पीढ़ी दर पीढ़ी माता-पिता से बच्चों में पहुंचती है। यह विकार शरीर में हीमोग्लोबिन बनाने की क्षमता को कम कर देता है, जिससे व्यक्ति को भारी एनीमिया या खून की कमी का सामना करना पड़ता है। अक्सर जानकारी के अभाव में लोग इस बीमारी को पहचान नहीं पाते, जिससे स्थिति और अधिक बिगड़ जाती है।
एक्पर्ट्स का कहना है कि समय पर जांच और जागरूकता थैलेसीमिया के प्रबंधन के लिए अनिवार्य है। यदि सही समय पर इसकी पहचान हो जाए, तो मरीज एक सामान्य और बेहतर जीवन जी सकता है। इसी उद्देश्य के साथ हर साल विश्व थैलेसीमिया दिवस मनाया जाता है। आइए, इस बीमारी के हर पहलू को विस्तार से समझते हैं।
थैलेसीमिया एक ऐसी स्थिति है, जिसमें शरीर पर्याप्त मात्रा में स्वस्थ हीमोग्लोबिन का निर्माण नहीं कर पाता। हीमोग्लोबिन ही वह तत्व है जो फेफड़ों से ऑक्सीजन लेकर पूरे शरीर की कोशिकाओं तक पहुंचाता है। क्योंकि कि इसमें स्वस्थ रक्त कोशिकाओं की कमी हो जाती है, इसलिए गंभीर मरीजों को जीवित रहने के लिए बार-बार बाहर से खून चढ़ाने (Blood Transfusion) की आवश्यकता होती है। यह पूरी तरह से जीन्स पर आधारित बीमारी है।
![why is world thalassemia day celebrated know its theme and importance]()
हर साल 8 मई की तारीख को विश्व थैलेसीमिया दिवस के रूप में समर्पित किया गया है। इस अवसर पर वैश्विक स्तर पर विभिन्न स्वास्थ्य संगठनों द्वारा जागरूकता अभियान और सेमिनार आयोजित किए जाते हैं।
इस दिवस को मनाने का मुख्य लक्ष्य लोगों को थैलेसीमिया की गंभीरता के प्रति सतर्क करना और प्री-मैरिटल स्क्रीनिंग (शादी से पहले रक्त जांच) के लिए प्रोत्साहित करना है।
इसके साथ ही, यह दिन उन मरीजों और उनके साहसी परिवारों के प्रति एकजुटता दिखाने का माध्यम है, जो हर दिन इस चुनौतीपूर्ण बीमारी से लड़ रहे हैं। डॉक्टरों के अनुसार, जागरूकता ही इस बीमारी को फैलने से रोकने का सबसे प्रभावी तरीका है।
![World Thalassemia Day 2022|थैलेसीमिया के मरीज इन बातों का रखें ध्यान - Thalassemia patients should keep these things in mind]()
थैलेसीमिया एक ऐसी बीमारी है जो माता-पिता से बच्चों में आती है। इसमें शरीर में खून (हीमोग्लोबिन) सही से नहीं बन पाता। अगर इतिहास की बात करें तो मिस्र के मशहूर राजा तूतनखामेन भी थैलेसीमिया बीमारी के शिकार थे। उनके परिवार में आपस में शादियां होने के कारण यह जेनेटिक बीमारी उन्हें विरासत में मिली थी।
वैज्ञानिकों को सात हजार साल पुराने कंकालों में भी इसके निशान मिले हैं। साल 1925 में डॉक्टर थॉमस कूली ने पहली बार इसे दुनिया को समझाया। इसके दो मुख्य प्रकार हैं- माइनर जिसमें व्यक्ति सामान्य दिखता है और मेजर जिसमें मरीज को बार-बार बाहर से खून चढ़ाना पड़ता है। आज आधुनिक इलाज से इसे ठीक करना मुमकिन है।
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एक्पर्ट्स का कहना है कि समय पर जांच और जागरूकता थैलेसीमिया के प्रबंधन के लिए अनिवार्य है। यदि सही समय पर इसकी पहचान हो जाए, तो मरीज एक सामान्य और बेहतर जीवन जी सकता है। इसी उद्देश्य के साथ हर साल विश्व थैलेसीमिया दिवस मनाया जाता है। आइए, इस बीमारी के हर पहलू को विस्तार से समझते हैं।
थैलेसीमिया क्या है ?
why is world thalassemia day celebrated know its theme and importance
कब मनाया जाता है वर्ल्ड थैलेसीमिया डे?
थैलेसीमिया के प्रमुख लक्षण
- शरीर में हमेशा कमजोरी और थकान महसूस होना
- त्वचा और चेहरे का रंग पीला पड़ना
- थोड़ा चलने या काम करने पर सांस फूलना
- पेट के अंगों (जैसे तिल्ली) में असामान्य सूजन
- हड्डियों का कमजोर या भंगुर होना
थैलेसीमिया से बचाव
- शादी से पहले ब्लड टेस्ट: विवाह से पूर्व थैलेसीमिया की जांच जरूर करवाएं।
- गर्भावस्था में स्क्रीनिंग: गर्भधारण के दौरान शुरुआती जांच से बचाव संभव है।
- जागरूकता और परामर्श: जेनेटिक काउंसलर से मिलकर बीमारी के जोखिम को समझें।
- हेल्थ रिकॉर्ड चेक: परिवार में किसी को यह बीमारी हो तो अपनी जांच तुरंत कराएं।
- समय पर स्क्रीनिंग: जन्म के बाद बच्चे की समय पर जांच से सही प्रबंधन संभव है।
क्यों मनाया जाता है वर्ल्ड थैलेसीमिया डे?
इसके साथ ही, यह दिन उन मरीजों और उनके साहसी परिवारों के प्रति एकजुटता दिखाने का माध्यम है, जो हर दिन इस चुनौतीपूर्ण बीमारी से लड़ रहे हैं। डॉक्टरों के अनुसार, जागरूकता ही इस बीमारी को फैलने से रोकने का सबसे प्रभावी तरीका है।
World Thalassemia Day 2022|थैलेसीमिया के मरीज इन बातों का रखें ध्यान - Thalassemia patients should keep these things in mind
राजा तूतनखामेन भी थे इसके शिकार
वैज्ञानिकों को सात हजार साल पुराने कंकालों में भी इसके निशान मिले हैं। साल 1925 में डॉक्टर थॉमस कूली ने पहली बार इसे दुनिया को समझाया। इसके दो मुख्य प्रकार हैं- माइनर जिसमें व्यक्ति सामान्य दिखता है और मेजर जिसमें मरीज को बार-बार बाहर से खून चढ़ाना पड़ता है। आज आधुनिक इलाज से इसे ठीक करना मुमकिन है।
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