आज से शुरू होगा आस्था का महापर्व चैती छठ, नोट करें जरूरी तारीखें
Kaushiki | Mar 12, 2026, 11:45 IST
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चैती छठ 2026 की शुरुआत आज22 मार्च से शुरू हो रहा है। नहाय-खाय, खरना और सूर्य अर्घ्य के साथ यह चार दिवसीय कठिन व्रत संतान सुख, लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए किया जाता है।
Latest Religious News:बिहार और उत्तर भारत में छठ पूजा का बहुत बड़ा महत्व है। साल में दो बार सूर्य देव की यह विशेष पूजा होती है। पहली छठ पूजा कार्तिक मास में और दूसरी चैत्र मास में मनाई जाती है। चैत्र माह में होने वाली पूजा को चैती छठ कहते हैं।
आज 22 मार्च से चैती छठ शुरू हो रही है। ये व्रत संतान की लंबी उम्र और सुख-शांति के लिए किया जाता है। चार दिनों तक चलने वाला ये अनुष्ठान बेहद कठिन माना जाता है।
छठी मैया की कृपा पाने के लिए लोग भूखे-प्यासे तप करते हैं। इस दौरान व्रती शुद्धता और सात्विकता का पूरा पालन करते हैं। आइए जानें इस महापर्व के हर दिन की पूरी कहानी।
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पंचांग के मुताबिक,
नहाय-खाय के दिन व्रती पवित्र स्नान कर सात्विक भोजन करते हैं। इस दिन लौकी की सब्जी और भात खाने की परंपरा है। खरना के दिन पूरे दिन उपवास रखने का नियम होता है। शाम को मिट्टी के चूल्हे पर गुड़ की खीर बनती है।
ये प्रसाद ग्रहण करने के बाद निर्जला उपवास शुरू हो जाता है। खरना का प्रसाद ग्रहण करना बहुत ही शुभ माना जाता है। शांति और शुद्ध मन से यह पूरी प्रक्रिया की जाती है।
चैती छठ के तीसरे दिन शाम को घाटों पर भीड़ होगी। व्रती डूबते सूर्य को अर्घ्य देकर अपनी मन्नतें मांगेंगे। 24 मार्च की शाम को पहला अर्घ्य अर्पित किया जाएगा। इसके बाद रात भर जागरण और छठी मैया के गीत होंगे।
25 मार्च की सुबह उगते सूर्य को अंतिम अर्घ्य मिलेगा। इसके साथ ही चार दिनों का यह महापर्व संपन्न हो जाएगा। सूर्य देव को जल और दूध से अर्घ्य दिया जाता है। ठेकुआ और फल इस महापर्व के मुख्य प्रसाद माने जाते हैं।
पंडितों के मुताबिक, ये व्रत सभी मनोकामनाएं पूरी करने वाला है। विशेष रूप से संतान प्राप्ति के लिए ये व्रत अचूक है। छठी मैया की कृपा से घर में खुशहाली और शांति आती है।
चैती छठ के दौरान देश कल्याण की भावना भी जुड़ी है। श्रद्धालु दूसरों की भलाई के लिए भी यह कठिन तप करते हैं। प्रशासन ने भी घाटों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। हर तरफ छठी मैया के गीतों से माहौल भक्तिमय रहेगा।
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
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आज 22 मार्च से चैती छठ शुरू हो रही है। ये व्रत संतान की लंबी उम्र और सुख-शांति के लिए किया जाता है। चार दिनों तक चलने वाला ये अनुष्ठान बेहद कठिन माना जाता है।
छठी मैया की कृपा पाने के लिए लोग भूखे-प्यासे तप करते हैं। इस दौरान व्रती शुद्धता और सात्विकता का पूरा पालन करते हैं। आइए जानें इस महापर्व के हर दिन की पूरी कहानी।
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चैती छठ 2026 की तिथियां
- चैती छठ पर्व की शुरुआत 22 मार्च को होगी। इस दिन नहाय-खाय के साथ व्रत का संकल्प लिया जाएगा।
- 23 मार्च को महापर्व का दूसरा दिन यानी खरना मनाया जाएगा। इस शाम व्रती प्रसाद ग्रहण कर 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू करेंगे।
- 24 मार्च को डूबते हुए सूर्य को पहला अर्घ्य दिया जाएगा।
- 25 मार्च को उगते सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत संपन्न होगा। चारों दिन सूर्य देव और छठी मैया की विशेष आराधना होगी।
नहाय-खाय और खरना का धार्मिक महत्व
ये प्रसाद ग्रहण करने के बाद निर्जला उपवास शुरू हो जाता है। खरना का प्रसाद ग्रहण करना बहुत ही शुभ माना जाता है। शांति और शुद्ध मन से यह पूरी प्रक्रिया की जाती है।
डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य देने का विधान
25 मार्च की सुबह उगते सूर्य को अंतिम अर्घ्य मिलेगा। इसके साथ ही चार दिनों का यह महापर्व संपन्न हो जाएगा। सूर्य देव को जल और दूध से अर्घ्य दिया जाता है। ठेकुआ और फल इस महापर्व के मुख्य प्रसाद माने जाते हैं।
संतान प्राप्ति और सुख-समृद्धि का फल
चैती छठ के दौरान देश कल्याण की भावना भी जुड़ी है। श्रद्धालु दूसरों की भलाई के लिए भी यह कठिन तप करते हैं। प्रशासन ने भी घाटों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। हर तरफ छठी मैया के गीतों से माहौल भक्तिमय रहेगा।
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
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कौन हैं छठी मैया? जानें क्या है छठ पूजा का महत्व, उगते और डूबते सूर्य को अर्घ्य देने के पीछे का धार्मिक महत्व
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