छग में वन्यजीवों का शिकार रोकने विभाग चिंतित, बस्तर में चलेगा विशेष अभियान, जनजाति समुदायों से समझेंगे मान्यता

VINAY VERMA | Feb 07, 2026, 20:08 IST
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छत्तीसगढ़ में अंधविश्वास के कारण उल्लू, कछुआ, बाघ और अन्य संरक्षित वन्य जीवों का अवैध शिकार लगातार बढ़ रहा है। तंत्र-मंत्र और धन प्राप्ति जैसी भ्रांतियों के चलते विशेष रूप से उल्लू को निशाना बनाया जा रहा है, उसकी संख्या पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है।

Raipur. छत्तीसगढ़ में सामाजिक अंधविश्वास के कारण वन्य जीवों के शिकार की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। खास तौर पर उल्लू-कछुवा को लेकर फैली मान्यताओं के चलते इसका अवैध शिकार बढ़ता जा रहा है। तंत्र-मंत्र, टोना-टोटका और धन प्राप्ति जैसी भ्रांतियों के कारण उल्लू का शिकारकिया जा रहा है, जिससे इसकी संख्या पर गंभीर असर पड़ रहा है।

विशेष अभियान चलाया जाएगा

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए वन विभाग ने शिकार की रोकथाम के लिए विशेष अभियान चलाने का फैसला किया है। इस अभियान के तहत संवेदनशील इलाकों की पहचान कर निगरानी बढ़ाई जाएगी और अवैध शिकार में संलिप्त लोगों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। वन विभाग का मानना है कि केवल कानूनी कार्रवाई से नहीं, बल्कि जागरूकता के माध्यम से ही इस समस्या पर प्रभावी नियंत्रण संभव है।

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जनजातीय समुदायों के संपर्क

विभाग जनजातीय समुदायों से सीधे संपर्क करेगा और उनके सामाजिक-सांस्कृतिक विश्वासों को समझते हुए एक विस्तृत जागरूकता डॉक्यूमेंट तैयार करेगा। इसमें यह बताया जाएगा कि अंधविश्वास के कारण वन्य जीवों के शिकार से न केवल जैव विविधता को नुकसान पहुंचता है, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन भी बिगड़ता है। यह डॉक्यूमेंट गांव-गांव पहुंचाकर लोगों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।

बाघ सहित अन्य वन्य जीवों पर फोकस

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार छत्तीसगढ़ में केवल उल्लू ही नहीं, बल्कि बाघ, कछुआ, सेंड बोआ जैसे संरक्षित वन्य जीवों का भी बड़ी संख्या में शिकार हो रहा है। तस्करी और अवैध व्यापार के लिए इन जीवों को मारा जा रहा है, जो वन्य जीव संरक्षण कानूनों का खुला उल्लंघन है। फिलहाल वन विभाग इसके कारणों के बारे में पता लगाने की कोशिश कर रहा है। सामाजिक और स्थानीय लोगों को साथ लेने की योजना बनाई गई है।

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अन्य विभागों से चर्चा

पीसीसीएफ अरुण पांडे का कहना है कि आने वाले दिनों में वन्य जीव अपराधों पर लगाम लगाने के लिए संयुक्त कार्रवाई की जाएगी, मुख्यालय स्तर पर विभागों के साथ चर्चा की जा रही है। इसके अलावा जनजागरूकता अभियान और स्थानीय समुदायों की भागीदारी को और मजबूत किया जाएगा, ताकि छत्तीसगढ़ की समृद्ध जैव विविधता को सुरक्षित रखा जा सके।

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