सरकारी कॉलेज घोटाला; बिना ऑडिट डकार गए करोड़ों का बजट, कागजों में खरीद लिए करोड़ों के फर्नीचर और कंप्यूटर!
Umeshwari Baghel | Apr 12, 2026, 08:49 IST
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प्रदेश के 200 से अधिक सरकारी कॉलेजों में 67.37 करोड़ रुपये की खरीदी में गड़बड़ी का मामला सामने आया हैं। जांच रिपोर्ट में वित्तीय अनियमितताओं का पता चला हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई हैं।
NEWS IN SHORT
- 67 करोड़ रुपये की खरीदी गड़बड़ी पर पर्दा नहीं डाला जा सकता हैं
- कोरोना में बंद कॉलेजों में 10 करोड़ की फर्जी खरीदी की गई हैं
- फर्नीचर और आईटी उपकरणों पर 70% खर्च का अनुमान हैं
- शिकायतकर्ता के झूठे आरोपों के बावजूद जांच में गड़बड़ी हुई हैं
- मंत्री ने कहा- इस मामले की जल्द जांच होगी
NEWS IN DETAIL
रिपोर्ट में यह पाया गया कि कई मामलों में यह भी नहीं पता चला कि सामग्री खरीदी भी गई थी या नहीं। न ही इसका ऑडिट कराया गया, न ही उपयोगिता प्रमाण पत्र लिया गया।
सिर्फ जांच, कार्रवाई कुछ भी नहीं
कोरोना के दौरान बंद कॉलेजों में हुई खरीदारी
बजट का 70% तीन मदों में खर्च
क्योंकि इसमें नियमों का उल्लंघन करते हुए फर्नीचर को अलग-अलग भागों में बांटा गया था। स्थानीय स्तर पर 3 कोटेशन मंगाकर चहेती फर्मों को फायदा पहुंचाया गया, और कई फर्मों का पता चला कि वे एक ही परिवार से संबंधित थीं।
मंत्री ने जांच कराने का वादा किया
शिकायतकर्ता ने बाद में आरोपों को झूठा बताया
कि ग्वालियर के अरुण प्रकाशन से साठगांठ कर प्राचार्यों को तबादले की धमकी देकर किताबें और अन्य सामग्री खरीदी गई थी। हालांकि, शिकायतकर्ता ने बाद में इसे फर्जी बताया, लेकिन विभाग ने इसे आधार बनाकर जांच की
दिशा बदल दी। सवाल अब यह उठता है कि अगर शिकायत झूठी थी तो क्या जांच में मिली गड़बड़ी और बिना ऑडिट किए खर्च हुए करोड़ों की राशि भी फर्जी हो गई?
विशेषज्ञों ने क्या कहा
तय नियमों के मुताबिक खरीदी हुई या नहीं, इसकी जिम्मेदारी किस अफसर की थी, इसको जाँच होनी चाहिए थी। अगर गड़बड़ी हुई तो शासन को इसका नुकसान कितना हुआ, यह भी ध्यान में रखा जाना चाहिए था।
निष्कर्ष
और न ही जिम्मेदार अधिकारियों पर कोई कार्रवाई की गई। यह मामला राज्य सरकार के शिक्षा विभाग में बड़े सवाल खड़े कर रहा है।
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