बच्चा नाजायज है फिर भी देना होगा गुजारा भत्ता, जानिए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने क्यों सुनाया ये फैसला
Harrison Masih | Feb 03, 2026, 18:40 IST
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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पति-पत्नी विवाद मामले में स्पष्ट किया है कि सीआरपीसी की धारा 125 के तहत अवैध संतान भी अपने पिता से भरण-पोषण पाने की हकदार है। कोर्ट ने कहा कि यह प्रावधान बच्चों को बेसहारा होने से बचाने के लिए बनाया गया है।
NEWS IN SHORT
- छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पति की याचिका खारिज की
- अवैध संतान भी पिता से भरण-पोषण पाने की हकदार
- सीआरपीसी धारा 125 को बताया कल्याणकारी प्रावधान
- पति को बेटे के लिए भरण-पोषण देना अनिवार्य
- फैमिली कोर्ट के आदेश को हाईकोर्ट ने सही ठहराया
NEWS IN DETAIL
हाईकोर्ट का अहम फैसला
मामला बेमेतरा जिले के एक युवक से जुड़ा है, जिसकी शादी 22 अप्रैल 2016 को हुई थी। इसके बाद 18 मई 2016 को गौना की रस्म हुई और पत्नी ससुराल आई। गौना के केवल पांच महीने बाद, 22 अक्टूबर 2016 को पत्नी ने एक बच्चे को जन्म दिया।
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पति का आरोप और रिश्ता टूटना
पत्नी ने भरण-पोषण के लिए फैमिली कोर्ट में याचिका दायर की। फैमिली कोर्ट ने पत्नी और बच्चे के भरण-पोषण का आदेश दिया।
हालांकि, तलाक के मामले में कोर्ट ने माना कि पत्नी शादी से पहले गर्भवती थी और इसे पति के प्रति क्रूरता करार देते हुए तलाक की डिक्री जारी की।
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भरण-पोषण पर विवाद
पति ने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी। उसने तर्क दिया कि जब बच्चा उसका जैविक पुत्र नहीं है, तो भरण-पोषण क्यों दिया जाए। हाईकोर्ट ने यह तर्क खारिज करते हुए कहा कि बच्चे को संरक्षण देना कानून की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
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Sootr Knowledge
- सीआरपीसी धारा 125 बच्चों और महिलाओं के लिए सामाजिक सुरक्षा कानून
- इस धारा का उद्देश्य भिखारी या बेसहारा होने से बचाना
- जैविक पिता न होने पर भी कानूनी जिम्मेदारी तय हो सकती है
- फैमिली कोर्ट और हाईकोर्ट दोनों का दृष्टिकोण अलग-अलग हो सकता है
- ऐसे फैसले सामाजिक न्याय को मजबूत करते हैं
IMP FACTS
- कोर्ट: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
- धारा: सीआरपीसी 125 और 127
- बच्चा जन्म: 22 अक्टूबर 2016
- मासिक भरण-पोषण: ₹1,000
- फैसला: पति की याचिका खारिज
आगे क्या
- पति को हाईकोर्ट के आदेश का पालन करना होगा
- सुप्रीम कोर्ट में अपील का विकल्प खुला
- भरण-पोषण की राशि पर पुनर्विचार की याचिका संभव
निष्कर्ष
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