विधानसभा में गरजे कवासी लखमा, बोले- बस्तर में जंगल बचेगा की नहीं

Harrison Masih | Feb 25, 2026, 20:16 IST
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छत्तीसगढ़ विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान कोंटा विधायक कवासी लखमा ने सरकार को कई मुद्दों पर घेरा। उन्होंने लेकिन बस्तर के जंगल, अबूझमाड़ और बैलाडीला को लेकर आदिवासियों की चिंता जाहिर की।

NEWS IN SHORT

  • कोंटा विधायक कवासी लखमा ने विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान सरकार को घेरा।
  • नक्सलवाद पर कार्रवाई के लिए केंद्र को धन्यवाद, लेकिन आदिवासियों में जंगल बचाने को लेकर डर जताया।
  • किसानों की स्थिति को लेकर कहा- “अंग्रेजों के समय से भी ज्यादा परेशान हैं किसान।”
  • पंचायतों को फंड की कमी, सड़क और पुल निर्माण कार्य ठप्प होने का आरोप।
  • कानून व्यवस्था, वनोपज खरीदी और बिजली बिल को लेकर सरकार पर सवाल उठाए।

NEWS IN DETAIL

“जंगल है तो जीवन है”

छत्तीसगढ़ विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान कोंटा विधायक कवासी लखमा ने करीब 25 मिनट तक अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि बस्तर में नक्सलवाद के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई के लिए केंद्र और राज्य सरकार की सराहना की जानी चाहिए।

लेकिन साथ ही उन्होंने कहा कि अब आदिवासियों के मन में नया डर है—जंगल बचेगा या नहीं, अबूझमाड़ और बैलाडीला सुरक्षित रहेंगे या नहीं। उन्होंने कहा, “हम आदिवासियों के लिए जंगल सिर्फ जंगल नहीं, बल्कि जीवन है।”

किसान सबसे ज्यादा परेशान

कवासी लखमा ने सरकार के तीन साल के कार्यकाल पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रदेश में किसान सबसे ज्यादा परेशान हैं। उन्होंने कहा, “किसान अंग्रेजों के समय भी इतने परेशान नहीं थे।”

धान खरीदी, हड़तालों और नल-जल योजना की स्थिति पर भी उन्होंने सवाल उठाए। उनका आरोप था कि कई जगह पाइपलाइन खराब है और पानी नहीं मिल रहा।

पंचायत और विकास कार्य ठप्प

लखमा ने कहा कि पंचायतों को पर्याप्त राशि नहीं मिल रही और सरपंचों के अधिकार सीमित कर दिए गए हैं। उन्होंने अपनी विधानसभा का उदाहरण देते हुए कहा कि सरकार बदलने के बाद चार पुलों का निर्माण रोक दिया गया।

उनका आरोप था कि प्रदेश में अफसर सरकार चला रहे हैं।

वनोपज और महतारी वंदन योजना पर सवाल

उन्होंने कहा कि पहले 52 प्रकार की वनोपज की खरीदी होती थी, लेकिन अब यह व्यवस्था कमजोर हो गई है। तेंदूपत्ता और अन्य वनोपज को लेकर भी उन्होंने चिंता जताई।

महतारी वंदन योजना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार महिलाओं को 1000 रुपए दे रही है, लेकिन बिजली बिल लाखों में भेजे जा रहे हैं।

कानून व्यवस्था पर हमला

कवासी लखमा ने प्रदेश में बढ़ते अपराध, बलात्कार और गोलीबारी की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि “छोटा सा छत्तीसगढ़, बिहार को पीछे छोड़ रहा है।”

Knowledge

  • अबूझमाड़ और बैलाडीला बस्तर क्षेत्र के संवेदनशील और खनिज संपन्न इलाके हैं।
  • तेंदूपत्ता और वनोपज आदिवासी अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा हैं।
  • महतारी वंदन योजना के तहत महिलाओं को आर्थिक सहायता दी जाती है।
  • नल-जल योजना का उद्देश्य हर घर तक स्वच्छ पानी पहुंचाना है।
  • राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान विधायक सरकार की नीतियों पर चर्चा करते हैं।

IMP FACTS

  • कवासी लखमा ने लगभग 25 मिनट तक सदन में भाषण दिया।
  • नक्सलवाद पर कार्रवाई की सराहना, लेकिन जंगल सुरक्षा को लेकर चिंता।
  • किसानों की हालत पर कड़ी टिप्पणी।
  • 52 वनोपज खरीदी व्यवस्था कमजोर होने का आरोप।
  • कानून व्यवस्था को लेकर सरकार पर निशाना।

आगे क्या

  • सरकार विपक्ष के आरोपों पर जवाब दे सकती है।
  • वन, किसान और पंचायत से जुड़े मुद्दों पर नीति स्तर पर चर्चा संभव।
  • विधानसभा में इस विषय पर आगे भी बहस जारी रह सकती है।

निष्कर्ष

विधानसभा में कवासी लखमा का भाषण बस्तर, आदिवासी हित, किसान समस्याओं और कानून व्यवस्था जैसे मुद्दों पर केंद्रित रहा। जहां उन्होंने नक्सलवाद पर कार्रवाई की सराहना की, वहीं जंगलों की सुरक्षा, किसानों की स्थिति और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सरकार को कठघरे में खड़ा किया। अब देखना होगा कि सरकार इन आरोपों और चिंताओं पर क्या जवाब देती है।

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