जीवित वृद्धा को मृत बताकर जमीन हड़पने का खेल, भैयाथान तहसीलदार निलंबित

Krishna Kumar Sikander | Jun 14, 2025, 11:08 IST
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The game of grabbing land by declaring a living old lady as dead, Bhaiyyathan Tehsildar suspended the sootr
The game of grabbing land by declaring a living old lady as dead, Bhaiyyathan Tehsildar suspended the sootr

छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले के भैयाथान तहसील में तहसीलदार संजय राठौर के खिलाफ गंभीर अनियमितता के आरोप में निलंबन की कार्रवाई की गई है। उन पर 87 वर्षीय जीवित वृद्धा शेलकुमारी को कागजों में मृत दिखाकर उनकी जमीन का अनुचित नामांतरण करने का आरोप है।

छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले के भैयाथान तहसील में तहसीलदार संजय राठौर के खिलाफ गंभीर अनियमितता के आरोप में निलंबन की कार्रवाई की गई है। उन पर 87 वर्षीय जीवित वृद्धा शेलकुमारी को कागजों में मृत दिखाकर उनकी जमीन का अनुचित नामांतरण करने का आरोप है। इस मामले में वृद्धा की शिकायत के बाद जांच में तहसीलदार को प्रथम दृष्टया दोषी पाया गया, जिसके आधार पर सरगुजा कमिश्नर नरेंद्र दुग्गा ने उन्हें निलंबित कर दिया। निलंबन के साथ ही संजय राठौर को बलरामपुर कलेक्टर कार्यालय में अटैच किया गया है।

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ऐसे किया गया कारनामा

यह मामला सुरजपुर जिले के भैयाथान तहसील क्षेत्र से जुड़ा है, जहां शेलकुमारी नाम की 87 वर्षीय वृद्धा ने अपनी जमीन के नामांतरण में धोखाधड़ी की शिकायत की थी। शिकायत के अनुसार, तहसीलदार संजय राठौर ने कथित तौर पर वृद्धा को कागजात में मृत घोषित कर उनकी जमीन का नामांतरण करवा दिया। इस अनियमितता से वृद्धा को उनकी संपत्ति से वंचित करने की कोशिश की गई। शेलकुमारी ने इस मामले की शिकायत पहले सूरजपुर कलेक्टर से की, जिसके बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के आदेश दिए गए।

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जांच और कार्रवाई

्रकलेक्टर के निर्देश पर तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया गया। इस समिति ने मामले की विस्तृत जांच की और पाया कि तहसीलदार संजय राठौर ने नियमों का उल्लंघन करते हुए गलत तरीके से नामांतरण प्रक्रिया को अंजाम दिया। जांच रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि तहसीलदार ने अपने पद का दुरुपयोग किया और भोले-भाले लोगों को ठगने के लिए भ्रष्टाचार में लिप्त थे। जांच के निष्कर्षों को सरगुजा कमिश्नर नरेंद्र दुग्गा के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जिन्होंने तत्काल प्रभाव से संजय राठौर को निलंबित करने का आदेश जारी किया। निलंबन के बाद उन्हें बलरामपुर कलेक्टर कार्यालय में अटैच कर दिया गया, जहां उनकी गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी।

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पूर्व में भी विवादों में रहे संजय राठौर

संजय राठौर का नाम पहले भी भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के आरोपों में सामने आ चुका है। भैयाथान तहसील कार्यालय में उनके कार्यकाल के दौरान कई बार जमीन से जुड़े विवादों में उनका नाम उछला। एक अन्य मामले में, कोयलारी गांव में सामूहिक खाते की जमीन के बंटवारे में अनियमितता का आरोप लगा था। शिकायतकर्ताओं ने दावा किया था कि राठौर ने फर्जी दस्तावेजों और कथित आपसी समझौते के आधार पर अपने चहेतों को लाभ पहुंचाया और अपनी पत्नी शारदा राठौर के नाम 30 डिसमिल जमीन का नामांतरण करवाया। इस मामले में भी उच्च न्यायालय बिलासपुर में प्रकरण लंबित है, लेकिन राठौर ने जांच के दौरान पक्षपातपूर्ण कार्रवाई की थी।

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सामाजिक और प्रशासनिक प्रभाव

इस घटना ने सूरजपुर जिले में प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं, खासकर भूमि संबंधी मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर। भोले-भाले ग्रामीणों, विशेषकर बुजुर्गों और महिलाओं, के साथ इस तरह की धोखाधड़ी ने स्थानीय लोगों में आक्रोश पैदा किया है। शेलकुमारी जैसे पीड़ितों के लिए यह कार्रवाई राहत की बात है, लेकिन यह मामला जमीनी स्तर पर भ्रष्टाचार की गहरी जड़ों को भी उजागर करता है।

प्रशासन का रुख

सरगुजा कमिश्नर नरेंद्र दुग्गा ने इस मामले में सख्त रवैया अपनाते हुए स्पष्ट किया कि भ्रष्टाचार और अनियमितता के खिलाफ कोई ढील नहीं बरती जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रशासन जनता की सेवा के लिए है और किसी भी अधिकारी के गलत कार्यों को बख्शा नहीं जाएगा। इस निलंबन को एक चेतावनी के रूप में भी देखा जा रहा है, ताकि अन्य अधिकारी नियमों का पालन करें और जनता के हितों की रक्षा करें।

राठौर के खिलाफ जारी रहेगी जांच

निलंबन के बाद संजय राठौर के खिलाफ विभागीय जांच जारी रहेगी। यदि जांच में उनके खिलाफ ठोस सबूत मिले, तो उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमा भी दर्ज किया जा सकता है। साथ ही, इस मामले में शामिल अन्य व्यक्तियों, जैसे कि भूमि दलालों या सहयोगियों, की भूमिका की भी जांच की जा रही है। शेलकुमारी की जमीन को उनके नाम वापस करने की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी, ताकि उन्हें उनका हक मिल सके।

भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रशासन की सख्ती

भैयाथान तहसीलदार संजय राठौर का निलंबन छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रशासन की सख्ती को दर्शाता है। यह मामला न केवल एक वृद्धा के साथ हुए अन्याय की कहानी है, बल्कि यह भी दिखाता है कि सही समय पर शिकायत और जांच से भ्रष्ट अधिकारियों को जवाबदेह ठहराया जा सकता है। इस कार्रवाई से अन्य पीड़ितों को भी अपनी आवाज उठाने का हौसला मिलेगा।



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