पशुपालन विभाग की 128 नियुक्तियों पर विवाद : इस भर्ती में डिप्लोमा होल्डरों की अनदेखी

Sanjay Sharma | May 01, 2026, 18:33 IST
Share
Animal Husbandry Department
Animal Husbandry Department

BHOPAL: पशुपालन विभाग ने 27 अप्रैल को सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारी के 128 पदों पर डिग्रीधारियों को नियुक्ति दी। डिप्लोमा होल्डरों की प्रतीक्षा सूची नहीं बनाई गई। इसके स्थान पर 'Over and Above' सिद्धांत अपनाया गया।

News in Short

  • डिग्रीधारियों को AVFO के 128 खाली पदों पर नियुक्ति आदेश जारी।
  • 2024 की संयुक्त भर्ती में डिप्लोमाधारी अभ्यर्थियों की हुई बड़ी अनदेखी।
  • ईएसबी द्वारा डिप्लोमा होल्डरों को वेटिंग लिस्ट से भी रखा गया बाहर।
  • Over and Above को आधार बनाकर नियुक्ति की सफाई।
  • हाईकोर्ट में याचिका की सुनवाई पर दिए निर्देशों को किया नजरअंदाज।

News in Detail

सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारी (AVFO) की नियुक्ति में मध्य प्रदेश पशुपालन विभाग से बड़ी चूक हुई है। विभाग ने 2024 की संयुक्त भर्ती के आधार पर जो नियुक्ति दी है उनमें सभी अभ्यर्थी डिग्रीधारी हैं। वहीं साल भर से नियुक्ति की आस लगाए बैठे डिप्लोमाधारियों को इससे दूर रखा गया है।

भर्ती प्रक्रिया में डिग्रीधारियों को प्राथमिकता देने पर हाईकोर्ट पहुंची याचिका पर सुनवाई भी हो चुकी है। निर्देशों की अनदेखी हाईकोर्ट की इंदौर बेंच अधिकारियों पर जुर्माना भी लग चुका है। इसके बावजूद 128 पदों पर एकतरफा डिग्रीधारियों की नियुक्ति सवालों के घेरे में आ गई है।

नहीं दी डिप्लोमा होल्डर्स को प्राथमिकता

मध्यप्रदेश में पशुपालन एवं डेयरी विकास विभाग के लिए ईएसबी द्वारा संयुक्त भर्ती परीक्षा का आयोजन किया गया था। यह भर्ती सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारी के 632 पदों के लिए हुई थी। फरवरी 2025 में संयुक्त परीक्षा के आधार पर रिजल्ट जारी किया गया।

इसमें ओबीसी आरक्षण के 13 प्रतिशत और पूर्व सैनिकों के लिए सुरक्षित 55 पदों को छोड़कर 497 पदों पर मेरिट जारी की गई थी। पिछली भर्तियों की तरह सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारी के इन पदों पर डिग्री होल्डरों को प्राथमिकता देने पर मामला हाईकोर्ट पहुंच गया था।

हाईकोर्ट जबलपुर ने डिप्लोमाधारियों को ही प्राथमिकता देने के आदेश दिया। पशुपालन एवं डेयरी विकास विभाग द्वारा आदेश की अनदेखी की कोशिश होने पर अवमानना याचिका लगाई गई। इस पर विभागीय अधिकारियों पर पांच हजार रुपए का जुर्माना भी हाईकोर्ट ने लगाया था।

जुर्माने के बाद भी की मनमानी

हाईकोर्ट बेंच इंदौर से जुर्माना लगने के बाद पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने ऐसी व्यूह रचना की, जिससे किसी को फर्जीवाड़े का पता ही न लग सके। जिन 497 पदों पर मैरिट जारी की गई थी उसमें खेल की शुरुआत हुई। मैरिट सूची में से केवल 321 पदों पर नियुक्ति के लिए सूची जारी की गई और शेष 176 पदों पर नियुक्ति होल्ड कर दी गई।

मैरिट के पद खाली होने के बावजूद 15 फीसदी पदों पर वेटिंग भी जारी कर दी गई। अभ्यर्थी कुछ समझ पाते तभी होल्ड किए पदों पर सूची जारी कर दी गई। सूची सामने आने के साथ ही पशुपालन विभाग में नियुक्ति में फर्जीवाड़े की परतें सामने आनी शुरू हुई। अभ्यर्थियों ने सूची खंगाली तो पता चला कि ज्यादातर लोगों को पहली सूची के आधार पर नियुक्ति मिल चुकी है।

अभ्यर्थियों को दी गलत जानकारी

इस सूची में वास्तविक पात्र केवल 38 अभ्यर्थी ही थे, जिनकी नियुक्ति के बाद 138 पद एक बार फिर खाली रह गए। उधर वेटिंग के 78 पदों पर भी नियुक्ति जारी रखी गई, जिससे खाली पदों की स्थिति छिपी रहे। दूसरी लिस्ट जारी होने के बाद खाली रहे 138 पदों पर ज्वानिंग के लिए डिप्लोमाधारी कई महीनों तक इंतजार करते रहे।

अभ्यर्थियों ने इसको लेकर कर्मचारी चयन मंडल से वेटिंग लिस्ट जारी करने के संबंध में संपर्क भी किया। जवाब में ईएसबी ने पत्र क्रमांक 02-9/2024/08/ प-2/10086/2025 के जरिए पदों के विरुद्ध वेटिंग लिस्ट शेष न होने की जानकारी दी। इसका मतलब था कि सभी पदों पर नियुक्ति हो चुकी है।

मैरिट कैंडिडेट को किया होल्ड

कर्मचारी चयन मंडल के इस पत्र ने भी पशुपालन विभाग के अधिकारियों के गोलमाल को उजागर कर दिया था। अभ्यर्थियों के चक्कर काटने के बावजूद पशुपालन विभाग संचालनालय उन्हें टालता रहा। ऐसे में संचालनालय से 27 अप्रैल 2026 को जारी नियुक्ति आदेशों ने फर्जीवाड़े पर मुहर लगा दी है।

अभ्यर्थियों का कहना है कि पशुपालन विभाग ने नियुक्ति प्रक्रिया के दौरान भ्रमित करने के लिए ही मैरिट के आधे पदों पर नियुक्ति और आधे पदों को होल्ड किया था।

जब मैरिट के पद होल्ड थे तब वेटिंग लिस्ट जारी करने का कोई सवाल ही नहीं है, लेकिन ऐसा किया गया। सूचियों में पहले से नियुक्त अभ्यर्थियों के नाम जोड़े और हटाए जाते रहे। इस वजह से खाली पदों की संख्या का अनुमान गड़बड़ा गया।

डिग्री होल्डरों को थोकबंद नियुक्ति

पशुपालन एवं डेयरी विकास संचालनालय में महीनों तक 138 पदों पर नियुक्ति की स्थिति छिपाकर रखी गई। अब इनमें से 128 पदों पर जो नियुक्ति आदेश जारी किए गए हैं वे सभी डिग्रीधारियों के हैं। यानी हाईकोर्ट के निर्देश और अवमानना याचिका पर हुए जुर्माने के नजरअंदाज कर डिग्रीहोल्डरों को थोकबंद नियुक्ति दी गई है।

अभ्यर्थियों का आरोप है कि पशुपालन विभाग एवं डेयरी विकास संचालनालय में उच्च पदों पर बैठे पशु चिकित्सा विभाग के अधिकारी संपर्कों के आधार पर नियुक्तियां बांट रहे हैं। भर्ती की रूल बुक और हाईकोर्ट द्वारा डिप्लोमा होल्डरों को प्राथमिकता देने के निर्देश को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया है।

पद खाली थे तो क्यों नहीं बनी वेटिंग

एवीएफओ भर्ती के अभ्यर्थियों का कहना है कि संचालनालय द्वारा महीनों तक 138 पदों को छिपाकर रखा गया। यदि इतने पद खाली थे तब मैरिट और पूर्व में जारी 15 प्रतिशत वेटिंग से इन्हें क्यों नहीं भरा गया। अब अधिकारी पात्रता की सफाई दे रहे हैं जबकि भर्ती प्रक्रिया की चयन सूची में पात्रता रखने वाले डिप्लोमा होल्डर की संख्या कहीं ज्यादा है। इन पदों पर नियुक्ति से पहले वेटिंग लिस्ट नहीं बनाना और गुपचुप नियुक्त आदेश जारी करना पारदर्शिता को प्रभावित करता है।

हाईकोर्ट के निर्णय से पहले मनमानी

एवीएफओ के पदों पर भर्ती का मामला जबलपुर हाईकोर्ट में विचाराधीन है। वहीं इंदौर हाईकोर्ट बेंच अवमानना याचिका पर पशुपालन विभाग के अधिकारी, डायरेक्टर एवं सचिव को वारंट जारी कर पांच हजार का जुर्माना लगा चुकी है। इसके संबंध में विभाग को जवाब पेश करना भी मुश्किल हो रहा है। इसके बावजूद AVFO के 128 पदों पर डॉक्टर लिखकर नियुक्ति पत्र जारी किए गए हैं। जबकि ये पद पशु चिकित्सक के लिए नहीं हैं। ये भर्ती पशु चिकित्सा सहायक के लिए हुई है।

ऐसे समझें पूरा मामला

  • दिसंबर 2024 में ईएसबी ने पशुपालन एवं डेयरी विकास विभाग के लिए भर्ती का नोटिफिकेशन जारी किया।
  • फरवरी 2025 से लिखित परीक्षा शुरू हुई जिसका रिजल्ट अप्रैल 2026 में आया जिसके आधार पर मैरिट जारी की गई।
  • 13% पद ओबीसी आरक्षण के तहत जबकि पूर्व सैनिकों के 55 पदों को छोड़कर 497 पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की गई।
  • पहली सूची में 497 की जगह केवल 321 पर सूची जारी हुई शेष 176 पदों को होल्ड कर दिया गया।
  • मैरिट होने के बावजूद पद होल्ड नहीं किए जाने थे लेकिन इन पदों पर नियुक्ति से पहले 15 फीसदी वेटिंग भी जारी कर दी गई।
  • दूसरी सूची में उन लोगों को शामिल किया गया जिन्हें पहली सूची के आधार पर नियुक्ति मिल चुकी थी।
  • मैरिट और वेटिंग लिस्ट के बीच पद होल्ड करने और नियुक्ति देने से पदों पर आरक्षण की स्थिति भी गड़बड़ा गई।
  • 138 पद खाली होने के बावजूद नियुक्ति प्रक्रिया पूरी होने का हवाला देकर अभ्यर्थियों को टाल दिया गया।
  • अप्रैल 2025 में रिजल्ट जारी होने से लेकर मार्च 2026 तक टालमटोल की जाती रही ताकि भर्ती प्रक्रिया का एक साल पूरा हो जाए।
  • अब इस मामले में पशुपालन विभाग की मनमानी के खिलाफ सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारी सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी के जरिए लड़ाई लड़ेंगे।

ये भी उठ रहे हैं सवाल

  • जिन 128 पदों पर मार्च 2026 में नियुक्ति दी गई उनकी रिक्त सूची सूची सार्वजनिक क्यों नहीं की गई।
  • नियुक्तियां संचालनालय में किस अधिकारी के आदेश पर की गई हैं, क्यों विभागीय स्तर पर अनुमति ली गई थी।
  • नियुक्ति प्रक्रिया में पदों पर आरक्षण का पालन क्या भर्ती विज्ञापन के अनुरूप किया गया है।
  • हाईकोर्ट जबलपुर के निर्देश और अवमानना याचिका पर इंदौर हाईकोर्ट बेंच के जुर्माने के बाद डिग्रीधारियों की नियुक्ति का आधार क्या है।
  • जो नियुक्ति आदेश जारी किए गए उनके लिए चयन समिति का गठन कब और किस आदेश के जरिए किया गया।

ये भी पढ़ें...

8वां वेतन आयोग: कर्मचारी और पेंशनर संगठनों ने की 3 मांग, जानें और क्या रखी डिमांड

एमपी में ऑपरेशन मुस्कान ने हजारों गुमशुदा बच्चियों को दी नई जिंदगी, जानें क्या कहते हैं आंकड़े

2 मई से शुरू एमपी अतिथि शिक्षक भर्ती 2026 प्रक्रिया, डिजिटल स्कोर कार्ड से होगा चयन, जानें डिटेल

रीवा में कमर्शियल सिलेंडर के दाम 3300 के पार, एमपी के किस शहर में क्या है नया रेट, देखें लिस्ट

Tags:
  • मध्यप्रदेश
  • जबलपुर हाईकोर्ट
  • कर्मचारी चयन मंडल
  • ओबीसी आरक्षण
  • ईएसबी
  • पशुपालन विभाग
गूगल पर द सूत्र चुनें ! Add as a preferredsource on Google
छत्तीसगढ़ कांग्रेस का कलेक्ट्रेट घेराव, पुलिस से झूमाझटकी, भूपेश बघेल बोले ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें

By Arun Tiwari

छत्तीसगढ़ कांग्रेस का कलेक्ट्रेट घेराव, पुलिस से झूमाझटकी, भूपेश बघेल बोले ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें
मध्य प्रदेश में 1 अक्टूबर से राशन दुकानें बंद, राशन विक्रेता संघ ने 5 मांगों पर दी चेतावनी

By Sandeep Kumar

मध्य प्रदेश में 1 अक्टूबर से राशन दुकानें बंद, राशन विक्रेता संघ ने 5 मांगों पर दी चेतावनी
IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी

By VINAY VERMA

IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी
राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं

By Ashish Bhardwaj

राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं
पाटन चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, भूपेश बघेल की आपत्ति पर पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करेगा सुनवाई

By Arun Tiwari

पाटन चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, भूपेश बघेल की आपत्ति पर पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करेगा सुनवाई
भोपाल की सेज यूनिवर्सिटी में छात्रों का हंगामा: हॉस्टल मेस के खाने में कीड़े मिलने का आरोप, अब खाद्य विभाग करेगा जांच

By Jitendra Shrivastava

भोपाल की सेज यूनिवर्सिटी में छात्रों का हंगामा: हॉस्टल मेस के खाने में कीड़े मिलने का आरोप, अब खाद्य विभाग करेगा जांच
UPI एमडीआर पर सुप्रीम कोर्ट का रोक से इनकार: 15 अक्टूबर से दुकानदारों को देना होगा 0.4 फीसदी चार्ज

By Sanjay Dhiman

UPI एमडीआर पर सुप्रीम कोर्ट का रोक से इनकार: 15 अक्टूबर से दुकानदारों को देना होगा 0.4 फीसदी चार्ज