एमपी में अमृत योजना 2.0 की रफ्तार धीमी, हर घर नल-जल का सपना अधूरा

Ramanand Tiwari | Jan 15, 2026, 22:56 IST
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dream of tap water in every house unfulfilled
Photograph: (the sootr)

अमृत योजना 2.0 के तहत मध्य प्रदेश के शहरों में 'हर घर नल' का काम सुस्त रफ्तार से चल रहा है। फंड की कमी और प्रशासनिक अनदेखी के कारण लक्ष्य अधूरा है।

NEWS IN SHORT

  • अमृत योजना 2.0 के तहत शहरी क्षेत्रों में पानी और सीवेज नेटवर्क की सुविधा का लक्ष्य अधूरा।
  • 50% प्रगति हुई, लेकिन बड़े शहरों में काम धीमी गति से चल रहा है।
  • केंद्र सरकार 25-50% तक अनुदान देती है, बाकी राशि निकायों को खुद जुटानी होती है।
  • वेतन संकट और लोन की हिचकिचाहट से कई निकाय परियोजनाओं में पीछे हट रहे हैं।
  • समय सीमा 2026 तक तय, लेकिन योजना की रफ्तार को देखकर 2028 तक काम पूरा होने की संभावना है।

NEWS IN DETAIL

BHOPAL. केंद्र सरकार की अमृत 2.0 योजना के तहत प्रदेश के शहरी इलाकों में हर घर तक नल से पानी और सीवेज नेटवर्क पहुंचाने का सपना फिलहाल आधा ही पूरा हो सका है। भोपाल, इंदौर सहित प्रदेश के 413 नगरीय निकायों में यह काम बीते एक साल से जारी है, लेकिन अब तक सिर्फ 50 प्रतिशत प्रगति ही हो पाई है।

हर घर नल का लक्ष्य, हजारों करोड़ का निवेश

अमृत योजना 2.0 के तहत प्रदेश में कुल 12,858.71 करोड़ रुपए के कार्य प्रस्तावित हैं। इसमें पानी सप्लाई और सीवेज नेटवर्क दोनों शामिल हैं।
जल प्रदाय के कार्य: ₹4,571.01 करोड़
सीवेज नेटवर्क: ₹2,742.16 करोड़

सरकार का लक्ष्य है कि शहरी क्षेत्रों में हर परिवार को साफ पानी और बेहतर सीवेज सुविधा मिले।

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बड़े शहरों में करोड़ों के काम अटके

भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, सागर और बुरहानपुर जैसे बड़े नगर निगमों में कई करोड़ों के प्रस्ताव अक्टूबर-नवंबर तक एमआईसी (Mayor-in-Council) में अटके रहे। इन्हीं प्रशासनिक देरी के कारण जमीनी काम भी धीमा पड़ गया।

वेतन संकट से जूझ रहे निकाय, लोन लेने में हिचक

अमृत 2.0 में केंद्र सरकार 25 से 50 फीसदी तक अनुदान दे रही है। लेकिन बाकी राशि निकायों को खुद जुटानी है, जिसके लिए लोन लेने का विकल्प दिया गया है। समस्या यह है कि खंडवा, बुरहानपुर, सागर, मुरैना, छिंदवाड़ा जैसे कई निकायों में कर्मचारियों का वेतन तक समय पर नहीं बंट पा रहा। ऐसे में नए कर्ज लेने से निकाय पीछे हट रहे हैं।

5 साल में काम पूरा करने का लक्ष्य

केंद्र सरकार ने अमृत योजना 2.0 को पूरा करने के लिए 5 साल की समय सीमा तय की थी, जो 2026 में समाप्त हो रही है। हालांकि, मौजूदा रफ्तार को देखते हुए निकायों का आकलन है कि पूरा काम 2028 तक ही पूरा हो पाएगा।

निकायों पर आर्थिक दबाव बढ़ा-

प्रदेश अध्यक्ष, मप्र नगर पालिका संघ सुरेन्द्र सोलंकी का कहना है-“कई निकाय पहले से बैंकों के लोन की किस्तें चुका रहे हैं। वेतन संकट के बीच अमृत 2.0 के लिए नया कर्ज लेना व्यावहारिक नहीं है।”

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उम्मीद और हकीकत के बीच अमृत 2.0

अमृत 2.0 योजना शहरी भारत के लिए जरूरी और दूरदर्शी कदम है। लेकिन आर्थिक तंगी, प्रशासनिक देरी और लोन की मजबूरी इसके रास्ते की सबसे बड़ी अड़चन बनती जा रही है। यदि फंडिंग मॉडल और निर्णय प्रक्रिया में तेजी नहीं आई, तो हर घर नल का सपना समय से पहले कागजों में ही सिमट सकता है।



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