भोपाल में 90 डिग्री का पुल बनाने वाले अफसर को बचाने की तैयारी

Amresh Kushwaha | Feb 28, 2026, 15:58 IST
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bhopal 90 degree bridge officer suspension relief
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भोपाल में 90 डिग्री का पुल बनाने वाले अफसर पर मेहरबानी की तैयारी है। दरअसल इनमें से एक अफसर को रिटायरमेंट से पहले बहाल करने की तैयारी है, ताकि पीएफ और पेंशन आदि का सेटलमेंट आसानी से हो सके।

BHOPAL. भोपाल में 90 डिग्री पुल मामले में सस्पेंड चल रहे सेतु परिक्षेत्र* भोपाल के प्रभारी चीफ इंजीनियर जीपी वर्मा की बहाली की तैयारी है। सूत्र बताते हैं कि वर्मा जल्द ही रिटायर होने वाले हैं।

ऐसे में रिटायरमेंट के बाद उनको पीएफ और पेंशन में किसी तरह की दिक्कत न आए, इसलिए यह कवायद शुरू हो गई है। बताया जा रहा है कि इस मामले में वर्मा की विभागीय जांच जारी रहेगी।

इधर जिम्मेदारी से बचने के लिए PWD के अफसर अपनी गलतियों का दोष रेलवे के ऊपर डाल रहे हैं। जबकि यह भी साफ हो चुका है कि स्थानीय नेताओं के दबाव में ही पुल का काम किया गया।

जिम्मेदारों ने आगे आने वाली तकनीकी दिक्कतों की बात बताई ही नहीं। इससे 90 डिग्री वाले पुल को लेकर भोपाल की खूब बदनामी भी हुई।

भोपाल के 90 डिग्री मोड़ वाले ब्रिज में किसकी क्या गलतियां रहीं?

भोपाल के ऐशबाग इलाके में बना 90 डिग्री मोड़ वाला रेल ओवर ब्रिज (आरओबी) विभागों के बीच कॉर्डिनेशन की कमी और गलत डिजाइन का नतीजा था। पीडब्ल्यूडी और रेलवे ने एक-दूसरे पर दोष मढ़ा, जिसके बाद इंजीनियरों पर कार्रवाई हुई थी।

पीडब्ल्यूडी की गलतियां

  • पीडब्ल्यूडी ने ब्रिज इंजीनियरिंग विभाग द्वारा तैयार डिजाइन को अंतिम मंजूरी दी, जो उच्च अधिकारियों तक नहीं पहुंचा।
  • विभागों के बीच संवाद की कमी रही; वैकल्पिक एलाइनमेंट या अंडरब्रिज पर विचार नहीं किया गया था।
  • मेट्रो और रेलवे लाइन के कारण सीमित जगह होने पर भी परफेक्ट 90 डिग्री का मोड़ स्वीकार कर लिया था।

रेलवे की गलतियां

  • रेलवे ने डिजाइन चरण में एलाइनमेंट पर प्रारंभिक आपत्तियां तो दर्ज कीं, लेकिन पत्र के माध्यम से बताने के बाद आगे समन्वय नहीं किया।
  • अपना हिस्सा जीएडी (जनरल अरेंजमेंट ड्राइंग) के अनुसार बनाया, लेकिन जगह की कमी को हल करने के लिए अतिरिक्त भूमि नहीं दी।
  • बिना डिजाइन सुधार के दबाव डाले ही प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी।

सीएम ने दिए थे सस्पेंड करने के आदेश

भोपाल के 90 डिग्री एंगल वाले आरओबी के निर्माण में गंभीर लापरवाही पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 8 अफसरों को सस्पेंड करने के निर्देश दिए थे।

जांच रिपोर्ट के आधार पर लोक निर्माण विभाग के 8 इंजीनियर्स के खिलाफ कार्रवाई की गई थी। इनमें से दो सीई सहित सात इंजीनियर्स को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया है। एक सेवानिवृत एसई के खिलाफ विभागीय जांच की बात की गई थी।

साथ ही आरओबी का त्रुटिपूर्ण डिजाइन प्रस्तुत करने पर निर्माण एजेंसी और डिजाइन कंसल्टेंट, दोनों को ब्लैक लिस्ट किया है। आरओबी में आवश्यक सुधार के लिए कमेटी बनाई गई है। सुधार के बाद ही आरओबी का लोकार्पण किया जाएगा।

भोपाल में 90 डिग्री का पुल बनाने वाले जिम्मेदार अफसर

  1. शानुल सक्सेना, सहायक यंत्री:
    रेलवे से सहमति लिए बिना 16 दिसंबर 2021 को जनरल अरेंजमेंट ड्राइंग 393A का अनुमोदन किया था।
  2. शबाना रज्जाक, प्रभारी कार्यपालन यंत्री:
    रेलवे से सहमति लिए बिना जनरल अरेंजमेंट ड्राइंग 393A का अनुमोदन किया था।
  3. संजय खांडे, प्रभारी मुख्य अभियंता:
    अभी रीवा परिक्षेत्र में पदस्थ हैं। डिजाइन के गलत अनुमोदन के मामले में कार्रवाई की गई है।
  4. उमाशंकर मिश्रा, उपयंत्री:
    वर्तमान में अधीक्षण यंत्री भोपाल मंडल क्रमांक एक में पदस्थ हैं। बिना रेलवे की सहमति के जनरल अरेंजमेंट ड्राइंग का अनुमोदन कराकर काम कराया गया।
  5. रवि शुक्ला, प्रभारी अनुविभागीय अधिकारी:
    अभी अधीक्षण यंत्री के रूप में पदस्थ हैं, इनके द्वारा भी कार्य कराने में गलती की गई है।
  6. जीपी वर्मा, प्रभारी मुख्य अभियंता:
    सेतु परिक्षेत्र भोपाल द्वारा आरओबी के निर्माण में त्रुटिपूर्ण कार्यवाही कराई है।
  7. जावेद शकील, तत्कालीन प्रभारी कार्यपालन यंत्री:
    वर्तमान में प्रभारी अधीक्षण यंत्री कार्यालय मुख्य अभियंता लोक निर्माण विभाग राष्ट्रीय राजमार्ग परिक्षेत्र में पदस्थ हैं।
  8. एमपी सिंह, प्रभारी अधीक्षण यंत्री:
    डिजाइन कार्यालय मुख्य अभियंता लोक निर्माण विभाग सेतु मंडल जो वर्तमान में रिटायर हैं। इन्होंने डिजाइन का अनुमोदन किया है।

18 महीने में बनकर तैयार होना था

ऐशबाग रेलवे ओवरब्रिज (ROB) का निर्माण 21 मई 2022 में शुरू हुआ था। इसे 18 महीने में पूरा करना था, लेकिन अब तक पूरी तरह से नहीं बन सका है।

इसकी लागत 18 करोड़ है। बता दें कि 648 मीटर लंबे और 8 मीटर की चौड़ाई वाले ब्रिज का 70 मीटर हिस्सा रेलवे का है।

राकेश सिंह ने कराई थी जांच

पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह ने इसकी जांच नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) से करवाई थी। NHAI ने इस ब्रिज पर 35-40 किमी प्रति घंटा से अधिक गति से गाड़ी नहीं चलाने का सुझाव दिया गया था।

*सेतु परिक्षेत्र
सेतु परिक्षेत्र (Bridge Department) लोक निर्माण विभाग (PWD) का एक खास हिस्सा है, जो नदियों, घाटियों और सड़कों पर पुल, रेलवे ओवर ब्रिज (ROB) और फ्लाईओवर बनाने और उनका रख-रखाव करता है। इस विभाग का काम बुनियादी ढांचे को मजबूत करना, उच्च गुणवत्ता और तकनीकी दक्षता के साथ पुलों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
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