विधायक निर्मला सप्रे की सदस्यता पर फिर उठे सवाल, अब HC में पेश की गई स्टेटस रिपोर्ट
Amresh Kushwaha | Feb 28, 2026, 08:48 IST
bina mla nirmala sapre membership case mp assembly status report hc
सागर जिले की बीना विधायक निर्मला सप्रे की सदस्यता को लेकर कानूनी जंग तेज हो गई है। इस मामले में मध्य प्रदेश विधानसभा सचिवालय ने शुक्रवार, 27 फरवरी को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में अपनी स्टेटस रिपोर्ट पेश कर दी है।
BINA. मध्य प्रदेश की सियासत में दलबदल का मुद्दा लंबे समय से गरमाया हुआ है। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट पेश होने के बाद अब सबकी नजरें कोर्ट के अगले कदम पर टिकी हैं।
बता दें कि कांग्रेस विधायक निर्मला ने कथित तौर पर भाजपा का दामन थाम लिया था। इसी को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच विवाद बढ़ा और अब मामला हाईकोर्ट में है।
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के जरिए दायर की गई याचिका पर 27 फरवरी को अहम सुनवाई होनी थी। हालांकि, किन्हीं कारणों से इस पर बहस नहीं हो सकी है।
अब कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई मार्च के अंतिम सप्ताह के लिए तय की है। सचिवालय की रिपोर्ट ने साफ कर दिया है कि वह इस मामले में किसी भी तरह की जल्दबाजी के मूड में नहीं है।
मध्यप्रदेश विधानसभा सचिवालय ने अपने जवाब में संवैधानिक मर्यादाओं का हवाला दिया है। साथ ही, संविधान की 10वीं अनुसूची का जिक्र किया है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि इस अनुसूची के तहत किसी विधायक की अयोग्यता पर अंतिम फैसला केवल विधानसभा अध्यक्ष का है। सचिवालय का कहना है कि जब तक अध्यक्ष कोई निर्णय नहीं लेते, तब तक न्यायपालिका को इसमें हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।
सचिवालय ने अपनी रिपोर्ट में सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का जिक्र करते हुए चतुराई भरा तर्क दिया है। कीशम मेघचंद्र मामले का उदाहरण देते हुए कहा गया कि कोर्ट ने 3 महीने के भीतर फैसला लेने का जो सुझाव दिया था, वह महज एक निर्देश था, न कि कोई अनिवार्य नियम।
सचिवालय ने साफ किया कि पाडी कौशिक रेड्डी मामले के अनुसार, जहां कार्यकाल अभी काफी बचा हो, वहां कोर्ट को प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए दबाव नहीं बनाना चाहिए।
सचिवालय ने कहा कि यह ऑपरेशन सफल रहा पर मरीज मर गया जैसा मामला नहीं है। इसका मतलब है कि विधानसभा का कार्यकाल अभी लंबा है, इसलिए देरी से लोकतांत्रिक प्रक्रिया को नुकसान नहीं हो रहा है। सचिवालय के मुताबिक, नोटिस जारी हो चुके हैं और साक्ष्यों की जांच की जा रही है।
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि अध्यक्ष जानबूझकर निर्णय लेने में देरी कर रहे हैं। इसके उलट, सचिवालय ने कोर्ट से इस याचिका को ही खारिज करने की मांग की है। सचिवालय का कहना है कि अध्यक्ष अपने न्यायिक विवेक का उपयोग कर रहे हैं।
ये खबर भी पढ़िए...
विधायक निर्मला सप्रे की सदस्यता पर स्पीकर की बैठक, उमंग सिंघार ने विधानसभा अध्यक्ष को सौंपे सबूत
सीएम मोहन यादव से मिलीं विधायक निर्मला सप्रे, विधायकी पर बोलीं, कोर्ट का फैसला होगा मान्य
MP News: बीना विधायक निर्मला सप्रे की विधायकी पर सवाल, जबलपुर हाईकोर्ट पहुंची कांग्रेस
बीना विधायक निर्मला सप्रे पर उमंग सिंघार की याचिका में नया मोड़, विधायकी पर अब यह होगा
बता दें कि कांग्रेस विधायक निर्मला ने कथित तौर पर भाजपा का दामन थाम लिया था। इसी को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच विवाद बढ़ा और अब मामला हाईकोर्ट में है।
टल गई सुनवाई
अब कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई मार्च के अंतिम सप्ताह के लिए तय की है। सचिवालय की रिपोर्ट ने साफ कर दिया है कि वह इस मामले में किसी भी तरह की जल्दबाजी के मूड में नहीं है।
सचिवालय ने अपने जवाब में क्या कहा
रिपोर्ट में कहा गया है कि इस अनुसूची के तहत किसी विधायक की अयोग्यता पर अंतिम फैसला केवल विधानसभा अध्यक्ष का है। सचिवालय का कहना है कि जब तक अध्यक्ष कोई निर्णय नहीं लेते, तब तक न्यायपालिका को इसमें हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट के फैसलों की नई व्याख्या
सचिवालय ने साफ किया कि पाडी कौशिक रेड्डी मामले के अनुसार, जहां कार्यकाल अभी काफी बचा हो, वहां कोर्ट को प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए दबाव नहीं बनाना चाहिए।
ऑपरेशन सफल, मरीज जीवित वाला तर्क
उमंग सिंघार की याचिका पर सचिवालय का पलटवार
ये खबर भी पढ़िए...
विधायक निर्मला सप्रे की सदस्यता पर स्पीकर की बैठक, उमंग सिंघार ने विधानसभा अध्यक्ष को सौंपे सबूत
सीएम मोहन यादव से मिलीं विधायक निर्मला सप्रे, विधायकी पर बोलीं, कोर्ट का फैसला होगा मान्य
MP News: बीना विधायक निर्मला सप्रे की विधायकी पर सवाल, जबलपुर हाईकोर्ट पहुंची कांग्रेस
बीना विधायक निर्मला सप्रे पर उमंग सिंघार की याचिका में नया मोड़, विधायकी पर अब यह होगा
20 हजार करोड़ रुपए के बकाया चालान: सुप्रीम कोर्ट ने दिए अनोखे सुझाव: बिजली बिल में जुड़ सकती है चालान की राशि
By Neel Tiwari
छत्तीसगढ़ कांग्रेस का कलेक्ट्रेट घेराव, पुलिस से झूमाझटकी, भूपेश बघेल बोले ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें
By Arun Tiwari
मध्य प्रदेश में 1 अक्टूबर से राशन दुकानें बंद, राशन विक्रेता संघ ने 5 मांगों पर दी चेतावनी
By Sandeep Kumar
IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी
By VINAY VERMA
राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं
By Ashish Bhardwaj
पाटन चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, भूपेश बघेल की आपत्ति पर पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करेगा सुनवाई
By Arun Tiwari
भोपाल की सेज यूनिवर्सिटी में छात्रों का हंगामा: हॉस्टल मेस के खाने में कीड़े मिलने का आरोप, अब खाद्य विभाग करेगा जांच
By Jitendra Shrivastava