RERA लगा सकता है GST, घर खरीदना होगा महंगा
Pooja Kumari | Feb 28, 2024, 08:02 IST
RERA
जुलाई 2022 से आरबीआई, सेबी, आईआरडीए, जीएसटी नेटवर्क
( GST ) जैसी संस्थाओं की सेवाओं को पहले ही जीएसटी के दायरे में लाया जा चुका है। केंद्र के सूत्रों के मुताबिक अब रेरा पर जीएसटी लगाने का निर्णय हो सकता है।
BHOPAL. बहुत जल्द आमजन के लिए घर खरीदना महंगा हो सकता है। क्योंकि सरकार रियल एस्टेट को जीएसटी के दायरे में लाने की दिशा में विचार कर रही है। जानकारी के मुताबिक बहुत जल्द जीएसटी काउंसिल की होने वाली बैठक में इस मुद्दे पर विचार-विमर्श किया जा सकता है। जुलाई 2022 से आरबीआई, सेबी, आईआरडीए, जीएसटी नेटवर्क (जीएसटिन) जैसी संस्थाओं की सेवाओं को पहले ही जीएसटी के दायरे में लाया जा चुका है। केंद्र के सूत्रों के मुताबिक अब रेरा पर जीएसटी लगाने का निर्णय हो सकता है।
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बताया जा रहा है कि लोकसभा चुनाव से पहले ही इस विषय पर बैठक हो सकती है। काउंसिल रेरा को लोकल बॉडी घोषित कर सकती है, जिससे रेरा को तो खुद टैक्स नहीं देना होगा पर रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म के तहत सेवा लेने वाले यानि बिल्डरों को टैक्स देना होगा। ऐसा होने पर टैक्स का भार खरीददारों पर भी पड़ेगा।
जीएसटी एक्सपर्ट मुकुल शर्मा का कहना है कि जीएसटी काउंसिल रेरा को स्थानीय निकाय (लोकल बॉडी) के रूप में घोषित कर सकती है। ऐसे में रेरा तो टैक्स नहीं देगी, लेकिन सेवा पाने वाले यानि बिल्डर को टैक्स देना पड़ेगा। जोकि लगभग 18% हो सकता है। टैक्स कलेक्शन से राज्यों को भी उनका हिस्सा मिलेगा। सीनियर सीए ध्रुव पांडे ने बताया कि मेडिकल, नर्सिंग काउंसिल सहित तमाम अथॉरिटी कर के दायरे में आ चुकी हैं। हालांकि लगभग सभी संस्थाएं कोर्ट जा चुकी हैं और मामला लंबित है।
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रियल एस्टेट एक्सपर्ट मनोज सिंह मीक के मुताबिक रेरा प्रोजेक्ट रजिस्ट्रेशन, प्रोजेक्ट टाइम एक्सटेंशन, बैंक अकाउंट बदलने, प्रोजेक्ट का नाम बदलने सहित कई तरह के चार्ज लेता है। सबसे बड़ा चार्ज रजिस्ट्रेशन का होता है, जो आवासीय में 10 रुपए वर्ग मीटर और कमर्शियल में 20 रुपए वर्गमीटर होता है। यदि प्रोजेक्ट 1 लाख वर्गमीटर का है तो 10 लाख फीस के अलावा 1.80 लाख टैक्स होगा। मीक के मुताबिक रियल एस्टेट में मार्जिन घट चुके हैं इसलिए अतिरिक्त बोझ ग्राहक पर ही जाएगा। ऐसे में मकानों का महंगा होना लाजमी है।
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लोकसभा चुनाव से पहले हो सकता है निर्णय
बताया जा रहा है कि लोकसभा चुनाव से पहले ही इस विषय पर बैठक हो सकती है। काउंसिल रेरा को लोकल बॉडी घोषित कर सकती है, जिससे रेरा को तो खुद टैक्स नहीं देना होगा पर रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म के तहत सेवा लेने वाले यानि बिल्डरों को टैक्स देना होगा। ऐसा होने पर टैक्स का भार खरीददारों पर भी पड़ेगा।
बिल्डर्स को देना पड़ सकता है टैक्स
जीएसटी एक्सपर्ट मुकुल शर्मा का कहना है कि जीएसटी काउंसिल रेरा को स्थानीय निकाय (लोकल बॉडी) के रूप में घोषित कर सकती है। ऐसे में रेरा तो टैक्स नहीं देगी, लेकिन सेवा पाने वाले यानि बिल्डर को टैक्स देना पड़ेगा। जोकि लगभग 18% हो सकता है। टैक्स कलेक्शन से राज्यों को भी उनका हिस्सा मिलेगा। सीनियर सीए ध्रुव पांडे ने बताया कि मेडिकल, नर्सिंग काउंसिल सहित तमाम अथॉरिटी कर के दायरे में आ चुकी हैं। हालांकि लगभग सभी संस्थाएं कोर्ट जा चुकी हैं और मामला लंबित है।
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अब मकान होंगे महंगे
रियल एस्टेट एक्सपर्ट मनोज सिंह मीक के मुताबिक रेरा प्रोजेक्ट रजिस्ट्रेशन, प्रोजेक्ट टाइम एक्सटेंशन, बैंक अकाउंट बदलने, प्रोजेक्ट का नाम बदलने सहित कई तरह के चार्ज लेता है। सबसे बड़ा चार्ज रजिस्ट्रेशन का होता है, जो आवासीय में 10 रुपए वर्ग मीटर और कमर्शियल में 20 रुपए वर्गमीटर होता है। यदि प्रोजेक्ट 1 लाख वर्गमीटर का है तो 10 लाख फीस के अलावा 1.80 लाख टैक्स होगा। मीक के मुताबिक रियल एस्टेट में मार्जिन घट चुके हैं इसलिए अतिरिक्त बोझ ग्राहक पर ही जाएगा। ऐसे में मकानों का महंगा होना लाजमी है।
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