IAS Rajni Singh: सशक्त हो बेटी और संवेदनशील बेटा, यही है बेहतर समाज का रास्ता
Manya Jain | Mar 07, 2026, 23:54 IST
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नरसिंहपुर कलेक्टर रजनी सिंह का संदेश: समाज तभी बदलेगा जब बेटियां आत्मनिर्भर होंगी और बेटे संवेदनशील बनेंगे। महिला सशक्तीकरण का असली आधार शिक्षा, आर्थिक आजादी और आपसी सम्मान है।
महिला दिवस सिर्फ एक दिन का उत्सव नहीं है, यह एक महत्वपूर्ण संकल्प है...महिलाओं को सम्मान देने का। उनके अधिकारों को स्वीकार करने का और उन्हें आगे बढ़ने के समान अवसर प्रदान करने का। जब एक महिला सशक्त होती है तो उसका प्रभाव केवल उसके जीवन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरा परिवार, समाज और अंततः राष्ट्र भी प्रगति की ओर अग्रसर होता है।
नारी हमेशा से ही समाज की आधारशिला रही है। वह केवल परिवार को संभालने वाली नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के संस्कार और भविष्य को आकार देने वाली शक्ति भी है। इसलिए महिला सशक्तीकरण केवल महिलाओं का विषय नहीं, बल्कि पूरे समाज के विकास का आधार है।
महिला सशक्तीकरण का सबसे मजबूत आधार शिक्षा और आर्थिक स्वावलंबन है। शिक्षा हमें ज्ञान देती है, सोचने और समझने की क्षमता विकसित करती है तथा हमें अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक बनाती है। वहीं, आर्थिक स्वावलंबन महिलाओं को आत्मविश्वास और स्वतंत्र निर्णय लेने की शक्ति देता है। जब महिलाएं आर्थिक रूप से सक्षम होती हैं तब वे अपने जीवन और परिवार से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय स्वयं लेने में सक्षम बनती हैं।
आज के समय में यह बेहद जरूरी है कि हम बेटियों को शिक्षा के अवसर प्रदान करें और उन्हें आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करें। साथ ही हमें नई पीढ़ी को ज्यादा संवेदनशील, उदार और समायोजनशील बनाने के लिए भी प्रयास करने होंगे। केवल बेटियों को मजबूत बनाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि बेटों को भी यह सिखाना जरूरी है कि वे महिलाओं का सम्मान करें, उन्हें समानता के साथ देखें और हर परिस्थिति में उनका सहयोग करें।
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महिला सशक्तीकरण का सही अर्थ समझना भी उतना ही आवश्यक है। इसका अर्थ केवल पुरुषों के बराबर होना नहीं है, बल्कि बदलते समय और परिस्थितियों के साथ स्वयं को अधिक सक्षम बनाना है। अपने पैरों पर खड़ा होना, आत्मनिर्भर बनना, आर्थिक रूप से सक्षम होना और अपने जीवन के निर्णय स्वयं लेने की क्षमता विकसित करना...यही सशक्तीकरण के वास्तविक मायने हैं।
इतिहास और वर्तमान दोनों इस बात के साक्षी हैं कि जब भी महिलाओं को अवसर मिला है, उन्होंने हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का परिचय दिया है। चाहे वह शिक्षा, विज्ञान, प्रशासन, खेल, साहित्य या सामाजिक सेवा का क्षेत्र हो। आज की महिलाएं न केवल अपने परिवार की जिम्मेदारियां निभा रही हैं, बल्कि समाज और देश के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।
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इस अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर मेरा यही संदेश है कि हम बालिकाओं को अनिवार्य रूप से शिक्षित करें और उन्हें आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनने के लिए प्रोत्साहित करें। विशेष रूप से माताओं से मेरा आग्रह है कि वे अपनी बेटियों को आत्मनिर्भर, स्वतंत्र, साहसी और निडर बनाएं। साथ ही अपने बेटों को संवेदनशील, सहयोगी और महिलाओं का सम्मान करने वाला बनाएं।
जब हम अपनी बेटियों को आत्मविश्वास देंगे और अपने बेटों को संवेदनशीलता का संस्कार देंगे, तभी हम एक ऐसा समाज बना पाएंगे जहां समानता, सम्मान और अवसर वास्तव में सभी के लिए उपलब्ध होंगे।
आइए, इस महिला दिवस पर हम यह संकल्प लें कि हम न केवल महिलाओं का सम्मान करेंगे, बल्कि उन्हें आगे बढ़ने के लिए हर संभव अवसर भी प्रदान करेंगे। क्योंकि सशक्त नारी ही सशक्त समाज और सशक्त राष्ट्र की आधारशिला होती है।
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नारी हमेशा से ही समाज की आधारशिला रही है। वह केवल परिवार को संभालने वाली नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के संस्कार और भविष्य को आकार देने वाली शक्ति भी है। इसलिए महिला सशक्तीकरण केवल महिलाओं का विषय नहीं, बल्कि पूरे समाज के विकास का आधार है।
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आज के समय में यह बेहद जरूरी है कि हम बेटियों को शिक्षा के अवसर प्रदान करें और उन्हें आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करें। साथ ही हमें नई पीढ़ी को ज्यादा संवेदनशील, उदार और समायोजनशील बनाने के लिए भी प्रयास करने होंगे। केवल बेटियों को मजबूत बनाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि बेटों को भी यह सिखाना जरूरी है कि वे महिलाओं का सम्मान करें, उन्हें समानता के साथ देखें और हर परिस्थिति में उनका सहयोग करें।
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केवल पुरुषों के बराबर होना महिला सशक्तीकरण नहीं
इतिहास और वर्तमान दोनों इस बात के साक्षी हैं कि जब भी महिलाओं को अवसर मिला है, उन्होंने हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का परिचय दिया है। चाहे वह शिक्षा, विज्ञान, प्रशासन, खेल, साहित्य या सामाजिक सेवा का क्षेत्र हो। आज की महिलाएं न केवल अपने परिवार की जिम्मेदारियां निभा रही हैं, बल्कि समाज और देश के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।
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बेटियों को साहसी और निडर बनाएं
जब हम अपनी बेटियों को आत्मविश्वास देंगे और अपने बेटों को संवेदनशीलता का संस्कार देंगे, तभी हम एक ऐसा समाज बना पाएंगे जहां समानता, सम्मान और अवसर वास्तव में सभी के लिए उपलब्ध होंगे।
आइए, इस महिला दिवस पर हम यह संकल्प लें कि हम न केवल महिलाओं का सम्मान करेंगे, बल्कि उन्हें आगे बढ़ने के लिए हर संभव अवसर भी प्रदान करेंगे। क्योंकि सशक्त नारी ही सशक्त समाज और सशक्त राष्ट्र की आधारशिला होती है।
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