भू-माफिया को सरकारी जमीन दिलवाने तहसीलदार ने जारी किया इश्तहार, लैंड जिहाद के आरोप
Neel Tiwari | Oct 05, 2025, 22:24 IST
tehsildar-nazri
शहपुरा की खैरी पंचायत में सरकारी जमीन पर कब्जा करने की साजिश एक बार फिर दोहराई जा रही है। क्योंकि जिस व्यक्ति को भू माफिया घोषित करते हुए तत्कालीन कलेक्टर ने कब्जा छुड़वाया था।
JABALPUR. जिला प्रशासन द्वारा चार वर्ष पहले जिस जमीन को भू-माफिया के कब्जे से मुक्त कराया गया था, उसी जमीन पर अब गुपचुप तरीके से फिर से कब्जे की नई पटकथा रची जा रही है। मामला शहपुरा भिटौनी तहसील की ग्राम पंचायत खैरी का है, जहां लगभग 50 एकड़ शासकीय भूमि को तत्कालीन कलेक्टर इलैया टी. राजा ने बुलडोजर चलवाकर मुक्त कराया था।
उस समय यह जमीन जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एम. ए. खान द्वारा फर्जी तरीके से बेची गई थी, जिन्होंने इसे विभिन्न लोगों को “फार्महाउस” के नाम पर बेचकर करोड़ों रुपये कमाए थे। कलेक्टर ने तब खान को भू-माफिया घोषित कर कठोर कार्रवाई की थी, लेकिन अब उन्हीं जमीनों को नए सिरे से हथियाने की राजस्व अधिकारियों और लैंड माफिया की मिलीभगत से दोबारा कब्जे की साजिश रची जा रही है।
![c39034f9-1d0]()
![51c4b952-8f5]()
![74075b1c-a6a]()
पीएम आवास योजना के ढाई लाख हड़पने वालों से वसूली के लिए दिए जा रहे नोटिस
ग्राम खैरी की शासकीय जमीन को अपने नाम दर्ज कराने के लिए नदीम खान, हाजी फिरोज कमाल, शमा परवेज, अशफाक और आशीष नेल्सन अल्बर्ट नामक व्यक्तियों ने तहसील शहपुरा कार्यालय में गुपचुप तरीके से आवेदन दिया। इन सभी ने सरकारी भूमि को अपने नाम पर दर्ज कराने की प्रक्रिया में बैक डेट (पुरानी तारीख) में नामांतरण आदेश जारी कराने की कोशिश की।
इस मामले में राजस्व विभाग से भी उन्हें पूरी सहायता मिली क्योंकि 8 सितंबर को तहसीलदार शहपुरा के न्यायालय से आम इश्तहार (Public Notice) जारी हुआ, जिसमें यह दिखाया गया कि खसरा नंबर 146/2 से 2 हेक्टेयर भूमि नदीम खान के नाम, खसरा नंबर 146/2 से 2 हेक्टेयर आशीष लाल के नाम, खसरा नंबर 258/5 से 2 हेक्टेयर हाजी फिरोज कमाल के नाम, खसरा नंबर 146/1 से 2 हेक्टेयर शमा परवेज के नाम और खसरा नंबर 258/5 से 2 हेक्टेयर अशफाक के नाम दर्ज किया जा रहा है।
कवर्धा में रॉन्ग साइड से आ रहे ट्रक ने बोलेरो को टक्कर मारी, बालाघाट से बिलासपुर जा रहे 3 महिला टीचर्स समेत 5 की मौत
इश्तहार में आपत्ति दर्ज कराने की अंतिम तिथि 24 सितंबर 2025 रखी गई थी, लेकिन इसे ग्राम कोटवार को अक्टूबर की 3 तारीख को सौंपा गया। यानी जब तक इश्तहार ग्राम पंचायत तक पहुँचा, तब तक आपत्ति दर्ज कराने की अवधि समाप्त हो चुकी थी। यह सब दिखा रहा है कि राजस्व कार्यालय में जमीन के नामांतरण को छिपाने और प्रक्रिया को फर्जी तरीके से पूरा करने की गहरी साजिश रची गई।
इस घोटाले की जानकारी मिलते ही ग्राम पंचायत खैरी के सरपंच सौरभ पटेल ने ग्रामवासियों और भारतीय किसान संघ के सहयोग से जोरदार विरोध दर्ज कराया। सरपंच ने तहसीलदार शहपुरा को लिखे पत्र में कहा कि जमीन अपने नाम दर्ज कराने वाले व्यक्ति ग्राम पंचायत के निवासी नहीं हैं, न ही वे एससी या एसटी वर्ग से हैं। फिर भी उन्हें शासकीय भूमि देने का प्रयास कहीं न कहीं मिलीभगत और भ्रष्टाचार का परिणाम है।
वहीं भारतीय किसान संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख राघवेन्द्र सिंह पटेल ने भी बयान जारी करते हुए इसे “स्पष्ट लैंड जिहाद” करार दिया और कहा कि ग्राम पंचायत की जमीन को हड़पने का यह प्रयास राजस्व विभाग के कुछ भ्रष्ट अधिकारियों की शह पर हो रहा है। किसान संघ इस जमीन को बचाने के लिए आंदोलन करेगा।
एमपी में आएसएस शताब्दी वर्ष का दूसरा चरण, 9000 से ज्यादा जगहों पर होगा हिंदू सम्मेलन, दिखेगी संघ की ताकत
इस प्रकरण की शिकायत ग्रामीणों ने मई 2024 में ही कलेक्टर जबलपुर को दी थी। शिकायत में कहा गया था कि प्रोफेसर एम. ए. खान और उनके पुत्र डॉ. परवेज राजन खान ने पिकनिक स्पॉट पथरोरी घाट, जो नर्मदा नदी के भीतर स्थित है, की जमीन की भी फर्जी रजिस्ट्री करवा ली है।
ग्रामीणों ने बताया कि नपाई के दौरान जब उन्होंने विरोध किया था, तब भी राजस्व अधिकारी अनसुना करते रहे। बाद में “गुपचुप तरीके से” नदी के भीतर की जमीन को भी रजिस्ट्री करा दिया गया। लेकिन इस शिकायत पर कोई पर कार्रवाई नहीं हुई।
अब सवाल यह उठ रहा है कि तहसीलदार सुमित गुप्ता ने ऐसी जमीनों को नामांतरण प्रक्रिया में शामिल करने की अनुमति कैसे दी । जबकि उन्हीं जमीनों पर पहले कलेक्टर स्तर पर बुलडोज़र कार्रवाई हो चुकी थी। ग्रामीणों का कहना है कि तहसीलदार और कुछ निचले राजस्व अधिकारी जानबूझकर इन भू-माफियाओं की मदद कर रहे हैं ताकि सरकारी जमीन दोबारा उनके कब्जे में जा सके।
ग्राम पंचायत हीरापुर बंधा के सरपंच सौरभ पटेल ने तहसीलदार को पत्र लिखकर राजस्व प्रकरण क्रमांक 0002 से 0006/अ-19(3)/2024-25 तक के सभी आम इश्तहारों को निरस्त करने की मांग की है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि ये पांचों व्यक्ति ग्राम पंचायत के निवासी नहीं हैं, इनके दस्तावेज पूर्ण रूप से निराधार हैं। शासन को भूमि हड़पने वालों के विरुद्ध दंडात्मक कार्यवाही करनी चाहिए। सरपंच का यह पत्र ग्राम पंचायत स्तर पर भ्रष्टाचार के खिलाफ खड़ा होने का प्रतीक बन गया है, जिससे ग्रामीणों का मनोबल भी बढ़ा है।
![97819ce0-5e8]()
![b38ff759-50e]()
पूरा मामला अब यह दिखा रहा है कि कैसे राजस्व विभाग के कुछ अधिकारी और लैंड माफिया गिरोह मिलकर सरकारी जमीनों को हड़पने की सुनियोजित योजना चला रहे हैं। पहले कलेक्टर की कार्रवाई से मुक्त कराई गई जमीन, फिर गुप्त रूप से इश्तहार जारी कर फर्जी नामांतरण का प्रयास, और अंत में आपत्ति अवधि समाप्त होने के बाद ग्राम पंचायत को सूचना देना, ये सभी घटनाएं एक संगठित भ्रष्टाचार का हिस्सा हैं।
शहपुरा की खैरी पंचायत में सरकारी जमीन को निजी कब्जे में लेने का यह प्रयास प्रशासनिक मिलीभगत और भ्रष्टाचार की मिली-जुली मिसाल है। चार साल पहले जिस जमीन को जनता ने बचाया था, अब उसी पर फिर से “फर्जी नामांतरण” का काला खेल शुरू हो चुका है। सवाल यही है कि क्या प्रशासन इस बार भी आंख मूंदे बैठेगा या सरकारी जमीन बचाने के लिए एक और कार्रवाई देखने मिलेगी।
![e038a4ab-010]()
पूरे मध्यप्रदेश में धूमधाम से मनाया गया विजयादशमी का पर्व, बदनावर की ब्रह्मोस मिसाइल ने खींचा सबका ध्यान
इस मामले में शहपुरा के तहसीलदार सुमित गुप्ता का कहना है की ADM के कार्यालय से उन्हें एक जांच रिपोर्ट बनाने का कार्य मिला था, जिसका एक बिंदु आम इश्तहार प्रकाशन भी था, इसलिए उन्होंने यह आम इश्तहार जारी किया था, उन्होंने बताया कि यह नजूल का पट्टा देने की कार्यवाही थी। हालांकि जब हमने उनसे पूछा कि यह लोग उस ग्राम के निवासी भी नहीं है और अनुसूचित जाति जनजाति के भी नहीं है, साथ ही आपत्ति की अंतिम दिनांक निकल जाने के बाद ग्राम पंचायत को सूचना क्यों दी गई।
तहसीलदार ने इस बात का जवाब तो नहीं दिया पर उन्होंने कहा कि वह अपनी जांच रिपोर्ट ADM सौंपने वाले हैं और यह पट्टे अब जारी नहीं किए जाएंगे। आपत्ति की डेट निकल जाने की बात पर उन्होंने कहा कि हम इस आपत्ति को फिर भी स्वीकार कर लेंगे।
राजस्व विभाग से जानकारी प्राप्त करने पर पता चला कि इस मामले में आम इश्तिहार जारी करना जांच का बिंदु नहीं हो सकता। इश्तिहार में साफ लिखा था कि यह प्रकरण तहसील न्यायालय में है और किसी को आपत्ति हो तो वह इसे दर्ज कर सकता है। एक बार तहसीलदार का आदेश जारी होने के बाद आरोपियों को यह जमीन मिलना तय था। हालांकि, मामले के उजागर होने के बाद राजस्व अधिकारियों के बयान बदलना स्वाभाविक था।
उस समय यह जमीन जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एम. ए. खान द्वारा फर्जी तरीके से बेची गई थी, जिन्होंने इसे विभिन्न लोगों को “फार्महाउस” के नाम पर बेचकर करोड़ों रुपये कमाए थे। कलेक्टर ने तब खान को भू-माफिया घोषित कर कठोर कार्रवाई की थी, लेकिन अब उन्हीं जमीनों को नए सिरे से हथियाने की राजस्व अधिकारियों और लैंड माफिया की मिलीभगत से दोबारा कब्जे की साजिश रची जा रही है।
c39034f9-1d0
51c4b952-8f5
74075b1c-a6a
पीएम आवास योजना के ढाई लाख हड़पने वालों से वसूली के लिए दिए जा रहे नोटिस
जमीन को भूमिया के नाम पर दर्ज कराने की कोशिश
इस मामले में राजस्व विभाग से भी उन्हें पूरी सहायता मिली क्योंकि 8 सितंबर को तहसीलदार शहपुरा के न्यायालय से आम इश्तहार (Public Notice) जारी हुआ, जिसमें यह दिखाया गया कि खसरा नंबर 146/2 से 2 हेक्टेयर भूमि नदीम खान के नाम, खसरा नंबर 146/2 से 2 हेक्टेयर आशीष लाल के नाम, खसरा नंबर 258/5 से 2 हेक्टेयर हाजी फिरोज कमाल के नाम, खसरा नंबर 146/1 से 2 हेक्टेयर शमा परवेज के नाम और खसरा नंबर 258/5 से 2 हेक्टेयर अशफाक के नाम दर्ज किया जा रहा है।
कवर्धा में रॉन्ग साइड से आ रहे ट्रक ने बोलेरो को टक्कर मारी, बालाघाट से बिलासपुर जा रहे 3 महिला टीचर्स समेत 5 की मौत
ग्राम पंचायत को सूचना
किसान संघ और ग्राम पंचायत का विरोध
वहीं भारतीय किसान संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख राघवेन्द्र सिंह पटेल ने भी बयान जारी करते हुए इसे “स्पष्ट लैंड जिहाद” करार दिया और कहा कि ग्राम पंचायत की जमीन को हड़पने का यह प्रयास राजस्व विभाग के कुछ भ्रष्ट अधिकारियों की शह पर हो रहा है। किसान संघ इस जमीन को बचाने के लिए आंदोलन करेगा।
एमपी में आएसएस शताब्दी वर्ष का दूसरा चरण, 9000 से ज्यादा जगहों पर होगा हिंदू सम्मेलन, दिखेगी संघ की ताकत
तहसीलदार सुमित गुप्ता ने जारी कर दिए आदेश
ग्रामीणों ने बताया कि नपाई के दौरान जब उन्होंने विरोध किया था, तब भी राजस्व अधिकारी अनसुना करते रहे। बाद में “गुपचुप तरीके से” नदी के भीतर की जमीन को भी रजिस्ट्री करा दिया गया। लेकिन इस शिकायत पर कोई पर कार्रवाई नहीं हुई।
अब सवाल यह उठ रहा है कि तहसीलदार सुमित गुप्ता ने ऐसी जमीनों को नामांतरण प्रक्रिया में शामिल करने की अनुमति कैसे दी । जबकि उन्हीं जमीनों पर पहले कलेक्टर स्तर पर बुलडोज़र कार्रवाई हो चुकी थी। ग्रामीणों का कहना है कि तहसीलदार और कुछ निचले राजस्व अधिकारी जानबूझकर इन भू-माफियाओं की मदद कर रहे हैं ताकि सरकारी जमीन दोबारा उनके कब्जे में जा सके।
सरपंच के पत्र ने खोल दी भ्रष्टाचार की पोल
97819ce0-5e8
b38ff759-50e
राजस्व तंत्र में भ्रष्ट गठजोड़ का पर्दाफाश
शहपुरा की खैरी पंचायत में सरकारी जमीन को निजी कब्जे में लेने का यह प्रयास प्रशासनिक मिलीभगत और भ्रष्टाचार की मिली-जुली मिसाल है। चार साल पहले जिस जमीन को जनता ने बचाया था, अब उसी पर फिर से “फर्जी नामांतरण” का काला खेल शुरू हो चुका है। सवाल यही है कि क्या प्रशासन इस बार भी आंख मूंदे बैठेगा या सरकारी जमीन बचाने के लिए एक और कार्रवाई देखने मिलेगी।
e038a4ab-010
पूरे मध्यप्रदेश में धूमधाम से मनाया गया विजयादशमी का पर्व, बदनावर की ब्रह्मोस मिसाइल ने खींचा सबका ध्यान
क्या बोले तहसीलदार सुमित गुप्ता
तहसीलदार ने इस बात का जवाब तो नहीं दिया पर उन्होंने कहा कि वह अपनी जांच रिपोर्ट ADM सौंपने वाले हैं और यह पट्टे अब जारी नहीं किए जाएंगे। आपत्ति की डेट निकल जाने की बात पर उन्होंने कहा कि हम इस आपत्ति को फिर भी स्वीकार कर लेंगे।
राजस्व अधिकारियों ने बदले बयान
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
By Sanjay Dhiman
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
By Sanjay Gupta
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा
By Arun Tiwari
Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग
By Jitendra Shrivastava
Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग
By Jitendra Shrivastava
Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग
By Jitendra Shrivastava
मंत्रालय में बड़ा फेरबदल, 38 अनुभाग अधिकारियों की बदली जिम्मेदारी; वित्त-गृह समेत कई विभागों में नई तैनाती
By VINAY VERMA