मध्यप्रदेश में इन IAS-IPS अधिकारियों को मिली मर्यादा लांघने की सजा, पढ़िए कौन-कौन हैं इस लिस्ट में

Jitendra Shrivastava | Jun 06, 2025, 08:00 IST
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mp ias ips
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मध्यप्रदेश में कई प्रशासनिक अधिकारी निजी व्यवहार से सुर्खियों में हैं। आईपीएस, तहसीलदार और कलेक्टर जैसे उच्च पदों पर बैठे अधिकारी अनुशासन और नैतिकता की सीमाएं लांघ चुके हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इन अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है।

BHOPAL. सरकारी नौकरी सिर्फ ऑर्डर देने के लिए नहीं होती। कुर्सी पर बैठने वाला शख्स समाज का चरित्र होता है, नीति निर्माता होता है। जब ये शख्स खुद अपनी मर्यादा लांघने लगे, तब उसकी एक चूक समाज में सौ दिशाहीन कदमों को जन्म देती है।

मध्यप्रदेश की अफसरशाही में इन दिनों ऐसे ही कुछ अधिकारियों के निजी आचरण ने सुर्खियां बटोरी हैं। इन्होंने खुद अनुशासन और नैतिकता की सीमाएं लांघ दी। शासन-प्रशासन की रीढ़ हिल गई। युवा पीढ़ी के सामने लीडरशिप की परिभाषा धुंधली पड़ने लगी।
सरकार ने हाल ही में ऐसे ही वरिष्ठ अफसरों पर सख्त कार्रवाई की है। यह कोई मामूली प्रशासनिक फेरबदल नहीं, बल्कि उन उम्मीदों और मूल्यों को बरकरार रखने की कोशिश है, जिनसे जनता और खासकर युवा वर्ग अपने रोल मॉडल की छवि गढ़ता है।

केस 1: वर्दी की गरिमा और रिश्तों की जमीन हिली

आईपीएस नागेंद्र सिंह बालाघाट के एसपी के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे थे। उनकी पत्नी और स्वयं एक आईपीएस अधिकारी वाहिनी सिंह ने ही पति के खिलाफ शिकायत की। वाहिनी सिंह अभी डिंडोरी की एसपी हैं। उनकी यह शिकायत सार्वजनिक उदाहरण बन गई है।
सूत्रों के अनुसार, नागेंद्र सिंह किसी महिला के साथ लिव-इन रिलेशनशिप के आरोप हैं। पुलिस ने नागेंद्र सिंह को बालाघाट एसपी से हटाकर उन्हें भोपाल की 25वीं बटालियन में पदस्थ किया गया है। बता दें कि यह मामला अब पारिवारिक न्यायालय में विचाराधीन है।

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केस 2: जब सिस्टम ने परिवार को चोट पहुंचाई

दमोह के तहसीलदार शैलेंद्र बिहारी शर्मा का अपनी पत्नी सीएसपी ख्याति मिश्रा और कटनी एसपी अभिजीत रंजन के साथ विवाद लंबे समय से चल रहा है। अब यह फिर गरमा गया है। इसके बाद सुर्खियों में आए एसपी अभिजीत रंजन को हटा दिया गया है। तहसीलदार शर्मा का आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने सीएसपी आवास पर उनके परिवार वालों के साथ मारपीट की है।

पुलिस ने घर की महिलाओं और आठ साल के बेटे को थाने ले जाकर पीटा है। ये सब कटनी एसपी के निर्देश पर हुआ है। हालांकि आईपीएस अभिजीत रंजन इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हैं। वहीं, सीएसपी ख्याति मिश्रा ने कहा कि उनके तहसीलदार पति ने खुद ही बंगले पर पहुंचकर कर्मचारियों को भगाया है।
दरअसल, सीएसपी ख्याति मिश्रा कटनी में ही पदस्थ थीं। एक हफ्ते पहले ही उनका ट्रांसफर अमरपाटन में बतौर एसडीओपी हुआ है।

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केस 3: जब कलेक्टर की निजी जिंदगी बनी थाने की फाइल

नीरज कुमार सिंह उज्जैन कलेक्टर के रूप में पदस्थ थे। उनके घरेलू जीवन में उपजा विवाद इतना गहराया कि उनकी पत्नी को पुलिस में शिकायत करनी पड़ी। इस घटना ने पूरे उज्जैन में प्रशासनिक मर्यादा पर सवाल खड़े कर दिए। एक अफसर का घर जब खुद अशांति का केंद्र बन जाए तो वह शहर को स्थिरता कैसे देगा? सरकार ने गंभीरता से संज्ञान लिया और नीरज सिंह को कलेक्टर पद से हटा दिया। यह फैसला व्यक्तिगत नहीं था, यह पूरे सिस्टम की गरिमा की रक्षा के लिए जरूरी था।

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सीएम ने क्या कहा...

मोहन सरकार ने दो दिन पहले कटनी एसपी अभिजीत रंजन समेत दतिया के एसपी वीरेंद्र कुमार, चंबल रेंज के आईजी सुशांत कुमार सक्सेना और डीआईजी कुमार सौरभ को भी हटाया है। खुद सीएम डॉ. मोहन यादव ने सोशल मीडिया पर इन अधिकारियों को हटाए जाने की जानकारी दी।

मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव ने कहा कि कटनी और दतिया के एसपी तथा आईजी, डीआईजी चंबल रेंज द्वारा ऐसा व्यवहार किया गया, जो लोकसेवा में खेदजनक है। इन्हें तत्काल प्रभाव से हटाने के निर्देश दिए हैं।
वहीं प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीडी शर्मा ने कहा कि कटनी एसपी द्वारा लोकसेवा आदर्श आचरण का उल्लंघन घोर निंदनीय है। उनके दुर्व्यवहार पर कार्रवाई को लेकर सीएम डॉ.यादव से बात हुई थी। मामले का संज्ञान लेते हुए एसपी को तत्काल प्रभाव से हटाने के लिए मैं मुख्यमंत्री जी का आभार व्यक्त करता हूं।

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लोगों की नजरों में अफसर नहीं, आदर्श होते हैं

प्रशासनिक अधिकारी सिर्फ फाइलों और ऑर्डरों तक सीमित नहीं होते। वे लोगों के आदर्श होते हैं, जिनकी एक झलक देखकर कोई छात्र आईपीएस बनने का सपना देखता है, कोई आम इंसान हक की उम्मीद करता है। कोई बच्चा नैतिकता का मतलब समझता है। जब यही अफसर निजी जीवन में अनुशासन छोड़ दें, मर्यादाओं को लांघ दें, तो यह केवल एक परिवार का विघटन भर नहीं, समाज की दिशा का भटकाव होता है।

IAS-IPS | आईपीएस अविजीत रंजन | आईएएस नीरज सिंह

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