एमपी में एआई समिट : सफाई, खेती और इलाज अब हुआ और भी आसान

Anjali Dwivedi | Jan 16, 2026, 13:05 IST
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मध्य प्रदेश में AI इम्पेक्ट कॉन्फ्रेंस-2026 का आयोजन हुआ, जिसमें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य की नई स्पेसटेक नीति-2026 और AI आधारित नवाचारों की लॉन्चिंग की घोषणा की है। इसका मेन उद्देश्य सरकारी काम को बेहतर और तेज बनाना है।

News In Shorts

  • मध्य प्रदेश सरकार ने सरकारी कामों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग शुरू किया है।
  • इससे सरकार और आम नागरिक दोनों को फायदा हो रहा है।
  • 15 जनवरी को सीएम डॉ. मोहन यादव ने AI इम्पेक्ट कॉन्फ्रेंस-2026 में भाग लिया।
  • उनका उद्देश्य सरकारी कामों में AI का उपयोग बढ़ाकर जनता के कामों को तेजी से करना है।
  • एमपी ने इस साल अपनी नई स्पेसटेक नीति-2026 लॉन्च की, जिसके तहत राज्य में खुद के सैटेलाइट बनेंगे।
  • मध्य प्रदेश ने AI के जरिए बच्चों के कुपोषण की भविष्यवाणी करने का प्रोजेक्ट शुरू किया है।

News In Detail

भोपाल. भोपाल एम्स की बड़ी बिल्डिंग अब मरीजों के लिए भूलभुलैया नहीं बनेगी। यहां आने वाले परिजन अक्सर पैथोलॉजी और विभागों को खोजने में भटकते रहते हैं। बार-बार रास्ता पूछने में उनका कीमती समय बर्बाद होता है, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा।

भोपाल के एक स्टार्टअप ने खास AI नेविगेशन सिस्टम तैयार किया है। मोबाइल एप या बारकोड स्कैन करते ही आपको सटीक रास्ता दिखेगा। मरीज अब गूगल मैप की तरह आसानी से अपनी मंजिल तक पहुंचेंगे। मध्य प्रदेश सरकार भी अब सरकारी सिस्टम में एआई का दायरा बढ़ा रही है।

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एआई की ओर बढ़ता मध्य प्रदेश

यह एक उदाहरण भर नहीं है। मध्य प्रदेश सरकार ने कई सरकारी सिस्टम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। राज्य में एआई आधारित नवाचारों से सरकारी तंत्र और आम नागरिक दोनों को फायदा हो रहा है।

15 जनवरी गुरुवार को सीएम डॉ. मोहन यादव AI इम्पेक्ट कॉन्फ्रेंस-2026 में शामिल हुए। सीएम अपने प्रदेश को भविष्य की टेक्नोलॉजी से जोड़ रहे हैं। इस मिशन का मकसद सरकारी कामों में AI का इस्तेमाल बढ़ाना है। ऐसा इसलिए ताकि जनता के काम बिना रुकावट और तेजी से हों।

इन सब में सबसे खास बात है एमपी की नई स्पेसटेक नीति-2026 की लॉन्चिंग। अब एमपी में खुद के सैटेलाइट बनेंगे। इस साल की थीम रखी गई है- ‘एआई-एनेबल्ड गवर्नेंस फॉर एन एम्पावर्ड इंडिया’। इससे खेती और डिजास्टर मैनेजमेंट में सटीक मदद मिलेगी।

फ्लाइट और ट्रेन में इलाज

जमनाहेल्थ टेक ने एक डिवाइस विकसित किया है, जो रेलवे और फ्लाइट में इमरजेंसी मेडिकल ट्रीटमेंट दे सकती है। यह डिवाइस भारत की पहली ऐसी डिवाइस है जो ट्रेन और प्लेन में बीपी, पल्स, टेम्परेचर जैसे पैरामीटर लेकर इमरजेंसी मेडिकल में मदद करती है।

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अस्पतालों से लेकर सड़कों तक AI रोबोट का प्रयोग

इंदौर की फ्रबिरोबोटिक्स ने एक स्वचालित सफाई रोबोट पेश किया है। यह रोबोट एक घंटे में 10 हजार स्क्वायर फीट के क्षेत्र को साफ कर सकता है। यह रोबोट स्वचालित रूप से झाड़ू, पोंछा और स्क्रबिंग तीनों काम करता है, और इसे अस्पतालों, होटलों और बड़े दफ्तरों में इस्तेमाल किया जा रहा है।

आउटडोर लॉजिस्टिक्स रोबोट

इसके अलावा, आउटडोर लॉजिस्टिक्स रोबोट 500 किलो वजन का सामान एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुंचा सकता है। इंदौर में इसकी टेस्टिंग हो चुकी है, और इसे अब अमेरिका के साउथ कैरोलीना में परखा जा रहा है।

AI से स्किल डेवलपमेंट और किसानी में सुधार

क्रिश्कांत नामक स्टार्टअप ने कम्युनिकेशन स्किल्स पर एआई आधारित प्रशिक्षण प्लेटफार्म विकसित किया है। इसने अब तक 40 हजार लोगों को ट्रेन किया है। ग्वालियर में स्थित इस प्लेटफार्म को फेसबुक और एचडीएफसी से फंडिंग मिली है।

एग्रीदूत का एआई आधारित खेती सुधार

एग्रीदूत एक एग्रीटेक स्टार्टअप है जो कृषि में एआई का इस्तेमाल कर किसानों को मदद दे रहा है। यह ऐप किसानों को मौसम, सिंचाई और फसल की स्थिति के बारे में सटीक जानकारी देता है। इसके माध्यम से अब तक 30 हजार किसानों को फायदा हुआ है।

चैटबॉट के जरिए डॉक्टर से संपर्क

मेडिवेंड नामक स्टार्टअप ने एक चैटबॉट विकसित किया है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में लोग अपने स्वास्थ्य के लक्षण बताकर डॉक्टर से सलाह ले सकते हैं। यह चैटबॉट डॉक्टर द्वारा सुझाई गई दवाएं भी मरीज को प्रदान कर सकता है।

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कुपोषण का एआई आधारित अनुमान

मध्यप्रदेश में एक एआई प्रोजेक्ट शुरू किया गया है। यह प्रोजेक्ट कुपोषित बच्चों का अनुमान लगाने में मदद करता है। इसमें बच्चों के स्वास्थ्य पर आधारित डेटा जैसे उनकी ऊंचाई, वजन, उम्र और जेंडर के आधार पर कुपोषण का अनुमान लगाया जाता है।

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