एमपी विधानसभा में गूंजा जन सेवा मित्रों की नियुक्ति का मामला, बेरोजगारी पर उठे सवाल
Manish Kumar | Mar 15, 2025, 16:32 IST
Photograph: (the sootr)
मध्य प्रदेश विधानसभा में 9300 जन सेवा मित्रों की सेवाएं समाप्त करने का मुद्दा गरमा गया है। पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान ने इन पदों को स्थायी करने का वादा किया था, लेकिन सीएम मोहन यादव के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद इनकी सेवाएं समाप्त कर दी गईं।
भोपाल. मध्य प्रदेश सरकार द्वारा नियुक्त किए गए 9300 जन सेवा मित्रों की नियुक्ति व उनकी सेवाएं समाप्त करने संबंधी मामला विधानसभा में गूंजा। विधायक डॉ. हीरालाल अलावा, कमलेश्वर डोडियार समेत कई अन्य विपक्षी विधायकों ने विधानसभा में इस मामले को उठाया। उन्होंने सरकार से मांग की कि जल्द से जल्द बेरोजगार हो चुके इन जन सेवा मित्रों के लिए प्रदेश सरकार कदम उठाए।
तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) ने इन 9300 जन सेवा मित्रों को स्थायी नौकरी देने का आश्वासन दिया था। उन्होंने कहा था कि "आप जन सेवा करें, आपके भविष्य की चिंता सरकार करेगी।" लेकिन 2024 में जब नई सरकार बनी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (CM Dr. Mohan Yadav) ने कार्यभार संभाला, तो जन सेवा मित्रों की सेवाएं समाप्त कर दी गईं। इससे हजारों युवा बेरोजगार हो गए।
9300 जन सेवा मित्रों ने विधायकों, सांसदों और अन्य जनप्रतिनिधियों से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा और अपनी नौकरियां बहाल करने की मांग की। इस मुद्दे को कई विधायकों ने विधानसभा में भी उठाया, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। सरकार की ओर से सिर्फ आश्वासन (Assurance) दिए जा रहे हैं, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
यह खबर भी पढ़ें... MP विधानसभा में विधायक बोलीं- पट्टा देने वाले आरोपी, लेने वालों को क्यों छोड़ा?
मध्य प्रदेश सरकार द्वारा 9300 जन सेवा मित्रों की नियुक्ति की गई थी, जिनका मुख्य कार्य सरकारी योजनाओं (Government Schemes) को गांवों तक पहुंचाना और गरीब परिवारों को लाभ दिलाना था। इनकी मदद से कई सरकारी योजनाओं की जानकारी सीधे लाभार्थियों तक पहुंचाई जाती थी। इससे ग्रामीण इलाकों में सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन बेहतर हो रहा था।
यह खबर भी पढ़ें... मालवा की फसलों पर नीलगायों का संकट, विधानसभा में विधायकों ने सुनाया किसानों का दुखड़ा
बेरोजगार हुए जन सेवा मित्रों ने कहा कि "हमने सरकार की योजनाओं को जमीनी स्तर पर पहुंचाने में मदद की, लेकिन सरकार ने हमें ही बेरोजगार कर दिया।" उनका कहना है कि "अगर हमें फिर से नियुक्ति नहीं दी गई, तो हम बड़े आंदोलन करने को मजबूर होंगे।"
यह खबर भी पढ़ें... विधानसभा की कार्यवाही से बाहर विधायक भूपेंद्र सिंह और हेमंत कटारे के असंसदीय बोल
सरकार का कहना है कि "जन सेवा मित्रों की नियुक्ति अस्थायी थी। इस योजना की अवधि समाप्त होने के कारण इनकी सेवाएं खत्म कर दी गई हैं।"
वहीं, विपक्ष ने सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया है। कांग्रेस का कहना है कि "पहले रोजगार देने की बात की गई थी, लेकिन अब 9300 युवाओं को बेरोजगार कर दिया गया है।"
यह खबर भी पढ़ें... बेरोजगारी का ताना देना पड़ा भारी, गुस्साई गर्लफ्रेंड ने अजनबी से करवाई प्रेमी की हत्या
शिवराज सरकार ने किया था स्थायी करने का वादा
विधानसभा में पहले भी गूंजा मुद्दा, लेकिन कोई ठोस फैसला नहीं
यह खबर भी पढ़ें... MP विधानसभा में विधायक बोलीं- पट्टा देने वाले आरोपी, लेने वालों को क्यों छोड़ा?
क्या है जन सेवा मित्र योजना?
यह खबर भी पढ़ें... मालवा की फसलों पर नीलगायों का संकट, विधानसभा में विधायकों ने सुनाया किसानों का दुखड़ा
जन सेवा मित्रों की मांग- हमें न्याय चाहिए
यह खबर भी पढ़ें... विधानसभा की कार्यवाही से बाहर विधायक भूपेंद्र सिंह और हेमंत कटारे के असंसदीय बोल
सरकार की दलील और विपक्ष का विरोध
वहीं, विपक्ष ने सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया है। कांग्रेस का कहना है कि "पहले रोजगार देने की बात की गई थी, लेकिन अब 9300 युवाओं को बेरोजगार कर दिया गया है।"
यह खबर भी पढ़ें... बेरोजगारी का ताना देना पड़ा भारी, गुस्साई गर्लफ्रेंड ने अजनबी से करवाई प्रेमी की हत्या
FAQ
- जन सेवा मित्र कौन थे और उनका कार्य क्या था?
जन सेवा मित्र सरकार द्वारा नियुक्त 9300 कर्मचारी थे, जिनका कार्य था सरकारी योजनाओं की जानकारी ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंचाना और गरीब परिवारों को उनका लाभ दिलाना। - सरकार ने जन सेवा मित्रों की सेवाएं क्यों समाप्त की?
सरकार का कहना है कि यह योजना अस्थायी थी और इसकी अवधि समाप्त हो चुकी है, इसलिए सेवाएं बंद कर दी गईं। हालांकि, जन सेवा मित्रों का कहना है कि शिवराज सिंह चौहान ने उन्हें स्थायी करने का वादा किया था। - जन सेवा मित्रों की बहाली को लेकर सरकार का क्या रुख है?
अब तक सरकार ने सिर्फ आश्वासन दिया है, लेकिन कोई ठोस फैसला नहीं लिया गया। विधायकों ने विधानसभा में यह मुद्दा उठाया, लेकिन अब तक सरकार की ओर से कोई आधिकारिक निर्णय नहीं आया है।
IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी
By VINAY VERMA
राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं
By Ashish Bhardwaj
पाटन चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, भूपेश बघेल की आपत्ति पर पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करेगा सुनवाई
By Arun Tiwari
भोपाल की सेज यूनिवर्सिटी में छात्रों का हंगामा: हॉस्टल मेस के खाने में कीड़े मिलने का आरोप, अब खाद्य विभाग करेगा जांच
By Jitendra Shrivastava
UPI एमडीआर पर सुप्रीम कोर्ट का रोक से इनकार: 15 अक्टूबर से दुकानदारों को देना होगा 0.4 फीसदी चार्ज
By Sanjay Dhiman
अस्पताल का लैब बोतलों में भ्रूण : कोरबा के लाइफ केयर हॉस्पिटल में कौन सा खेल? कोर्ट को भी नहीं मिला जवाब
By VINAY VERMA
RCA चुनाव में बड़ा उलटफेर, राजेंद्र राठौड़ के बेटे पराक्रम सिंह ने छोड़ा मैदान
By Ashish Bhardwaj